हरिद्वार नगर निगम में सामने आए बहुचर्चित भूमि घोटाले को लेकर पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शासन ने चौधरी के 16 माह के कार्यकाल की गहन जांच के लिए विशेष लेखा परीक्षा की व्यवस्था की है। ऑडिट निदेशालय ने दो वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की निगरानी में एक विशेष समिति गठित की है, जिसे आगामी 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
आरोप है कि नगर निगम ने एक अनुपयुक्त और कचरे के ढेर के पास स्थित 35 बीघा कृषि भूमि को बिना ठोस आवश्यकता के 54 करोड़ रुपये की भारी कीमत पर खरीदा। इस संदिग्ध खरीद की ज़िम्मेदारी तत्कालीन नगर आयुक्त और वर्तमान में निलंबित आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के कार्यकाल से जुड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस प्रकरण की पारदर्शी जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऑडिट कार्य के लिए उप निदेशक विजय प्रताप सिंह को पर्यवेक्षक और सहायक निदेशक रजत मेहरा को सहायक पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। विशेष लेखा परीक्षा समिति का नेतृत्व लेखा परीक्षा अधिकारी किशन सिंह बिष्ट करेंगे। समिति में अन्य सदस्यों के रूप में संजय गुप्ता, ओम प्रकाश, भूपेंद्र सिंह और विमल मित्तल शामिल हैं। इन अधिकारियों को जांच के दौरान किसी अन्य कार्य में नहीं लगाया जाएगा।
समिति को कार्य के लिए नगर निगम की ओर से एक पृथक कार्यालय उपलब्ध कराया जाएगा, जहां पर्यवेक्षक अधिकारियों की निगरानी में ऑडिट कार्य निष्पादित होगा। शासन की मंशा स्पष्ट है—सार्वजनिक धन की बर्बादी पर लगाम लगाना और दोषियों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना।
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