Uttarkashi Mountaineer Rescue अभियान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण अलग-अलग उच्च हिमालयी ट्रैकिंग रूटों पर फंसे 136 पर्वतारोहियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और राहत टीमों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। रविवार और सोमवार को चले इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक 29 पर्वतारोहियों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर हर्षिल हेलीपैड पहुंचा दिया गया है।
मौसम के मिजाज में थोड़ा सुधार होते ही वायुसेना और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने सुबह छह बजे से ही उड़ानें शुरू कर दीं। जिला प्रशासन के अनुसार, सभी फंसे हुए पर्वतारोही सुरक्षित हैं और सैटेलाइट फोन के जरिए उनसे लगातार संपर्क बनाया जा रहा है।
Uttarkashi Mountaineer Rescue: सुबह 6 बजे से शुरू हुआ हवाई अभियान
हिमालय की कठिन चोटियों पर फंसे ट्रैकर्स को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे Uttarkashi Mountaineer Rescue अभियान में सोमवार सुबह से तेजी देखी गई। सुबह छह बजे जैसे ही आसमान साफ हुआ, रेस्क्यू टीमों ने हेलीकॉप्टर के जरिए बेस कैंपों और उच्च ऊंचाई वाले इलाकों से लोगों को एयरलिफ्ट करना शुरू कर दिया।
एसडीएम शालिनी नेगी ने जानकारी दी कि अब तक 29 पर्वतारोहियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर हर्षिल हेलीपैड लाया जा चुका है। प्राथमिक जांच के बाद उन्हें आवश्यक डॉक्टरी सहायता दी जा रही है। जिला प्रशासन ने बताया कि मौसम की अनुकूलता को देखते हुए बाकी बचे 107 पर्वतारोहियों को भी जल्द से जल्द नीचे लाने की तैयारी है।
डीएम प्रशांत आर्य ने हर्षिल पहुंचकर लिया जायजा
रेस्क्यू ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए हर्षिल पहुंचे। उन्होंने हेलीपैड और राहत शिविरों का निरीक्षण किया तथा राहत कार्य में लगी टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि Uttarkashi Mountaineer Rescue के तहत फंसे हुए सभी दलों से सैटेलाइट फोन के माध्यम से लगातार बातचीत हो रही है। सभी पर्वतारोही सुरक्षित स्थानों और कैंपों में बने हुए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
मुख्य सचिव ने की समीक्षा बैठक: युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश
देर शाम राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहुंचकर इस बड़े रेस्क्यू अभियान की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फंसे हुए सभी पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी के लिए युद्धस्तर पर काम किया जाए।
बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि उत्तरकाशी जिले के 10 अलग-अलग ट्रैकिंग दलों में कुल 136 पर्वतारोही शामिल हैं। ये सभी दल सितंबर महीने में विभिन्न चोटियों के आरोहण के लिए रवाना हुए थे, लेकिन अचानक मौसम बिगड़ने के कारण उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में फंस गए।
इन प्रमुख चोटियों और पास पर फंसे हैं ट्रैकिंग दल
उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं के अनुसार, पर्वतारोही जिन प्रमुख स्थानों और मार्गों पर फंसे हुए हैं, उनमें शामिल हैं:
- कालिंदी पास और उड़न कॉल पास
- माउंट सुदर्शन और भागीरथी-2
- जोगिन-1, शिवलिंग-1 और शिवलिंग-2
- सतोपंथ एवं श्रीकंठ चोटियां
ये सभी दल अनुभवी ट्रैकर्स और पोर्टर्स के साथ सितंबर के दूसरे और तीसरे हफ्ते में निकले थे। अचानक बर्फबारी और तापमान में गिरावट के कारण उनका आगे बढ़ना या वापस लौटना मुश्किल हो गया था।
Uttarkashi Mountaineer Rescue: मेडिकल अलर्ट पर एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर अस्पताल
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए हैं कि रेस्क्यू किए जा रहे प्रत्येक पर्वतारोही की तुरंत मेडिकल स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाए। अत्यधिक ऊंचाई पर रहने के कारण हाई-ऑल्टीट्यूड सिकनेस या फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याओं की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट रखा गया है।
सरकार ने एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को इमरजेंसी मोड पर रखा है, ताकि यदि किसी पर्वतारोही की तबीयत गंभीर होती है, तो उसे बिना किसी देरी के एयर एम्बुलेंस से उच्च चिकित्सा केंद्र भेजा जा सके।
परिजनों को दी जा रही है पल-पल की जानकारी
प्रशासन ने फंसे हुए सभी पर्वतारोहियों के परिजनों को आश्वस्त किया है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय गाइडों की संयुक्त टीमें लगी हुई हैं। जैसे-जैसे Uttarkashi Mountaineer Rescue के जरिए लोगों को हर्षिल लाया जा रहा है, उनके परिजनों को तुरंत सूचना दी जा रही है।
प्रशासन को उम्मीद है कि यदि मौसम ने साथ दिया, तो आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया जाएगा।
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