CM Dhami Student Controversy उत्तराखंड की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने एक छात्रा ने हाल ही में अपनी परेशानी बताते हुए कहा था कि नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसका इंटरनेशनल इवेंट के लिए चयन हुआ, लेकिन प्रतियोगिता में जाने के लिए उससे करीब डेढ़ लाख रुपये मांगे गए। पैसे की व्यवस्था नहीं होने के कारण वह इंटरनेशनल इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकी।
छात्रा की यह बात मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम के दौरान सामने आई थी। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और कांग्रेस ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए। हालांकि, कुछ समय बाद छात्रा ने एक दूसरा वीडियो जारी कर अपनी पूरी बात बताई। इसके बाद इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सवाल दोनों बढ़ गए।
मुख्यमंत्री के सामने छात्रा ने बताई थी पूरी परेशानी
दरअसल, 10 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवा सदन में मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें उत्तराखंड के अलग-अलग स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कई विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े थे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी छात्रों से संवाद कर रहे थे। इसी दौरान एक छात्रा ने अपनी बात मुख्यमंत्री के सामने रखी। छात्रा ने बताया कि वह जम्मू में ताइक्वांडो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गई थी और वहां उसने गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उसका चयन इंटरनेशनल इवेंट के लिए हुआ, लेकिन वहां जाने के लिए उससे करीब डेढ़ लाख रुपये मांगे गए। आर्थिक समस्या के कारण वह प्रतियोगिता में नहीं जा सकी।
छात्रा की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने उसे बैठने को कहा और अधिकारियों को उसका नाम नोट करने तथा मामले को देखने के निर्देश दिए। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा शुरू हो गई।
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दूसरे वीडियो में छात्रा ने बताई अलग स्थिति
मामला बढ़ने के बाद छात्रा ने एक और वीडियो जारी किया। इसमें उसने कहा कि मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में वह अपनी पूरी बात नहीं रख पाई थी और इसी वजह से अब वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही है।
छात्रा के अनुसार, जम्मू में नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसका इंटरनेशनल इवेंट के लिए चयन हुआ था। उसने बताया कि संबंधित फेडरेशन की ओर से उसे करीब 1.70 लाख रुपये दिए जा रहे थे, जबकि बाकी खर्च उसे खुद उठाना था। छात्रा ने कहा कि वह इस आर्थिक स्थिति की जानकारी किसी को नहीं दे पाई और इसी कारण इंटरनेशनल इवेंट में शामिल नहीं हो सकी।
यही दूसरा बयान अब पूरे मामले में सबसे अहम चर्चा का हिस्सा बन गया है। पहले वीडियो में छात्रा की ओर से पैसे मांगे जाने की बात कही गई थी, जबकि दूसरे वीडियो में उसने आर्थिक सहयोग की स्थिति और अपनी ओर से जानकारी साझा नहीं करने की बात कही।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने छात्रा की समस्या आने के बाद तत्काल अधिकारियों को बुलाकर मामले की जांच कराई जानी चाहिए थी।
कांग्रेस ने छात्रा के दूसरे वीडियो पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसके चेहरे और बयान में दबाव दिखाई दे रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि वीडियो सामने आने के बाद छात्रा और उसके परिवार पर दबाव बनाया गया होगा।
हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं और छात्रा की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है जिसमें उसने कहा हो कि दूसरा वीडियो दबाव में बनाया गया था। इसलिए इस पहलू की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
BJP ने कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीति
वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने छात्रा की बात गंभीरता से सुनी और उसका नाम नोट कराकर मामले को देखने की बात कही थी।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस बिना तथ्यों की पूरी जानकारी लिए मामले को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। पार्टी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने छात्रा की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि अधिकारियों को इसकी जानकारी लेकर समाधान की दिशा में काम करने के निर्देश दिए।
इस तरह CM Dhami Student Controversy अब सिर्फ एक छात्रा की खेल संबंधी समस्या तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बन गई है।
जांच के बाद स्कूल और निजी एसोसिएशन की भूमिका सामने आई
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने संबंधित स्कूल प्रशासन से मामले की जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि छात्रा ने इस प्रतियोगिता में स्कूल की ओर से प्रतिभाग नहीं किया था। वह एक निजी एसोसिएशन के माध्यम से प्रतियोगिता में शामिल हुई थी।
यानी प्रतियोगिता में भाग लेने की प्रक्रिया और उससे जुड़े खर्च का मामला सीधे स्कूल स्तर से जुड़ा हुआ नहीं था। इसके बावजूद छात्रा की प्रतिभा को देखते हुए स्कूल स्तर से उसे हर संभव सहयोग देने की बात कही गई है।
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता और सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी राज्य से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी के सामने आर्थिक समस्या आने पर समय रहते मदद की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह सवाल महत्वपूर्ण है।
एक प्रतिभाशाली छात्रा का नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना और फिर आर्थिक कारणों से इंटरनेशनल प्रतियोगिता से बाहर रह जाना खेल व्यवस्था के लिए चिंता का विषय जरूर है। साथ ही, इस मामले में सामने आए दोनों बयानों के कारण तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट करना भी जरूरी हो गया है।
फिलहाल, CM Dhami Student Controversy में सरकार की ओर से मामले को देखने की बात कही गई है और स्कूल स्तर पर छात्रा की मदद का आश्वासन भी सामने आया है। वहीं, कांग्रेस ने इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का मुद्दा बनाया है। अब आगे यह देखना अहम होगा कि संबंधित विभाग की जांच में प्रतियोगिता, खर्च और आर्थिक सहायता को लेकर क्या पूरी जानकारी सामने आती है।









