Harela Festival Uttarakhand के अवसर पर पूरे उत्तराखंड में गुरुवार को प्रकृति, पर्यावरण और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। राज्यभर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेला पर्व मनाया गया, जबकि पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूत करने के लिए 10 लाख पौधे लगाने का विशेष अभियान भी शुरू किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और जल, जंगल तथा जमीन की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
हरेला उत्तराखंड का सबसे महत्वपूर्ण लोकपर्व माना जाता है, जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि प्रकृति संरक्षण, हरित भविष्य और कृषि समृद्धि का संदेश भी देता है। इस वर्ष राज्य सरकार ने हरेला पर्व को जनभागीदारी के साथ पर्यावरण संरक्षण के बड़े अभियान के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
Harela Festival Uttarakhand: प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम
Harela Festival Uttarakhand हर साल आषाढ़ माह के अंत और सावन के आगमन से पहले मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। पर्व से नौ दिन पहले घरों में छोटी टोकरियों में सात प्रकार के अनाज बोए जाते हैं। हरे अंकुर निकलने के बाद शुभ मुहूर्त में उन्हें काटकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर रखा जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। ग्रामीण इलाकों में लोग पारंपरिक गीत गाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और नई फसल की अच्छी पैदावार की कामना करते हैं।
CM Pushkar Singh Dhami ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Harela Festival Uttarakhand के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों, नदियों, गाड़-गदेरों और जंगलों का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण देने के लिए आज से बेहतर अवसर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील भी की।
10 लाख पौधारोपण अभियान बना आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष Harela Festival Uttarakhand का सबसे बड़ा आकर्षण राज्यव्यापी पौधारोपण अभियान है। वन विभाग, उद्यान विभाग, स्थानीय निकायों, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी से पूरे राज्य में लगभग 10 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं।
देहरादून नगर निगम ने भी मिशन पोषण संकल्प के तहत 5 लाख सब्जियों के पौधों का वितरण शुरू किया है। इसके अलावा स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर सहजन, फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में करीब 70 हजार फलदार और चारा प्रजाति के पौधे भी लोगों को वितरित किए जा रहे हैं।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिला नया बल
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने पूरे देश में वृक्षारोपण को जनआंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी इसी भावना के साथ हरेला पर्व को पर्यावरण संरक्षण के बड़े अभियान में बदल रही है।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व बन चुका है। यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
लोकपर्व के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश
Harela Festival Uttarakhand का सबसे बड़ा उद्देश्य प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण के दौर में ऐसे पारंपरिक पर्व समाज को प्रकृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
हरेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पर्यावरण शिक्षा का भी संदेश देता है। इस दिन लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया जाता है ताकि आने वाले वर्षों में उनका लाभ समाज को मिल सके।
प्रदेशभर में दिखा उत्साह और जनभागीदारी
राजधानी देहरादून से लेकर नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और ऊधम सिंह नगर सहित लगभग सभी जिलों में हरेला पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। सरकारी विभागों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों ने पौधारोपण कार्यक्रमों में भाग लिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हरेला मनाया गया, जबकि शहरी इलाकों में पर्यावरण जागरूकता रैलियां, पौधारोपण अभियान और स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हरित भविष्य की ओर मजबूत कदम
Harela Festival Uttarakhand उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण की सोच का जीवंत उदाहरण है। 10 लाख पौधारोपण अभियान, जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण का संदेश इस पर्व को केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि हरित भविष्य के संकल्प का उत्सव बनाता है। यदि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए, तो यह अभियान आने वाले वर्षों में राज्य के पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.










