नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने पीएफ खातों में सालों से ‘लावारिस’ पड़ी करोड़ों की धनराशि को उनके असली हकदारों तक पहुँचाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की है कि मंत्रालय उन निष्क्रिय (Inoperative) खातों में जमा राशि को वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है, जिन पर लंबे समय से किसी ने दावा नहीं किया है।
सरकार के इस कदम से देशभर के लगभग 31 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 31.86 लाख निष्क्रिय खाते ऐसे हैं, जिनमें कुल 10,903 करोड़ रुपये जमा हैं। ये ऐसे अकाउंट्स हैं जिनमें पिछले कई वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। अक्सर कर्मचारी नौकरी बदलने या पुरानी कंपनी छोड़ने के बाद अपना पीएफ ट्रांसफर करना या निकालना भूल जाते हैं, जिससे यह पैसा ‘अनक्लेम्ड’ (Unclaimed) कैटेगरी में चला जाता है।
श्रम मंत्री मंडाविया के अनुसार, सरकार इस पैसे को अब सीधे सब्सक्राइबर्स के बैंक खातों में भेजने की तैयारी कर रही है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण की शुरुआत
इस मेगा रिफंड प्लान को चरणों में लागू किया जाएगा। पहले फेज यानी पायलट फेज के लिए सरकार ने एक विशेष रणनीति तैयार की है:
- 7.11 लाख सब्सक्राइबर्स को पहले चरण में फायदा मिलेगा।
- इस फेज में उन खातों को टारगेट किया गया है जिनमें 1,000 रुपये तक की राशि जमा है।
- इन खातों में कुल मिलाकर लगभग 30.52 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो सरकार बाकी बचे 25 लाख निष्क्रिय खातों के लिए भी इसी तरह का ऑटोमैटिक रिफंड सिस्टम लागू करेगी।
किसे और कैसे मिलेगा यह पैसा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह पैसा किन लोगों के खाते में आएगा? सरकार ने इसके लिए कुछ मानक तय किए हैं: - आधार सीडिंग: रिफंड केवल उन्हीं सब्सक्राइबर्स को मिलेगा जिनके पीएफ खाते से आधार कार्ड और बैंक विवरण पहले से लिंक हैं।
- KYC अपडेट: जिन खातों का केवाईसी (Know Your Customer) पूरा है, उनमें ईपीएफओ सीधे राशि क्रेडिट कर सकेगा।
- इनऑपरेटिव स्टेटस: वे खाते जो 20 साल तक पुराने हैं और जिनमें पिछले 3 सालों से कोई ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है, उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।
विशेष नोट: पहले छोटे अमाउंट (0 से 1000 रुपये) वाले खातों को प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि अक्सर लोग कम राशि होने के कारण जटिल कागजी कार्रवाई से बचते थे। अब सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला लिया है।
20 साल पुराने खातों का होगा निपटारा
श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कई खाते दशकों पुराने हैं। पहले के नियमों के अनुसार, पीएफ निकालने के लिए क्लेम फाइल करना और भारी-भरकम डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत होती थी। कई बार बैलेंस इतना कम होता था कि लोग कागजी कार्रवाई के चक्कर में उसे छोड़ देते थे। अब चूंकि ईपीएफओ के पास डिजिटल डेटा और आधार-लिंक्ड बैंक खाते मौजूद हैं, इसलिए रिटायरमेंट फंड बॉडी इस पेंडिंग अमाउंट को बिना किसी परेशानी के सीधे सब्सक्राइबर्स तक पहुँचा सकती है।
क्या होता है प्रोविडेंट फंड (PF)?
नए कर्मचारियों और युवाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि पीएफ आखिर है क्या? प्रोविडेंट फंड (EPF) भारत में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य बचत योजना है। इसमें कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा और इतना ही हिस्सा नियोक्ता (Employer) द्वारा जमा किया जाता है। इस जमा राशि पर सरकार सालाना आकर्षक ब्याज देती है, जो रिटायरमेंट के समय एक बड़ी पूंजी के रूप में काम आता है।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि उन लाखों लोगों को राहत देगा जिनका पैसा सिस्टम में फंसा हुआ था। यह डिजिटल इंडिया और ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।









