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उत्तराखंड में अग्निवीरों के लिए ऐतिहासिक पहल: धामी सरकार उठाएगी पुनर्वास का अभूतपूर्व कदम, बनेगा देश का पहला राज्य

On: July 17, 2026 12:26 PM
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Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami addressing a gathering with Agniveer jawans in the background, representing the new rehabilitation scheme.

​मुख्य बिंदु:

• ​10% क्षैतिज आरक्षण के बाद अब ‘विशेष पुनर्वास बोर्ड’ का होगा गठन।


• ​सेना से सेवामुक्त होने वाले 100% अग्निवीरों को रोजगार देने का रोडमैप तैयार।


• ​निजी क्षेत्रों से सहयोग, स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता और विशेष कौशल प्रशिक्षण पर जोर।


• ​उत्तराखंड बनेगा देश का पहला ऐसा राज्य जो अग्निवीरों के लिए इतनी व्यापक नीति ला रहा है।


देहरादून:

देश की सेवा में अपना सर्वस्व देने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। उत्तराखंड सरकार अग्निवीरों के हित में कई ऐसे अहम फैसले लेने जा रही है, जिससे राज्य के युवा न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि सेना से लौटने के बाद उनका भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

​धामी सरकार की इस नई योजना के लागू होते ही उत्तराखंड, देश के वीर जवानों (अग्निवीरों) के पुनर्वास के लिए इतनी व्यापक व्यवस्था करने वाला भारत का पहला राज्य बन जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि ‘अग्निपथ योजना’ के तहत सेवामुक्त होकर लौटने वाले हर एक युवा को उसकी योग्यता के अनुसार काम या रोजगार का अवसर मिले।

​समूह ‘ग’ में 10% आरक्षण के बाद अब ‘पुनर्वास बोर्ड’ की तैयारी

​उत्तराखंड सरकार पहले ही राज्य के सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीर युवाओं को सरकारी नौकरियों के समूह ‘ग’ (Group C) में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) देने का फैसला कर चुकी है। लेकिन सरकार का मानना है कि सिर्फ आरक्षण देना ही काफी नहीं है, बल्कि शत-प्रतिशत युवाओं का समायोजन सुनिश्चित करना जरूरी है।

​इसी उद्देश्य के साथ अब राज्य में एक ‘विशेष अग्निवीर पुनर्वास बोर्ड’ का गठन करने की तैयारी चल रही है। यह बोर्ड सीधे तौर पर रिटायर होकर आने वाले अग्निवीरों की प्रोफाइलिंग करेगा, उनकी कुशलताओं का डेटाबेस तैयार करेगा और उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार दिलाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की तरह काम करेगा।

​सरकारी नौकरी से बचे युवाओं के लिए ‘प्लान-बी’: स्वरोजगार और कौशल विकास

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जो अग्निवीर युवा 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के दायरे या राज्य सरकार की सीधी नौकरियों में समायोजित होने से रह जाएंगे, उनके लिए धामी सरकार विशेष योजनाएं चलाने जा रही है।

• ​विशेष कौशल प्रशिक्षण: सेना से लौटने वाले इन युवाओं को आधुनिक कॉर्पोरेट और तकनीकी जगत की जरूरतों के अनुसार ‘विशेष कौशल प्रशिक्षण’ (Special Skill Training) दिया जाएगा।


• ​स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन: जो युवा खुद का स्टार्टअप, उद्योग या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सरकार की ओर से सब्सिडी, आसान लोन और प्रशासनिक मदद दी जाएगी।


•  ​व्यावसायिक शिक्षा के लिए वित्तीय मदद: यदि कोई अग्निवीर सेवामुक्त होने के बाद निजी क्षेत्र (Private Sector) में उच्च पदों पर जाने के लिए कोई विशेष व्यावसायिक कोर्स या डिग्री (जैसे MBA, टेक कोर्सेज आदि) करना चाहता है, तो धामी सरकार उसे भारी आर्थिक सहायता (Financial Assistance) प्रदान करेगी।

“हमारा लक्ष्य स्पष्ट है— देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे युवा जब उत्तराखंड वापस लौटें, तो उन्हें अपने भविष्य की चिंता न करनी पड़े। हम हर हाथ को काम और हर हुनर को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

— (शासन स्तर के सूत्रों के अनुसार सरकार का दृष्टिकोण)

• ​निजी क्षेत्र (Private Sector) के साथ मिलकर बनेगा बड़ा नेटवर्क

• ​अग्निपथ योजना के पहले बैच से सेवामुक्त होने वाले हर एक अग्निवीर को कहीं न कहीं सेटल करने के लिए उत्तराखंड सरकार चौतरफा रणनीति अपना रही है। इसके तहत देश और राज्य की बड़ी निजी कंपनियों, औद्योगिक घरानों और सुरक्षा एजेंसियों से भी संपर्क साधा जा रहा है।


• ​सैन्य अनुशासन, समयबद्धता और कठिन परिस्थितियों में काम करने के अग्निवीरों के अनुभव का लाभ उठाने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियां भी खासी उत्साहित हैं। सरकार इन कंपनियों के साथ मिलकर कस्टमाइज्ड प्लेसमेंट ड्राइव चलाने पर विचार कर रही है, ताकि कोई भी युवा बेरोजगार न रहे।


• ​केंद्र सरकार के स्तर पर भी चल रहा है मंथन


• ​गौरतलब है कि केंद्र सरकार की मौजूदा ‘अग्निपथ योजना’ के तहत चार साल की सेवा के बाद कुल बैच के 25 फीसदी सैनिकों को स्थायी सेवा में रखने का प्रावधान है। हालांकि, देश भर में हो रही चर्चाओं और सेनाओं की व्यावहारिक आवश्यकताओं को देखते हुए, हाल के दिनों में इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में केंद्र सरकार इस प्रतिशत (25%) को बढ़ा सकती है।

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• ​लेकिन केंद्र के फैसले से इतर, उत्तराखंड की धामी सरकार ने अपनी तरफ से बाकी 75 फीसदी युवाओं के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है। देवभूमि उत्तराखंड को ‘सैन्य धाम’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ के हर घर से कोई न कोई सदस्य सेना में अपनी सेवाएं देता है। ऐसे में धामी सरकार का यह कदम राज्य के युवाओं का मनोबल बढ़ाने वाला और पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल साबित होने वाला है।

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