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उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में फिर हादसा: शॉटक्रीट लाइनिंग गिरने से झारखंड के 21 वर्षीय श्रमिक की दर्दनाक मौत

On: July 16, 2026 5:23 AM
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A dramatic news photograph from inside the under-construction Silkyara Tunnel in Uttarkashi. On the left, a large concrete block from the collapsed shotcrete lining lies on the muddy ground with police tape marked "POLICE LINE DO NOT CROSS" running across the scene. In the center, rescue workers and police officers in uniform are inspecting the site, while a white handwritten signboard in Hindi script reads details about the accident. Heavy construction machinery and a ventilation pipe are visible in the dimly lit background.

विशेष संवाददाता, उत्तरकाशी
16 जुलाई, 2026

न्यूज डेस्क: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है। चारधाम ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही प्रसिद्ध सिलक्यारा टनल में आज गुरुवार तड़के एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया।

टनल के भीतर निर्माण कार्य के दौरान शॉटक्रीट (कंक्रीट) लाइनिंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। इस मलबे की चपेट में आने से वहां काम कर रहे झारखंड के एक 21 वर्षीय युवा श्रमिक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से निर्माण स्थल पर हड़कंप मच गया है और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

​तड़के 2 बजे हुआ हादसा, टनल के भीतर मची अफरा-तफरी

​प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार तड़के करीब दो बजे (2:00 AM) हुआ। उस समय टनल के भीतर बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर नियमित निर्माण और लाइनिंग का कार्य चल रहा था। श्रमिक अपनी ड्यूटी पर तैनात थे कि तभी अचानक टनल की छत से शॉटक्रीट लाइनिंग का एक भारी-भरकम ब्लॉक टूटकर सीधे नीचे आ गिरा।

​ब्लॉक के गिरते ही टनल के भीतर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद अन्य साथी श्रमिकों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत राहत और बचाव का काम शुरू किया। उन्होंने भारी मलबे को हटाकर दबे हुए श्रमिक को बाहर निकालने का भरसक प्रयास किया, लेकिन कंक्रीट का ब्लॉक इतना भारी था और चोट इतनी गंभीर थी कि श्रमिक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।

​बड़कोट पुलिस मुस्तैद, परिजनों को दी गई सूचना

​हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बड़कोट पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए मृतक श्रमिक के शव को अपने कब्जे में ले लिया। शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी मोर्चरी भेज दिया गया है।
बड़कोट कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुभाष चन्द्र ने घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया:

​”हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिक का शव मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। मृतक श्रमिक के कुछ साथी पास के ही नौगांव इलाके में मौजूद हैं, जिनसे संपर्क किया गया है। पुलिस नियमानुसार आगे की पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही झारखंड में रह रहे श्रमिक के परिजनों को भी इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है।”

​NHIDCL ने शुरू की तकनीकी जांच, रिपोर्ट का इंतजार

​इस गंभीर हादसे के बाद टनल निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के उच्च अधिकारी भी तुरंत एक्शन में आ गए। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और टनल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
​विभागीय सूत्रों के अनुसार, NHIDCL ने इस पूरी घटना की एक विस्तृत और उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।

कंक्रीट की लाइनिंग अचानक कैसे टूटी और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी चूक या लापरवाही थी, इन सभी बिंदुओं पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी तकनीकी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हादसे की असली वजह और परिस्थितियों का स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा।

​2023 के उस ऐतिहासिक हादसे की यादें हुईं ताजा

​सिलक्यारा टनल में हुए इस ताजा हादसे ने एक बार फिर देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि यह वही टनल है जो साल 2023 में एक बहुत बड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रेस्क्यू ऑपरेशन का केंद्र बनी थी।
​विदित हो कि:

• ​12 नवंबर 2023 का वो काला दिन: दीवाली के दिन उत्तरकाशी में बन रही इसी सिलक्यारा टनल का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया था, जिससे भारी भूस्खलन हुआ था।
• ​41 जिंदगियां फंसी थीं अंदर: उस टनल हादसे के कारण देश के विभिन्न राज्यों के 41 मजदूर टनल के अंदर ही फंस गए थे।
• ​17 दिनों का ऐतिहासिक रेस्क्यू: भारत सरकार, सेना, विदेशी एक्सपर्ट्स और रैट-माइनर्स की मदद से 17 दिनों तक चले दुनिया के सबसे जटिल और ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

​श्रमिक संगठनों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

​2023 के इतने बड़े हादसे और सबक के बावजूद, दोबारा टनल के भीतर सुरक्षा में इस तरह की चूक होने पर स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि टनल के भीतर काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी को ताक पर रखकर सुरक्षा मानकों में ढिलाई बरती जा रही है।

​स्थानीय लोगों और मजदूर यूनियनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि:

1. ​इस पूरे मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
2. ​कार्यस्थल पर लापरवाही बरतने वाले दोषियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
3. ​टनल के भीतर सुरक्षा ऑडिट किया जाए और सुरक्षा मानकों को बेहद सख्ती से लागू किया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम श्रमिक को अपनी जान न गंवानी पड़े।

​फिलहाल, टनल के भीतर निर्माण कार्य को रोककर सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है और सभी की नजरें अब एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) की आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस दर्दनाक हादसे के वास्तविक कारणों का पर्दाफाश हो सकेगा।

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