दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की खुली पोल: पहली बारिश में ही उभरे गहरे गड्ढे, पिलर में दरारें आने से बढ़ी दहशत

​विशेष संवाददाता, देहरादून।

उत्तराखंड के विकास का मुख्य द्वार और देश की सबसे आधुनिक सड़क परियोजनाओं में शुमार ‘दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे’ मानसून की पहली ही बारिश में बुनियादी खामियों का शिकार हो गया है। करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट के दावों की परतें पहली ही मानसूनी बौछार ने उधेड़ कर रख दी हैं।


​उद्घाटन के महज दो महीने के भीतर ही इस हाई-टेक एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे उभर आए हैं, वहीं फ्लाईओवर के पिलर के निचले हिस्से में आई गंभीर दरारों ने राहगीरों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, डाट काली मंदिर के पास पहाड़ियों को सुरक्षित करने का काम समय पर पूरा न होने के कारण एनएचएआई (NHAI) को भारी और चारपहिया वाहनों का डायवर्जन 10 दिन के लिए और आगे बढ़ाना पड़ा है।


​दो महीने में ही छलनी हुई सड़क, पिलर के नीचे आई दरारें

​केंद्रीय सड़क परियोजनाओं के तहत इस एक्सप्रेसवे को दून और दिल्ली के बीच का सफर आसान करने के लिए रिकॉर्ड समय में तैयार करने का दावा किया गया था। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उद्घाटन के केवल दो माह बाद हुई तेज बारिश ने पूरी सड़क को जगह-जगह से क्षतिग्रस्त कर दिया है।

​खामियों का मुख्य बिंदु:

  • ​अधूरी जल निकासी (Poor Drainage System): जानकारों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पर पानी की निकासी की व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं की गई थी। बारिश का पानी सड़क पर जमा होने की वजह से डामर उखड़ गया और गहरे गड्ढे बन गए।
  • ​पिलर में आई दरारें: सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और डराने वाली तस्वीर डाट काली मंदिर के लिए बनाए गए एप्रोच फ्लाईओवर के पास से आई है। यहाँ फ्लाईओवर को मजबूती देने वाले पिलर के निचले हिस्से (फाउंडेशन एरिया) में शुक्रवार को बड़ी और गहरी दरारें देखी गईं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
    ​डाट काली के पास लटका खतरा: अधर में अटका पहाड़ी कटान

​एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को सुरक्षित बनाने के लिए डाट काली मंदिर के पास एलिवेटेड मार्ग के ऊपर मंडरा रही छह विशालकाय और खतरनाक चट्टानों को हटाया जाना था। एनएचएआई ने दावा किया था कि मानसून के दस्तक देने से पहले, यानी 8 जून तक सभी खतरनाक बोल्डरों को हटाकर इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा।


​विंडबना यह है कि जुलाई का महीना शुरू हो चुका है और अब तक छह में से केवल तीन चट्टानों को ही हटाया जा सका है। अब जब मानसून सक्रिय हो चुका है, तब बारिश के बीच पहाड़ी को काटने का काम किया जा रहा है। बारिश में पहाड़ी कटान के कारण भूस्खलन का खतरा और अधिक बढ़ गया है, जिसकी वजह से काम की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है।


​10 दिन और बढ़ा डायवर्जन, आम जनता और यात्री बेहाल

​चट्टानें पूरी तरह न हटने और सुरक्षात्मक कार्य अधूरे होने के चलते एनएचएआई को देहरादून आने-जाने वाले चारपहिया वाहनों और बसों के लिए लागू डायवर्जन को करीब डेढ़ सप्ताह (10 दिन) के लिए और बढ़ाना पड़ा है।
​रोजाना हजारों वाहन झेल रहे अतिरिक्त सफर का दर्द

​इस बढ़े हुए डायवर्जन के कारण दिल्ली और देहरादून के बीच सफर करने वाले यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है:

  1. ​वैकल्पिक मार्गों पर दबाव: चारपहिया और भारी वाहनों को पुराने और संकरे वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जा रहा है, जिससे सफर का समय डेढ़ से दो घंटे बढ़ गया है।
  2. ​शहर के भीतर ट्रैफिक जाम: डायवर्जन के कारण देहरादून शहर के प्रवेश द्वारों और आंतरिक सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव बढ़ गया है, जिससे स्थानीय लोग भी जाम से जूझ रहे हैं।
  3. ​सिर्फ दोपहिया वाहनों को छूट: सुरक्षा कारणों को देखते हुए एलिवेटेड मार्ग से फिलहाल केवल दोपहिया वाहनों को ही गुजरने की इजाजत दी गई है।
    ​यात्रियों का स्पष्ट कहना है कि अगर एनएचएआई प्रशासन ने समय रहते प्री-मानसून प्लान के तहत काम पूरा कर लिया होता, तो जनता को आज इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
    ​बड़ा सवाल: अधूरी तैयारी के साथ जल्दबाजी में क्यों खोला एक्सप्रेसवे?

​इस पूरी अव्यवस्था के सामने आने के बाद अब जनता और विशेषज्ञ सरकार व संबंधित ठेका कंपनियों पर सवाल उठा रहे हैं। सवाल यह है कि जब पहाड़ी सुरक्षा का कार्य अधूरा था, जल निकासी की व्यवस्था मुकम्मल नहीं थी और स्ट्रक्चरल ऑडिट सही से नहीं हुआ था, तो इतनी जल्दबाजी में इस एक्सप्रेसवे को आम यातायात के लिए क्यों खोला गया? क्या सिर्फ वाहवाही लूटने के चक्कर में हजारों यात्रियों की जान जोखिम में डाली गई?


​एनएचएआई का पक्ष: 10 दिन में स्थिति सामान्य करने का दावा

​इस पूरे विवाद और सुरक्षा चिंताओं पर एनएचएआई (NHAI) के परियोजना निदेशक ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

​”पहाड़ी कटान का कार्य अब लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अगले 10 दिनों के भीतर इस कार्य को पूरी तरह समाप्त कर लिया जाएगा, जिसके बाद डायवर्जन हटाकर दोनों लेन को सभी प्रकार के यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, पहाड़ी के स्थायी ट्रीटमेंट और सुदृढ़ीकरण के कार्य में थोड़ा समय और लग सकता है।”

ये भी पढ़े➜देहरादून में खूनी संघर्ष: शराब ठेके के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग, दो युवक लहूलुहान; इलाके में हड़कंप

— वैभव सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई

​निष्कर्ष:

भले ही अधिकारी जल्द सब कुछ ठीक करने का दावा कर रहे हों, लेकिन पहली ही बारिश ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोल दी है। पिलर में आई दरारें किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकती हैं, इसलिए सरकार को तुरंत इस पर संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच करानी चाहिए।

Leave a Comment