नई दिल्ली: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र रहे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब वही कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है, जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हासिल है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही यह विधेयक अब देश भर में कानून के रूप में लागू हो गया है।
इस नए कानून के अस्तित्व में आने के बाद अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को जानबूझकर गाने से रोकना, इसके गायन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना या इसका अपमान करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
संसद के दोनों सदनों से हुआ था पारित
इस ऐतिहासिक कानून को संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। राज्यसभा ने 29 जुलाई को इस विधेयक पर अपनी मुहर लगाई थी, जिसके बाद 30 जुलाई को लोकसभा में भी इसे सर्वसम्मति और भारी समर्थन के साथ पारित कर दिया गया। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जहां से मंजूरी मिलते ही यह अधिनियम का रूप ले चुका है।
पुराने कानून में संशोधन और कड़े दंड का प्रावधान
अब तक देश में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ के तहत केवल राष्ट्रगान (जन गण मन) और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर ही कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान था। पुराने कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालता था, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती थी। साथ ही, दोबारा अपराध दोहराने पर कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल का नियम था।
हालांकि, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर इस प्रकार की स्पष्ट कानूनी सुरक्षा का अभाव था।
“संसद में बिल पेश करते समय सरकार ने स्पष्ट किया था कि यद्यपि ‘वंदे मातरम्’ को देश में सर्वोच्च राष्ट्रीय गीत का दर्जा और सम्मान प्राप्त है, लेकिन इसके अपमान को रोकने के लिए कोई विशेष कानूनी ढांचा उपलब्ध नहीं था। नए संशोधन के माध्यम से मूल अधिनियम की धारा 3 में बदलाव कर अब ‘वंदे मातरम्’ को भी इसके दायरे में लाया गया है।”
15 अगस्त को लाल किले पर रचेगा इतिहास
इस नए कानून के लागू होने के साथ ही देश इस बार एक नया इतिहास रचने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आने वाले 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से पहली बार आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय पर्वों पर इस गीत के महत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
गृह मंत्रालय ने तय किए गायन के नए नियम और प्रोटोकॉल
इस वर्ष की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ के आधिकारिक गायन को लेकर दिशानिर्देश और सख्त प्रोटोकॉल जारी किए थे। आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
• समय सीमा और पद: राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के संबोधन जैसे आधिकारिक और भव्य कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह पदों (Stanzas) का गायन किया जाएगा। इसके गायन की निर्धारित अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
• राष्ट्रगान से पहले गायन: आदेश में साफ कहा गया है कि यदि किसी सरकारी या आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए या गाए जा रहे हैं, तो सबसे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा।
• सावधान की मुद्रा: जिस भी सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत का गायन होगा, वहां उपस्थित सभी नागरिकों को ‘अटेंशन’ (सावधान) की मुद्रा में सम्मानपूर्वक खड़े रहना अनिवार्य होगा।
• स्कूलों में अनिवार्य सामूहिक गायन: देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों और स्कूलों में दैनिक प्रार्थना के समय दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से करने के निर्देश दिए गए हैं।
76 साल पुराना वादा हुआ पूरा
इस कानून के माध्यम से संविधान सभा के उस संकल्प को कानूनी रूप दिया गया है जो 1950 में लिया गया था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित गीत ‘वंदे मातरम्’ — जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा और दिशा दी — को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर ही पूर्ण सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब 76 साल पुराने इस संकल्प को संवैधानिक और कानूनी तौर पर पूरी तरह से लागू कर दिया गया है।









