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दिल्ली के साध नगर में भीषण अग्निकांड: एक ही परिवार के 7 लोगों की दर्दनाक मौत, खुशियां मातम में बदलीं

On: March 18, 2026 6:17 AM
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दिल्ली के साध नगर में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद बचाव कार्य में जुटे दमकलकर्मी और पुलिस बल।

नई दिल्ली |
देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले से एक रूह कपा देने वाली खबर सामने आई है। पालम स्थित साध नगर इलाके में बुधवार तड़के एक चार मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। इस हृदयविदारक हादसे ने एक ही हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया है। आग की चपेट में आने से तीन मासूम बच्चों समेत परिवार के 7 सदस्यों की दम घुटने और जलने से मौत हो गई। वहीं, तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझते हुए भर्ती कराया गया है।

तड़के सुबह का मंजर: जब चीख-पुकार से गूंज उठा साध नगर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना बुधवार तड़के की है जब इलाके के लोग गहरी नींद में सो रहे थे। साध नगर की गली नंबर-8 में स्थित इस चार मंजिला इमारत के भूतल (Ground Floor) से अचानक धुएं का गुबार उठने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और ऊपर की मंजिलों की ओर बढ़ गई।

इमारत के निचले हिस्से में परिवार की कॉस्मेटिक और जनरल स्टोर की दुकानें थीं। दुकानों में रखे प्लास्टिक और केमिकल युक्त सामान ने आग में घी का काम किया, जिससे चंद मिनटों में पूरी सीढ़ी और गैलरी धुएं से भर गई। ऊपर रह रहे परिवार के सदस्यों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं के कारण विजिबिलिटी शून्य हो गई और दम घुटने की वजह से लोग बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाए।

बचाव अभियान में संकरी गलियां बनीं बाधा

हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS) और स्थानीय पुलिस हरकत में आई। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं, लेकिन साध नगर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके की संकरी गलियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती पेश की।

  • चुनौती: भारी भरकम दमकल की गाड़ियां और एम्बुलेंस इमारत के मुख्य द्वार तक नहीं पहुंच पा रही थीं।
  • प्रयास: दमकलकर्मियों ने काफी दूर गाड़ियां खड़ी कर पाइपों के जरिए आग पर काबू पाने की कोशिश की।
  • रेस्क्यू: पुलिस और स्थानीय युवाओं ने साहस दिखाते हुए इमारत में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक आग और धुआं जानलेवा स्तर तक पहुंच चुका था।

मृतकों और घायलों का विवरण

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हादसे में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां खत्म हो गई हैं। मृतकों में 3 बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं।

  • मृतक: परिवार के 7 सदस्यों की मौत मौके पर या अस्पताल ले जाते समय हो गई।
  • घायल: तीन बच्चों को गंभीर हालत में पालम स्थित दिव्य प्रस्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों की स्थिति नाजुक बनी हुई है क्योंकि उन्होंने भारी मात्रा में जहरीला धुआं अंदर ले लिया है।

शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा शुरुआती कारण

शुरुआती जांच में दिल्ली पुलिस और फायर विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आग लगने की मुख्य वजह इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट हो सकती है।

“प्राथमिक दृष्टि से ऐसा प्रतीत होता है कि ग्राउंड फ्लोर पर लगे बिजली के मीटर या बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ। चूंकि वहां कॉस्मेटिक का सामान रखा था, इसलिए आग तेजी से फैली। धुआं सीढ़ियों के रास्ते ऊपर गया, जो ‘चिमनी इफेक्ट’ की तरह काम कर गया और ऊपर सो रहे लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका नहीं मिला।” – जांच अधिकारी

मकान की बनावट और सुरक्षा मानकों पर सवाल

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े करता है।

  • सिंगल एग्जिट: इमारत में बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था, जो आग की चपेट में आ गया।
  • फायर एनओसी: क्या इस चार मंजिला इमारत के पास फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम थे? पुलिस इसकी जांच कर रही है।
  • अवैध भंडारण: रिहायशी इलाके में ज्वलनशील कॉस्मेटिक सामान का स्टॉक करना भी इस त्रासदी का बड़ा कारण बना।

इलाके में पसरा सन्नाटा, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

हादसे के बाद पूरे साध नगर और पालम इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह परिवार वर्षों से यहां रह रहा था और काफी मिलनसार था। दिल्ली सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना किया है। फॉरेंसिक टीम (FSL) को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि आग लगने के सटीक कारणों का वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाया जा सके।

यह भी पढ़ें-उत्तराखंड का सबसे बड़ा वित्तीय महाघोटाला: LUCC चिटफंड केस में आज हाईकोर्ट में सुनवाई, पेश होगी अब तक की जांच रिपोर्ट

निष्कर्ष:

साध नगर की यह घटना एक चेतावनी है। संकरी गलियों में बनी बहुमंजिला इमारतें आग लगने की स्थिति में ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो रही हैं। प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बिजली के लोड और फायर एग्जिट जैसे विषयों पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में कोई दूसरा परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न हो।

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