Badrinath Donation Theft Case में उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई तेज कर दी है। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी और अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार करने के बाद अब उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कथित हेराफेरी केवल एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। धार्मिक आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले को देखते हुए सरकार ने जांच को प्राथमिकता दी है और SIT को सभी पहलुओं की गहन जांच के निर्देश दिए हैं।
Badrinath Donation Theft Case में कैसे हुई गिरफ्तारी?
Badrinath Donation Theft Case में प्रारंभिक विभागीय जांच के बाद प्रमोद नौटियाल पर कार्रवाई शुरू हुई। बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, जैसे ही चढ़ावे की गिनती में कथित गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, सबसे पहले आंतरिक जांच कराई गई।
जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद बद्रीनाथ थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और मामला पुलिस जांच के दायरे में पहुंच गया। बाद में SIT ने उन्हें देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।
18 पन्नों की रिपोर्ट में दर्ज हुए कई अहम तथ्य
Badrinath Donation Theft Case की जांच के दौरान बदरी-केदार मंदिर समिति की चार सदस्यीय विभागीय समिति ने 11 जुलाई को अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य कार्याधिकारी (CEO) को सौंपी। 18 पन्नों की इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2 जुलाई को आरोपी कर्मचारी को एक से अधिक बार चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी करते हुए देखा गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 29 जून की सीसीटीवी फुटेज में भी प्रमोद नौटियाल पैसों जैसी वस्तु अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिए। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और बाद में मामला पुलिस जांच तक पहुंचा।
SIT की जांच का सबसे बड़ा सवाल—क्या अकेला था आरोपी?
फिलहाल Badrinath Donation Theft Case में SIT का पूरा फोकस इस बात पर है कि क्या कथित चोरी में केवल प्रमोद नौटियाल की भूमिका थी या फिर अन्य कर्मचारी अथवा बाहरी लोग भी इसमें शामिल थे। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी मंदिर में चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया, ड्यूटी चार्ट, वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
पीए होने के बावजूद मिली थी संवेदनशील जिम्मेदारी
जांच में सामने आया कि Badrinath Donation Theft Case के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल मूल रूप से बदरी-केदार मंदिर समिति में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर नियुक्त हुए थे।जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में उन्हें स्थायी नियुक्ति मिली थी। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें पदोन्नत कर समिति अध्यक्ष का निजी सहायक (PA) बनाया गया। बाद में उन्हें बद्रीनाथ मंदिर में प्रोटोकॉल और थाली भेंट (चढ़ावे) की गणना जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि उन्हें इतनी संवेदनशील जिम्मेदारियां किस आधार पर दी गई थीं।
मंदिर समिति ने कहा—व्यवस्था होगी और अधिक पारदर्शी
Badrinath Donation Theft Case को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा। आधुनिक निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियागत सुधारों पर भी काम किया जा रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए तेज
Badrinath Donation Theft Case के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व समिति अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि प्रमोद नौटियाल को इंटरनेट ऑपरेटर से पीए के पद पर पदोन्नत किए जाने का निर्णय भी पूर्व कार्यकाल में लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को वर्तमान सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल के दौरान हुई व्यवस्थाओं पर भी जवाब देना चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।
श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
बद्रीनाथ धाम देश के सबसे प्रतिष्ठित चार धामों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में Badrinath Donation Theft Case ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। इसी कारण इस मामले की निष्पक्ष जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है।










