Nepal Bhote Koshi Flood Disaster ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रासुवागढ़ी में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से अब तक 270 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और मृतकों की शिनाख्त की कोशिशें की जा रही हैं।
इस भीषण आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लगभग 1,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सेना और राहत एजेंसियां हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और खाद्य सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं।
नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही: जानिए Nepal Bhote Koshi Flood Disaster का पूरा विवरण
यह तबाही तिब्बत के ल्हासा को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ने वाले दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर हुई है, जहाँ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री मौजूद थे।
Nepal Bhote Koshi Flood Disaster की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस के प्रवक्ता एबी नारायण काफ्ले ने बताया कि तलाशी अभियान जारी रहने के कारण मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।
- नेपाल में लापता लोग: नेपाल में करीब 826 लोग लापता हैं, जिनमें लगभग 600 विदेशी नागरिक हैं।
- भारतीयों की स्थिति: विभिन्न देशों के लापता पर्यटकों में सबसे अधिक संख्या भारत के लोगों की है, जहां से लगभग 300 नागरिक लापता हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के पर्यटक भी शामिल हैं।
- तिब्बत में नुकसान: तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में करीब 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी शामिल हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां की तबाही: कैसे बह गए घर और जिंदगियां
बाढ़ का भयानक रूप देखकर बचे हुए लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पर पानी और कीचड़ के प्रचंड बहाव ने दर्जनों लोगों, घरों और सड़कों को पल भर में तिनके की तरह बहा दिया।
अस्पताल में भर्ती 68 वर्षीय केशव प्रसाद बराल ने दर्दनाक आपबीती साझा करते हुए बताया कि कीचड़ का ऊंचा बहाव सीधे उनके घर की तरफ आ रहा था। अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर छत की ओर भागते समय उनकी पत्नी कीचड़ के तेज बहाव में बह गईं। करीब चार घंटे बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से निकाला गया, लेकिन उनकी पत्नी मलबे में समा चुकी थीं। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने आम का पेड़ पकड़कर अपनी जान बचाई, जबकि उसकी आंखों के सामने ही पूरा मकान गायब हो गया।
ग्लेशियर ढहने से आई बाढ़: समझें Nepal Bhote Koshi Flood Disaster की वैज्ञानिक वजह
नेपाली अधिकारियों और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की शुरुआती जांच के मुताबिक:
- भूकंपीय ऊर्जा नहीं, ग्लेशियर ढहना: शुरुआत में महसूस की गई 4.4 तीव्रता का झटका असल में कोई पारंपरिक भूकंप नहीं था। यह ग्लेशियर की विशाल चट्टान और बर्फ ढहने से पैदा हुई सिस्मिक एनर्जी (भूकंपीय ऊर्जा) थी।
- मलबे का तेज बहाव: बर्फ और मलबे के भारी मात्रा में ढहने के कारण भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बेकाबू हो गया और बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया।
- झील का खतरा: चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर (CCTV) के अनुसार, ग्यिरोंग क्षेत्र में एक ऊपरी झील से खतरे की पहचान की गई है, जिससे पहाड़ी इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है।
जारी है राहत और बचाव कार्य
नेपाल और चीनी सेनाएं संयुक्त रूप से सीमावर्ती इलाकों में राहत कार्य संचालित कर रही हैं। हालांकि, लगातार खराब हो रहे मौसम और मलबे के कारण बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है। भारत सरकार भी अपने नागरिकों की तलाश के लिए नेपाली अधिकारियों के लगातार संपर्क में बनी हुई है।









