देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और उसके आसपास के पहाड़ी व मैदानी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे जान-माल के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
इसी क्रम में, देहरादून के विकासनगर-प्रेमनगर मार्ग को जोड़ने वाले बेहद महत्वपूर्ण नंदा की चौकी क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां शनिवार देर रात हुई तेज बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण नंदा की चौकी पर बना अस्थायी पुल (कॉजवे) ताश के पत्तों की तरह बह गया।
अस्थायी पुल के बह जाने से इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों की रफ्तार थम गई और देखते ही देखते दोनों ओर लंबा जाम लग गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने क्षेत्र के लोगों की बढ़ती परेशानी और आपातकालीन स्थिति को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया। पिछले साल यानी वर्ष 2025 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए नंदा की चौकी के मुख्य पुराने पुल को, जिसका पुनर्निर्माण कार्य चल रहा था, रविवार सुबह आनन-फानन में हल्के और भारी वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है।
आधी रात को नदी के रौद्र रूप ने मचाई तबाही
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम से ही देहरादून और आसपास के कैचमेंट एरिया में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। देर रात होते-होते पहाड़ी क्षेत्रों से आए मलबे और पानी के कारण स्थानीय नदी का जलस्तर अचानक बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि पुल के समीप तेजी से मिट्टी का कटाव (Soil Erosion) होने लगा।
देखते ही देखते अस्थायी पुल का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी धंसने के कारण ढह गया और पुल के बीच में गहरा गड्ढा हो गया। इसके बाद यह पूरा ढांचा वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से असुरक्षित और जानलेवा हो गया। गनीमत रही कि जब यह हादसा हुआ, उस समय पुल पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा, रूट किया गया डायवर्ट
अस्थायी पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं। रात में ही एहतियात के तौर पर इस पूरे मार्ग पर बैरिकेडिंग कर यातायात को पूरी तरह से रोक दिया गया। अंधेरा और तेज बहाव होने के कारण रात में मरम्मत कार्य शुरू करना मुमकिन नहीं था, इसलिए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्गों (जैसे सुद्धोवाला और झाझरा मार्ग) की तरफ डायवर्ट करना शुरू कर दिया।
रविवार सुबह होते ही जिला प्रशासन और संबंधित लोनिवि (PWD) विभाग के उच्च अधिकारी भारी दलबल के साथ मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों तरफ पुलिस कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि कोई भी राहगीर या दुपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की कोशिश न करे।
जनता की परेशानी देख युद्धस्तर पर खोला गया मुख्य पुल
नंदा की चौकी मार्ग देहरादून को सुद्धोवाला, प्रेमनगर, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाली मुख्य धुरी है। इस मार्ग पर रोजाना हजारों की संख्या में कॉलेज छात्र, नौकरीपेशा लोग और व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं। अस्थायी पुल टूटने से क्षेत्र के लोगों की परेशानी बेहद बढ़ गई थी और वैकल्पिक मार्गों पर भी दबाव के कारण भारी जाम की स्थिति पैदा हो रही थी।
स्थानीय निवासियों और यात्रियों की इसी बढ़ती परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और त्वरित निर्णय लिया। वर्ष 2025 की आपदा में जो मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था और जिस पर पिछले कई महीनों से पुनर्निर्माण व सुदृढ़ीकरण का काम तेजी से चल रहा था, उसे पूरी क्षमता के साथ चालू करने की कवायद शुरू की गई।
अधिकारियों ने निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों और श्रमिकों को दिशा-निर्देश देकर रविवार सुबह ही निर्माणाधीन मुख्य पुल को यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया। मुख्य पुल के खुल जाने से क्षेत्र के लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है और इस व्यस्त रूट पर आवाजाही एक बार फिर सुचारू हो गई है।
मौसम विभाग का अलर्ट: नदी-नालों से दूर रहने की अपील
उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून समेत राज्य के कई जिलों के लिए अगले 48 घंटों का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
प्रशासन की अपील: जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों, विशेषकर नदी तटीय क्षेत्रों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों के पास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। आपदा प्रबंधन तंत्र को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या कंट्रोल रूम को सूचित करने का आग्रह किया गया है।
नंदा की चौकी पर मुख्य पुल के खुल जाने से तात्कालिक राहत जरूर मिली है, लेकिन मानसून के शुरुआती दौर में ही बुनियादी ढांचे का इस तरह प्रभावित होना आने वाले दिनों के लिए एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा कर रहा है।







