उत्तरकाशी कालिंदी खाल रेस्क्यू अभियान के तहत मंगलवार सुबह उच्च हिमालयी क्षेत्र में बड़ा राहत कार्य शुरू किया गया। शनिवार को अचानक हुए भारी हिमपात के कारण गंगोत्री ग्लेशियर, कालिंदी पास और ओडन कॉल जैसे दुर्गम ट्रेकिंग मार्गों पर 136 पर्वतारोही व ट्रेकर्स फंस गए थे। आपदा प्रबंधन, भारतीय सेना, आईटीबीपी (ITBP) और एसडीआरएफ (SDRF) की संयुक्त टीमों ने पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार को कालिंदी पास क्षेत्र से चार और लोगों को सुरक्षित निकालकर हर्षिल हेलीपैड पर पहुंचाया गया, जिसके बाद इस खास इलाके से सुरक्षित निकाले गए लोगों की संख्या 15 हो गई है।
उत्तरकाशी कालिंदी खाल रेस्क्यू का नया अपडेट और योजना
सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी के सीधे दिशा-निर्देशन में रेस्क्यू टीमें दिन-रात राहत कार्य में जुटी हुई हैं। मंगलवार सुबह जैसे ही दृश्यता में सुधार हुआ, चार हेलिकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई। हर्षिल हेलीपैड पर अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र की उपस्थिति में सेना के पायलटों और जमीनी टीमों ने पूरे क्षेत्र का हवाई जायजा लिया और एक चरणबद्ध योजना तैयार की।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
गंगोत्री नेशनल पार्क और आसपास की ऊंची चोटियों पर फंसे यात्रियों तक भोजन, दवाएं और इमरजेंसी किट पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। जमीनी स्थिति का सटीक आंकलन करने के लिए एसडीआरएफ के दो जवानों को माउंट जॉगिंग क्षेत्र की ओर रवाना किया गया है। यह दो सदस्यीय टीम दुर्गम बर्फीले रास्तों की वर्तमान स्थिति का मुआयना कर रही है ताकि पैदल रास्तों से भी फंसे हुए ट्रेकर्स को सुरक्षित नीचे लाया जा सके।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
ओडन कॉल और कालिंदी पास से 40 पर्वतारोही सुरक्षित निकले
इससे पहले सोमवार को चलाए गए बड़े हवाई बचाव अभियान के दौरान ओडन कॉल पास और कालिंदी खाल पास से कुल 40 पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली थी। सोमवार सुबह मौसम साफ होते ही आईटीबीपी, नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM), एसडीआरएफ और वन विभाग की संयुक्त टुकड़ियों ने तालमेल बिठाकर काम किया।
- ओडन कॉल पास: दोपहर तक आईटीबीपी और वन विभाग की टीम ने 29 पर्वतारोहियों को सकुशल एयरलिफ्ट किया।
- कालिंदी पास क्षेत्र: एसडीआरएफ और एनआईएम की टीमों ने 11 ट्रेकर्स को निकालकर हर्षिल पहुंचाया।
- सोमवार शाम की स्थिति: शाम ढलते ही पहाड़ों पर घना कोहरा और तापमान अचानक गिरने के कारण उड़ानों को रोकना पड़ा, जिससे 97 पर्वतारोही ऊंचाई पर ही रुकने को मजबूर हुए।
खराब मौसम बना बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम पल-पल बदल रहा है। तेज ठंडी हवाएं, बर्फबारी और घने बादलों के कारण हेलिकॉप्टर ऑपरेशन्स में काफी जोखिम बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कालिंदी खाल पास पर दो एसडीआरएफ जवान पहले से ही फंसे हुए ट्रेकर्स के साथ मौजूद हैं, जो उन्हें मानसिक ढांढस बंधाने के साथ-साथ बुनियादी सहायता दे रहे हैं।
माउंट सुदर्शन, माउंट भागीरथी-2, माउंट जॉगिंग, माउंट शिवलिंग और श्रीकंठ चोटी की ओर गए अन्य अभियानों के सदस्यों से भी सैटेलाइट व रेडियो संपर्क स्थापित कर लिया गया है। प्रशासन का दावा है कि सभी दल सुरक्षित स्थान पर कैंप लगाकर ठहरे हुए हैं और राशन सामग्री की कोई तात्कालिक कमी नहीं है।
विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों का संयुक्त प्रयास
इस जटिल भौगोलिक क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाना और लोगों को निकालना आसान काम नहीं है। उत्तरकाशी कालिंदी खाल रेस्क्यू में केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख एजेंसियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं:
- एसडीआरएफ (SDRF): हाई-अल्टीट्यूड सर्च एंड रेस्क्यू में विशेषज्ञ जवानों को अग्रिम स्थानों पर तैनात किया गया है।
- आईटीबीपी और सेना: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान जमीनी स्तर पर पैदल ट्रेकर्स को एस्कॉर्ट कर रहे हैं।
- नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM): एनआईएम के गाइड बर्फीली दरारों (crevasses) को पार करने में तकनीकी मदद दे रहे हैं।
- जिला प्रशासन व वायुसेना: हर्षिल बेस कैंप से राहत सामग्री के वितरण और हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन देख रहे हैं।
सुरक्षित निकाले गए ट्रेकर्स की स्थिति और आगे की रणनीति
हर्षिल हेलीपैड पर पहुंचाए गए सभी ट्रेकर्स का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण सेना के मेडिकल कैंप में किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक ठंड के कारण कुछ लोगों में माइल्ड हाइपोथर्मिया के लक्षण देखे गए हैं, लेकिन किसी की भी हालत गंभीर नहीं है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जैसे-जैसे मौसम साथ देगा, बिना समय गंवाए शेष फंसे हुए सभी 90 से अधिक ट्रेकर्स को बेस कैंप तक लाया जाए। स्थानीय मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में आंशिक बादल छाए रहने का अनुमान जताया है, जिससे रेस्क्यू दल मुस्तैदी से अपनी कार्ययोजना को अंतिम रूप दे रहे हैं।
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