हल्द्वानी (उत्तराखंड)।
देवभूमि उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ शनिवार देर रात तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर पर एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो और स्कूटी के बीच हुई भीषण भिड़ंत में चार नौजवानों की अकाल मृत्यु हो गई।
हादसा इतना भयानक था कि टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग कांप उठे। इस हादसे ने जहाँ चार हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए, वहीं पूरे इलाके में मातम का माहौल छा गया है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
फ्लाईओवर के मोड़ पर काल बनकर आई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो
मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा शनिवार रात करीब 10:00 बजे नेशनल हाईवे-109 (NH-109) स्थित तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर पर हुआ। बताया जा रहा है कि एक स्कॉर्पियो कार (पंजीकरण संख्या: UK04U-7275) लालकुआं की ओर से बेहद तेज रफ्तार में आ रही थी। जैसे ही कार फ्लाईओवर के खतरनाक घुमाव (मोड़) पर पहुँची, तभी सामने से आ रही एक स्कूटी से उसकी आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई।
चश्मदीदों और पुलिस के मुताबिक, टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए। स्कूटी पर सवार चारों युवक हवा में उछलकर काफी दूर जाकर सड़क पर गिरे। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आने के कारण चारों लहूलुहान होकर अचेत हो गए। दुर्घटना के बाद स्कॉर्पियो चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया।
अस्पताल पहुँचने से पहले ही थम गईं सांसें
हादसे के तुरंत बाद राहगीरों ने इसकी सूचना आपातकालीन सेवा डायल-112 को दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुँची। पुलिस ने आनन-फानन में एंबुलेंस की मदद से सभी चारों घायलों को हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल भिजवाया।
अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद तीन युवकों को मृत घोषित कर दिया। जबकि चौथे युवक की नब्ज चल रही थी, जिसे बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने भरसक प्रयास किए और उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर लिया गया। लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि कुछ ही देर के उपचार के बाद उसने भी दम तोड़ दिया। इस तरह इस भयावह हादसे में कुल चार जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं।
मृतकों की पहचान: चारों दोस्त थे एक ही इलाके के निवासी
पुलिस ने जब मृतकों के पास मिले दस्तावेजों और मोबाइल फोन के जरिए शिनाख्त की, तो उनकी पहचान हल्द्वानी के पड़ाव क्षेत्र के निवासी के रूप में हुई। हादसे का शिकार हुए युवकों के नाम इस प्रकार हैं:
- राहुल राजपूत
- शिवम
- आशु गौड़ा
- आदि टम्टा
ये चारों आपस में गहरे दोस्त थे और शनिवार रात किसी काम से बाहर निकले थे। जैसे ही पुलिस ने मृतकों के परिजनों को इस अनहोनी की सूचना दी, वैसे ही परिवारों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन सुशीला तिवारी अस्पताल पहुँचे, जहाँ रात में ही स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे पड़ाव क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई: साक्ष्य जुटाए, पोस्टमार्टम के लिए भेजे शव
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) अमित कुमार और संबंधित थाने की फोर्स मौके पर मुस्तैद रही। पुलिस ने सबसे पहले हाईवे पर लगे लंबे जाम को खुलवाया और क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से सड़क से हटाकर कोतवाली भिजवाया, ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके। पुलिस की फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और टायरों के निशान व अन्य साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने चारों शवों को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसे के कारणों की गहनता से जांच में जुटी पुलिस
क्षेत्राधिकारी (CO) अमित कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
”तीनपानी के पास एनएच-109 फ्लाईओवर के मोड़ पर यह गंभीर सड़क दुर्घटना हुई है। प्रथम दृष्टया यह मामला तेज रफ्तार और लापरवाही का लग रहा है। स्कॉर्पियो की गति काफी अधिक थी, जिसके कारण मोड़ पर संतुलन बिगड़ गया। हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या कोई चालक नशे की हालत में था या नहीं। सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी कार चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
बढ़ते हादसों के बीच सुरक्षा पर उठते सवाल
हल्द्वानी का तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर रात के समय अक्सर तेज रफ्तार वाहनों का अड्डा बन जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस फ्लाईओवर के घुमावदार मोड़ों पर रिफ्लेक्टर और स्पीड ब्रेकर या चेतावनियों के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिसके कारण रात के अंधेरे में अक्सर वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर ओवरस्पीडिंग और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को अब इस ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी और मां की गोद सूनी न हो।







