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Uttarakhand SIR: फुरकान अहमद के नाम पर आपत्ति, कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

On: August 21, 2026 11:36 AM
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Uttarakhand SIR: Objection to Furkan Ahmed's name; Congress raises serious questions.

Uttarakhand SIR: यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब हरिद्वार जिले की पिरान कलियर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मोहम्मद फुरकान अहमद के नाम पर ही मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। विधायक का आरोप है कि उनके नाम को हटाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दाखिल की गई। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे गंभीर राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Uttarakhand SIR: विधायक फुरकान अहमद ने लगाए गंभीर आरोप

देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में विधायक फुरकान अहमद ने Uttarakhand SIR के दौरान सामने आए इस मामले की जानकारी दी। उनके मुताबिक वह पिरान कलियर क्षेत्र के वार्ड संख्या 126 के पंजीकृत मतदाता हैं। इसके बावजूद उनके नाम को मतदाता सूची से हटाने के उद्देश्य से मोहम्मद फुरकान नाम के एक व्यक्ति के जरिए फॉर्म-7 दाखिल किया गया।

फॉर्म-7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी फॉर्म-7 को मौजूदा electoral roll से नाम हटाने की प्रक्रिया के तौर पर दर्शाया गया है।

विधायक का कहना है कि जब उन्होंने उस व्यक्ति से संपर्क कर आपत्ति के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो उसने ऐसी किसी शिकायत को दर्ज कराने से साफ इनकार कर दिया। बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने इस संबंध में शपथपत्र भी तैयार कर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष सौंपा है। इस घटनाक्रम ने Uttarakhand SIR की प्रक्रिया पर कांग्रेस के सवाल और ज्यादा बढ़ा दिए हैं।

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पिरान कलियर में 1700 से ज्यादा आपत्तियों का दावा

फुरकान अहमद ने दावा किया कि अकेले उनके विधानसभा क्षेत्र में 1700 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज की गई हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गईं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी इससे पहले Uttarakhand SIR के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर निर्वाचन अधिकारियों के सामने शिकायत रखी थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों के नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियां ऑनलाइन दर्ज की गईं और कई मामलों में जमीनी सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे अपने पंजीकृत पते पर ही रह रहे थे।

एक नाम से दर्जनों आपत्तियों ने बढ़ाई चिंता

उत्तराखंड में Uttarakhand SIR के दौरान आपत्तियों के पैटर्न को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ व्यक्तियों के नाम पर 100 से अधिक आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। एक रिपोर्ट में एक ही नाम से 156 आपत्तियां दर्ज होने का दावा किया गया, जबकि शीर्ष 10 नामों के खिलाफ 1124 शिकायतों का उल्लेख किया गया।

कांग्रेस का कहना है कि अगर एक ही व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल करने के लिए किया जा रहा है तो निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पार्टी ने मांग की है कि ऐसी आपत्तियों की पहचान, सत्यापन और वास्तविक शिकायतकर्ता की पुष्टि की जाए।

Uttarakhand SIR: चुनाव आयोग की प्रक्रिया और जांच का महत्व

Uttarakhand SIR के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है। उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित की गई थी और उसके बाद दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

निर्वाचन अधिकारियों की ओर से पहले ही यह स्पष्ट किया गया है कि पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं छूटना चाहिए और किसी भी मतदाता का नाम बिना निर्धारित प्रक्रिया और नोटिस के नहीं हटाया जाना चाहिए।

ऐसे में विधायक के नाम पर दर्ज आपत्ति की वास्तविकता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर शिकायत गलत पाई जाती है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि आवेदन किस माध्यम से और किस आधार पर दाखिल हुआ। वहीं अगर शिकायत वैध होती है तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर निर्वाचन अधिकारी को नियमानुसार निर्णय लेना होगा।

कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

मामले को लेकर कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर भी निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि Uttarakhand SIR के नाम पर यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश होती है तो यह सिर्फ राजनीतिक दलों का मुद्दा नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।

कांग्रेस नेताओं ने पहले भी निर्वाचन आयोग से मांग की है कि जिन फॉर्म-7 आपत्तियों का आधार संदिग्ध है, उनका सत्यापन कराया जाए और बिना जांच किसी भी मतदाता का नाम हटाने की कार्रवाई न की जाए। पार्टी ने गलत जानकारी देकर आपत्ति दर्ज कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

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अदालत जाने की तैयारी की बात

विधायक फुरकान अहमद ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कानूनी कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी निर्वाचित विधायक का नाम ही इस तरीके से हटाने की कोशिश की जा सकती है, तो आम मतदाता के सामने पैदा होने वाली संभावित परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह मामले को अदालत तक ले जाएगी।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर निर्वाचन अधिकारियों की जांच और अंतिम निर्णय पर है। Uttarakhand SIR के दौरान सामने आया यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है। एक तरफ निर्वाचन आयोग का लक्ष्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल गलत आपत्तियों के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जता रहे हैं।

फुरकान अहमद के मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि उनके नाम के खिलाफ दाखिल आपत्ति वास्तव में किसने की और उसके पीछे क्या आधार था। यदि शिकायतकर्ता ने आवेदन नहीं किया है, तो यह जांच का विषय होगा कि उसके नाम का इस्तेमाल किस तरह हुआ। चुनावी लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए Uttarakhand SIR के तहत ऐसी हर शिकायत की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।

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