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असम विधानसभा चुनाव: कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीदें खत्म, झामुमो ने जारी की 21 प्रत्याशियों की पहली सूची

On: March 23, 2026 1:05 PM
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असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए झामुमो की प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रत्याशियों की सूची का प्रदर्शन।

गुवाहाटी/रांची | 23 मार्च, 2026

असम विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। लंबे समय से चल रही गठबंधन की अटकलों पर विराम लगाते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अब अकेले चुनावी मैदान में उतरने का शंखनाद कर दिया है। कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिशें नाकाम होने के बाद, झामुमो ने राज्य की 21 महत्वपूर्ण सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है।

पार्टी के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय के हस्ताक्षरित इस सूची के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि असम में अब त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। झामुमो अब न केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बल्कि अपने पुराने सहयोगी दल कांग्रेस के खिलाफ भी ताल ठोक रही है।

गठबंधन की कोशिशें क्यों हुई नाकाम?

झारखंड की सत्ता पर काबिज झामुमो पिछले कई महीनों से असम के आदिवासी बेल्ट (चाय बागान क्षेत्रों) में अपनी जमीन तैयार कर रही थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद राज्य के कई दौरे किए और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से गठबंधन को लेकर चर्चा की थी। हालांकि, सीटों के बंटवारे और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार चुनावों की तरह ही असम में भी कांग्रेस और राजद ने झामुमो को अपेक्षित तवज्जो नहीं दी, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
21 योद्धाओं की सूची: चाय बागान और आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस
झामुमो की इस सूची में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ झारखंडी मूल के आदिवासियों और चाय बागान श्रमिकों की संख्या निर्णायक भूमिका में है। पार्टी ने अनुभवी और स्थानीय चेहरों पर दांव लगाया है।

प्रमुख प्रत्याशियों के नाम:

झामुमो द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, निम्नलिखित चेहरों को चुनावी समर में उतारा गया है:

  • मजबत: प्रीति रेखा बारला
  • विश्वनाथ: तेहरू गौर
  • खुमतई: अमित नाग
  • चाबुआ: भूपेन मुरारी
  • गोसाईगांव: फेडक्रिसन हांसदा
  • सोनारी: बलदेव तेली
  • डिगबोई: भरत नायक
  • दुमदुमा: रत्नाकर तांती

इसके अलावा, भेरगांव से प्रभात दास पनिका, तिंगखौंग से महावीर बास्के, और रांगापाड़ा से मैथ्यू टोपनो जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी ने टीटाबोर से सोनिया और बोकाजन से प्रतापचिंग रंगपहाड़ को टिकट देकर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है।

हेमंत सोरेन का ‘असम मिशन’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले कुछ समय से असम के आदिवासी इलाकों में काफी सक्रिय रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य असम में रह रहे लाखों झारखंडी मूल के लोगों (जिन्हें वहाँ ‘टी-ट्राइब्स’ कहा जाता है) को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपनी पार्टी से जोड़ना है। झामुमो का तर्क है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही इस समुदाय की उपेक्षा की है।

पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसमें हेमंत सोरेन के साथ-साथ राज्य के अन्य दिग्गज नेता असम की गलियों में झामुमो का झंडा बुलंद करते नजर आएंगे।

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त्रिकोणीय मुकाबले से किसे होगा नुकसान?

विशेषज्ञों का मानना है कि झामुमो का अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकता है। चाय बागान क्षेत्रों में जो वोट बैंक पारंपरिक रूप से कांग्रेस के साथ रहा है, उसमें झामुमो सेंध लगा सकती है। यदि आदिवासी वोटों का बिखराव होता है, तो इसका सीधा लाभ सत्ताधारी भाजपा को मिल सकता है।
हालांकि, झामुमो का दावा है कि वे केवल ‘वोट कटवा’ पार्टी नहीं हैं, बल्कि एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। पार्टी महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि पार्टी की योजना आदिवासी इलाकों में मजबूती से चुनाव लड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की है।

असम के चुनावी रण में अब आगे क्या?

झामुमो के इस कदम ने असम की राजनीति को दिलचस्प बना दिया है। पार्टी अब “झारखंड मॉडल” के आधार पर असम के आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन के अधिकार दिलाने का वादा कर रही है। अब देखना यह होगा कि असम की जनता, विशेषकर चाय बागान श्रमिक, हेमंत सोरेन की पार्टी पर कितना भरोसा जताते हैं।

निष्कर्ष

असम विधानसभा चुनाव अब केवल भाजपा बनाम कांग्रेस का मुकाबला नहीं रह गया है। क्षेत्रीय दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने राष्ट्रीय दलों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। झामुमो की 21 सीटों पर दावेदारी असम की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

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