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BLA ने पाकिस्तानी सेना पर किया बड़ा हमला , जिसमें 14 सैनिकों के मारे जाने की मिली सूचना

On: May 8, 2025 4:25 AM
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से लगी गहरी चोट को अभी पाकिस्तान सहला ही रहा था कि बलूचिस्तान में उसकी सेना को एक और तगड़ा झटका लगा है। बलूचिस्तान की आजादी की मांग कर रहे उग्रवादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सेना पर दो अलग-अलग हमलों को अंजाम दिया, जिनमें कुल 14 सैनिक मारे गए हैं। ये हमले पाक सेना की ताकत और प्रभाव पर सवाल खड़े करते हैं, साथ ही बलूच विद्रोहियों के बढ़ते मनोबल को भी दर्शाते हैं।

पहला हमला बलूच लिबरेशन आर्मी की स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड (STOS) द्वारा माच, बोलान जिले के शोरकंद इलाके में किया गया। यहां पाकिस्तानी सेना के एक काफिले की गाड़ी को रिमोट कंट्रोल आईईडी के जरिए उड़ा दिया गया। इस हमले में कथित तौर पर स्पेशल ऑपरेशंस कमांडर तारिक इमरान और सूबेदार उमर फारूक सहित 12 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई। धमाका इतना भीषण था कि सैन्य वाहन के परखच्चे उड़ गए।

दूसरा हमला केच जिले के कुलाग तिगरान क्षेत्र में हुआ, जहां एक बम निरोधक दस्ते को निशाना बनाया गया। यह यूनिट एक क्लियरेंस मिशन पर तैनात थी और दोपहर करीब 2:40 बजे रिमोट कंट्रोल IED के जरिए विस्फोट किया गया। इस हमले में भी दो जवानों की मौत हो गई।

BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए पाकिस्तानी सेना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बलूच लिबरेशन आर्मी को विदेशी एजेंट कहने वाले यह समझ लें कि पाकिस्तान की सेना खुद एक भाड़े की मिलिशिया बन चुकी है, जो विदेशी हितों के लिए काम करती है। ये सैनिक बंदरगाहों और कॉरिडोर की रक्षा कर रहे हैं, जो विदेशी कर्ज देने वालों की संतुष्टि के लिए बनाए गए हैं। यह सेना अब राष्ट्रीय नहीं रही, बल्कि एक वाणिज्यिक सेना बन गई है, जो अपने स्वामी बदलने में माहिर है।”

बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववाद की आग सुलग रही है। अलगाववादी संगठन राज्य द्वारा शोषण, राजनीतिक उपेक्षा और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाते हुए स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि बलूचिस्तान की खनिज संपदा का लाभ केवल केंद्र सरकार और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि स्थानीय जनता गरीबी और पिछड़ेपन में जी रही है।

पाकिस्तानी सेना की भारी मौजूदगी और सैन्य अभियानों को स्थानीय लोग बलपूर्वक कब्जा मानते हैं, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है। हालिया हमले इसी बढ़ते विद्रोह और बलूच राष्ट्रवादियों की आक्रोशित प्रतिक्रिया का संकेत हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बलूचिस्तान की अशांति और भी उग्र रूप ले सकती है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।

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