उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अलकनंदा नदी पर बन रही टीएचडीसी-एनटीपीसी (THDC-NTPC) की 444 मेगावाट क्षमता वाली विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की सुरंग में अचानक हुए भारी भूस्खलन के कारण बड़ा हादसा हो गया। इस Chamoli Tunnel Accident में अब तक 9 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 6 मजदूर अभी भी गायब बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
इस भयावह घटना में करीब 10 मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर, श्रीनगर और पीपलकोटी के अस्पतालों में जारी है। सुरंग के भीतर लगभग गले तक पानी और दलदली गाद भर जाने की वजह से राहत कर्मियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
What Caused the Chamoli Tunnel Accident at Vishnugad Pipalkoti Site?
परियोजना अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम लगभग 6:45 बजे हुई। उस समय 3.5 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग के अंदर लगभग 1.8 किलोमीटर की गहराई पर 25 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। वहां ग्रेविटी प्वाइंट पर टनल को पक्का करने (पैकिंग और सेटरिंग) का काम चल रहा था।
अचानक सुरंग के ऊपरी हिस्से से एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। इसके तुरंत बाद पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और भारी मात्रा में पानी के साथ गाद और मलबा तेजी से सुरंग के भीतर भरने लगा। मलबे के तीव्र बहाव के कारण वहां काम कर रहे श्रमिकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई मजदूर मलबे में दब गए।
Devastating Impact of the Chamoli Tunnel Accident on Workers
सुरंग में काम करने वाले अधिकांश मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के निवासी हैं। हादसे के वक्त टनल के मुहाने पर काम कर रहे कुछ मजदूर मलबे और पानी के तेज बहाव में बहकर किसी तरह बाहर निकल पाए, लेकिन अंदर गहराई में काम कर रहे कई श्रमिक दलदल में फंस गए।
झारखंड के निस्तरा भिंगरा निवासी एक प्रत्यक्षदर्शी मजदूर, जिनका गोपेश्वर अस्पताल में इलाज चल रहा है, ने आपबीती सुनाते हुए बताया:
”हम टनल के अंदर 1.8 किलोमीटर पर सेटरिंग का काम कर रहे थे। अचानक एक भयानक धमाका हुआ और छत से पानी का रेला मलबे के साथ नीचे आ गिरा। चीख-पुकार मच गई और सब इधर-उधर भागने लगे। मैं पानी के साथ बहता हुआ बाहर की तरफ आया, लेकिन पैर मलबे में लगातार धंस रहे थे।”
Rescue Operations Underway Following the Chamoli Tunnel Accident
घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, रात के समय सुरंग में पानी का जलस्तर बढ़ने, गाद जमा होने और ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे गिर जाने के कारण अभियान में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई।
एनडीआरएफ (NDRF) के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा ने बताया कि सुरंग में दृश्यता कम होने और जहरीली गैसों व ऑक्सीजन की कमी की वजह से सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए देर रात बचाव अभियान को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा था। सुबह भारी मशीनों, पंपों और ऑक्सीजन सिलेंडरों के साथ अभियान दोबारा शुरू कर दिया गया है।
Ground Situation and Key Statistics
- कुल हताहत (मृत्यु): हादसे में अब तक 9 मजदूरों की जान जा चुकी है।
- लापता श्रमिक: 6 मजदूर अभी भी गायब हैं, जिनकी खोजबीन जारी है।
- घायल श्रमिक: 10 घायलों का इलाज जारी है, जबकि 1 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
- परियोजना की जानकारी: 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का लगभग 70% कार्य पूरा हो चुका है।
- दुर्घटना स्थल: 3.5 किमी लंबी सुरंग में प्रवेश द्वार से 1.8 किमी भीतर यह हादसा हुआ।
Challenges Faced During Rescue Effort in the Chamoli Tunnel Accident
इस आपदा के दौरान बचाव दल को कई तरह की गंभीर परिस्थितियों से निपटना पड़ रहा है:
- गले तक पानी और दलदल: सुरंग के अंदर भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और पानी मिक्स होकर दलदल बन चुका है, जिससे मलबे को हटाना बेहद मुश्किल हो रहा है।
- ऑक्सीजन की कमी: टनल के 1.8 किलोमीटर भीतर हवा का संचार रुक जाने के कारण बचाव कर्मियों को भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
- दोबारा भूस्खलन का खतरा: सुरंग की छत कमजोर होने के कारण बार-बार छोटे-छोटे पत्थर गिरने की संभावना बनी हुई है।
Government and Official Response to the Chamoli Tunnel Accident
उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की है और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार जिला मजिस्ट्रेट और एनडीआरएफ अधिकारियों से संपर्क में है। घायलों के त्वरित और निशुल्क इलाज के निर्देश अस्पताल प्रशासन को दिए गए हैं।
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। इस हादसे के बाद परियोजना निर्माण की सुरक्षा समीक्षा और तकनीकी खामियों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
Way Forward for Workers Safety After the Chamoli Tunnel Accident
हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान इस तरह की भूगर्भीय आपदाएं बार-बार गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंगों के अंदर रियल-टाइम चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) और आपातकालीन निकास मार्गों (Escape Tunnels) का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।
बचाव दल लगातार मलबे को हटाने और लापता 6 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। पूरे देश की निगाहें इस समय चमोली में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं।





