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कैंपस या कुरुक्षेत्र? JNU में खूनी संघर्ष, ABVP छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, प्रशासन मौन।

On: February 23, 2026 7:29 AM
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नई दिल्ली |
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस उठा है। सोमवार की आधी रात को शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। आरोप है कि वामपंथी झुकाव वाले छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हिंसा इतनी भयावह थी कि अपनी जान बचाने के लिए छात्रों को कैंपस की झाड़ियों और घने जंगलों में शरण लेनी पड़ी।
डेढ़ घंटे तक चला ‘खूनी खेल’
घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार रात करीब 1:30 बजे हुई, जो सुबह 3 बजे तक जारी रहा। बताया जा रहा है कि कैंपस में चल रहे एक प्रदर्शन के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद गाली-गलौज से बढ़कर हिंसक झड़प में बदल गया। ABVP से जुड़े छात्रों का आरोप है कि वामपंथी छात्रों ने उन्हें घेरकर लात-घूंसों, बेल्टों और ईंट-पत्थरों से हमला किया। हमले से बचने के लिए छात्र इधर-उधर भागने लगे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
दहशत का मंजर: जंगल में छिपने को मजबूर हुए छात्र
कैंपस से आ रही खबरें रूह कंपा देने वाली हैं। घायल छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि हमलावर धारदार हथियारों और रॉड से लैस थे। खुद को बचाने के लिए कई छात्र कैंपस के घने जंगली इलाकों और झाड़ियों में जाकर छिप गए। रात के अंधेरे में घंटों तक वे छात्र वहां दुबके रहे, ताकि हमलावरों की नजरों से बच सकें। कुछ छात्रों ने हॉस्टल के कमरों में खुद को बंद कर लिया, लेकिन वहां भी तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने JNU प्रशासन और सुरक्षा घेरे की पोल खोल दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने नजर आ रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि जब हिंसा चरम पर थी, तब सुरक्षा गार्डों ने बीच-बचाव करने या हमलावरों को रोकने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ घंटे तक तांडव चलता रहा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई।
असुरक्षा के साये में ‘अकादमिक भविष्य’
JNU अपनी उत्कृष्ट पढ़ाई के लिए जाना जाता है, लेकिन बार-बार होने वाली इन हिंसक घटनाओं ने आम और गैर-राजनीतिक छात्रों के मन में डर पैदा कर दिया है। लाइब्रेरी से लौट रहे या हॉस्टल में शांति से रह रहे छात्रों का कहना है कि अब उन्हें कैंपस में घूमते हुए भी डर लगता है। धरना-प्रदर्शन और आए दिन होने वाले टकरावों के कारण शोध (Research) और नियमित कक्षाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
क्या है वर्तमान स्थिति?
फिलहाल कैंपस में भारी तनाव का माहौल है। मारपीट में गंभीर रूप से घायल कई छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। छात्र संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, दिल्ली पुलिस भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सक्रिय हो गई है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी और छात्रों का रोष
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी JNU प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासन की इस चुप्पी ने छात्रों के गुस्से को और भड़का दिया है। छात्रों का सवाल है कि आखिर कब तक देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान को राजनीति और हिंसा की भेंट चढ़ाया जाता रहेगा? क्या कैंपस में छात्र पढ़ने आएंगे या अपनी जान बचाने के लिए जंगलों में छिपेंगे?
निष्कर्ष: JNU की यह घटना केवल दो छात्र गुटों की भिड़ंत नहीं है, बल्कि यह उस असुरक्षित माहौल का प्रमाण है जो धीरे-धीरे शिक्षा के मंदिरों में घर कर रहा है। अब गेंद प्रशासन और पुलिस के पाले में है कि वे कितनी जल्दी न्याय सुनिश्चित करते हैं।

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