बेंगलुरु:
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक नामी ई-कॉमर्स कंपनी ‘फ्लिपकार्ट’ (Flipkart) के डिलीवरी एजेंट पर एक महिला के घर में जबरन घुसने और उसके सामने अश्लील हरकत (Exhibitionism) करने का गंभीर आरोप लगा है।
पीड़ित महिला द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा किए जाने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा है।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि ऑनलाइन डिलीवरी के इस दौर में घरों के भीतर महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना शनिवार की है। पीड़ित महिला अपने फ्लैट में अकेली थी, तभी फ्लिपकार्ट का एक डिलीवरी एजेंट उसका एक पार्सल डिलीवर करने पहुँचा। पार्सल देने के बाद डिलीवरी एजेंट ने महिला से पानी मांगने के बहाने या किसी अन्य वजह से बात बढ़ानी चाही और फिर अचानक घर का वॉशरुम इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी।
मना करने के बावजूद जबरन घर में घुसा आरोपी
महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर इस पूरी भयावह घटना का विवरण दिया है। महिला के अनुसार, “मैंने बहुत ही शालीनता से उसे वॉशरुम का उपयोग करने से मना कर दिया। मैंने उसे साफ तौर पर कहा कि मैं एक अकेली महिला हूँ और अनजान पुरुषों को अपने घर के अंदर आने की अनुमति नहीं दे सकती। यहाँ तक कि मैंने उसे पड़ोस में रहने वाले अन्य पुरुषों से मदद मांगने की सलाह भी दी।”
लेकिन आरोपी के सिर पर कुछ और ही सवार था। महिला के बार-बार मना करने और ‘नो’ (No) कहने के बावजूद वह नहीं माना। उसने जबरन अपनी चप्पलें उतारीं और महिला की मर्जी के खिलाफ धौंस जमाते हुए घर के अंदर दाखिल हो गया।
वॉशरुम से बाहर आकर की घिनौनी हरकत
महिला ने आरोप लगाया कि जबरन वॉशरुम में घुसने के बाद जब वह व्यक्ति बाहर आया, तो उसकी नीयत पूरी तरह बदल चुकी थी। उसने महिला के सामने अपने निजी अंग प्रदर्शित किए और अश्लील हरकतें करने लगा।
इस अचानक हुए हमले और घिनौनी हरकत से महिला गहरे सदमे (Shock) में आ गई। महिला ने वीडियो में अपने गुस्से और दर्द को बयां करते हुए कहा, “एक महिला के ‘ना’ कहने का मतलब सिर्फ ‘ना’ होता है। किसी को भी किसी के घर में इस तरह घुसने और उसकी व्यक्तिगत सीमाओं (Boundaries) को लांघने का कोई हक नहीं है।”
सोशल मीडिया पोस्ट पर पुलिस का त्वरित एक्शन
घटना के बाद सहमी हुई महिला ने जब इस पूरी घटना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया, तो यह तेजी से वायरल हो गया। बेंगलुरु पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया पोस्ट पर तुरंत संज्ञान लिया और पीड़ित महिला से संपर्क साधा।
महिला की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जाल बिछाया और कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान विजय मल्लिकार्जुन कामत के रूप में हुई है। पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है।
फ्लिपकार्ट ने आरोपी को नौकरी से निकाला, दिया बयान
इस संवेदनशील मामले में चौतरफा घिरने के बाद ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट ने भी अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि वे इस मामले से बेहद आहत हैं और पीड़ित ग्राहक को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा:
“हमारे लिए ग्राहकों की सुरक्षा और उनका भरोसा सबसे ऊपर है, इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जैसे ही यह मामला हमारे संज्ञान में आया, हमने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित डिलीवरी पार्टनर को काम से हटा (Terminate) दिया है। हम इस मामले में पुलिस प्रशासन को जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं।”
कंपनी ने आगे सफाई देते हुए कहा कि ऑनबोर्डिंग (काम पर रखने) के समय सभी डिलीवरी पार्टनर्स का कड़ा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (Background Verification) और व्यवहार संबंधी ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि, इस घटना के बाद कंपनी अपने सुरक्षा नियमों और वेंडर नीतियों की नए सिरे से समीक्षा कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
डिलीवरी ऐप्स की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने महानगरीय संस्कृति में जी रहे उन लाखों लोगों को डरा दिया है जो रोजाना ऑनलाइन शॉपिंग और डिलीवरी ऐप्स पर निर्भर हैं।
- सुरक्षा ऑडिट की जरूरत: क्या कंपनियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन सिर्फ कागजी है?
- अकेली महिलाओं की सुरक्षा: ऐसे मामलों में डिलीवरी बॉयज के सीधे घर के दरवाजे तक आने को लेकर नए सुरक्षा प्रोटोकॉल की मांग उठने लगी है।
- जागरूकता: पुलिस ने भी अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को घर में प्रवेश न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत ‘112’ पर कॉल करें।
बेंगलुरु पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सोशल मीडिया पर सराहना हो रही है, लेकिन समाज और कंपनियों के सामने यह सवाल जस का तस खड़ा है कि आखिर महिलाओं के ‘ना’ को कब गंभीरता से लिया जाएगा?









