यमुना एक्सप्रेसवे पर ‘मौत’ का ओवरटेक: बस ने ईको वैन को उड़ाया; दंपती समेत 6 की मौत, 7 जिंदगी के लिए लड़ रहे जंग

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ यह भीषण सड़क हादसा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि तेज रफ्तार के जुनून और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के भयावह परिणामों को भी उजागर करता है। सादाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले माइलस्टोन 141 के पास मंगलवार तड़के करीब 4:15 बजे मौत ने जिस तरह तांडव मचाया, उसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। यह वह समय था जब एक्सप्रेसवे पर सन्नाटा पसरा होता है, लेकिन एक बेकाबू डबल डेकर बस की लापरवाही ने इस सन्नाटे को चीख-पुकार और मातम में बदल दिया।
हादसे का शिकार हुई ईको वैन में कुल 13 लोग सवार थे, जो दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में कड़ी मेहनत कर होली के पावन पर्व पर अपने पैतृक गांव धौलपुर और आगरा लौट रहे थे। इन परिवारों की आंखों में अपनों से मिलने की चमक और त्योहार की खुशियां थीं, लेकिन हाथरस की सीमा में प्रवेश करते ही उनकी खुशियों को किसी की नजर लग गई। नोएडा से गोरखपुर की ओर जा रही एक निजी डबल डेकर बस ने वैन को पीछे से इतनी जबरदस्त टक्कर मारी कि वैन हवा में लगभग 10 फीट ऊपर उछल गई और काफी दूर जाकर गिरी। टक्कर का वेग इतना तीव्र था कि वैन का पिछला हिस्सा पूरी तरह से लोहे के मलबे में तब्दील हो गया, जिससे उसमें बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इस हृदयविदारक घटना में छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो दंपती भी शामिल थे। मृतकों की पहचान विजय और उनकी पत्नी पिंकी, दिनेश और उनकी पत्नी सुनीता देवी, नाथू देवी और लोकेश के रूप में हुई है। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि छह ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है। मृतक दिनेश के भाई संजू की आपबीती सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। दिनेश नोएडा में मिठाई की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे और अपने बच्चों के साथ त्योहार मनाने जा रहे थे। अब उनके बच्चे अस्पताल के बेड पर गंभीर रूप से घायल पड़े हैं और उनके सिर से माता-पिता दोनों का साया एक साथ उठ गया है।
पुलिस और प्रशासनिक जांच में इस हादसे की मुख्य वजह बस चालक द्वारा ईको वैन को गलत तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश बताई जा रही है। रफ्तार का आलम यह था कि चालक ने दूरी और गति का अंदाजा लगाने में भारी चूक की, जिसका खामियाजा निर्दोष यात्रियों को भुगतना पड़ा। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा और एएसपी रामानंद कुशवाहा ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य का नेतृत्व किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक और परिचालक को हिरासत में ले लिया है, लेकिन क्या यह कार्रवाई उन उजड़े हुए परिवारों को वापस ला पाएगी?
हादसे में घायल सात अन्य लोगों, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं, का इलाज फिलहाल आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में चल रहा है। एक्सप्रेसवे की रेस्क्यू टीम और स्थानीय पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर रास्ता साफ कराया, लेकिन सड़क पर फैले खून के धब्बे और बिखरा हुआ सामान उस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहे थे। यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले ये हादसे अब आम हो चले हैं, जो कहीं न कहीं सुरक्षा मानकों और रात के समय पेट्रोलिंग पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।
अंततः, यह घटना हमें एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या चंद मिनट बचाने की होड़ किसी की जान से ज्यादा कीमती हो सकती है? त्योहारों के समय जब लोयमुना एक्सप्रेसवे पर ‘मौत’ का ओवरटेक: बस ने ईको वैन को उड़ाया; दंपती समेत 6 की मौत, 7 जिंदगी के लिए लड़ रहे जंगग अपने घरों की ओर रुख करते हैं, तब ड्राइवरों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। रफ्तार की इस अंधी दौड़ ने हाथरस में जिस तरह से मातम फैलाया है, वह लंबे समय तक लोगों की यादों में एक डरावने सपने की तरह बना रहेगा। प्रशासन को अब केवल जांच तक सीमित न रहकर, एक्सप्रेसवे पर गति सीमा को सख्ती से लागू करने और लापरवाही करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

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