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​ ​महाराष्ट्र में कुदरत का दोहरा प्रहार: भारी बारिश के बीच आधी रात को लगातार 4 बार कांपी धरती, दहशत में घरों से भागे लोग

On: July 9, 2026 4:53 AM
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​मराठवाड़ा के तीन जिलों में भूकंप के तेज झटके

​मुंबई/नांदेड़: महाराष्ट्र में इस समय मौसम का मिजाज बेहद बिगड़ा हुआ है। एक तरफ जहां राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ मराठवाड़ा क्षेत्र में आए भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को भारी दहशत में डाल दिया है। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख जिलों—नांदेड़, हिंगोली और परभणी में धरती हिलने से हड़कंप मच गया।

​रात के सन्नाटे में जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी अचानक जमीन हिलने लगी। भूकंप के झटके इतने महसूस होने वाले थे कि लोग घबराकर अपने मासूम बच्चों और बुजुर्गों को लेकर तुरंत घरों से बाहर खुली सड़कों की तरफ भाग खड़े हुए।

​2 घंटे में 4 बार हिली धरती, रिक्टर स्केल पर 4.6 रही तीव्रता

​आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ये झटके रात को लगभग 1 बजकर 37 मिनट से शुरू हुए और सुबह 3 बजकर 23 मिनट तक यानी करीब दो घंटे के भीतर लगातार चार बार महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इन भूकंप के झटकों की तीव्रता 3.6 से लेकर 4.6 तक मापी गई है।

​इतने कम समय में बार-बार धरती का कांपना प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। गनीमत यह रही कि अभी तक इस प्राकृतिक आपदा में किसी भी तरह के जान-माल के बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

​कब और कहाँ आए भूकंप के झटके? (विस्तृत टाइमलाइन)

​भूकंप की शुरुआत आधी रात के बाद हुई और इसके बाद एक-एक करके कुल चार झटके दर्ज किए गए:

  • ​पहला झटका (रात 1:37 बजे): भूकंप का सबसे पहला और सबसे तेज झटका रात के करीब 1 बजकर 37 मिनट पर आया।
    इसका केंद्र हिंगोली जिले के वसमत तालुका में स्थित ‘सिरली-पांगरा शिंदे’ गांव के पास जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता सबसे ज्यादा 4.6 दर्ज की गई। इस झटके ने लोगों को नींद से जगा दिया।
  • ​दूसरा झटका (रात 2:15 बजे): पहले झटके के ठीक 38 मिनट बाद दूसरा झटका महसूस हुआ। यह झटका ‘ककड़धाबा’ गांव के आसपास के इलाके में आया और इसकी तीव्रता 3.6 मापी गई।
  • ​तीसरा झटका (रात 2:17 बजे): दूसरे झटके के ठीक दो मिनट बाद यानी रात 2 बजकर 17 मिनट पर एक बार फिर से धरती कांपी। इसकी तीव्रता भी लगभग 3.9 के आसपास दर्ज की गई।
  • ​चौथा झटका (सुबह 3:23 बजे): जब लोग थोड़ा शांत हो रहे थे, तभी सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर चौथा और आखिरी झटका लगा। इसने लोगों के मन में दोबारा डर पैदा कर दिया, जिसके बाद लोगों ने पूरी रात जागकर काटी।

​लाउडस्पीकर से किया गया अलर्ट, खुले आसमान के नीचे कटी रात

​जैसे ही भूकंप के एक के बाद एक झटके आने शुरू हुए, गांवों और कस्बों में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई गांवों के मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।

लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा करके सोते हुए लोगों को जगाया गया और उन्हें तुरंत अपने पक्के मकानों से बाहर निकलकर किसी खुले मैदान या सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई।

​इस चेतावनी के बाद बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे रात की ठंडी हवा और हल्की बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे आ गए。 भूकंप के दोबारा आने के डर से कोई भी वापस अपने घर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। लोगों ने सुबह होने तक का समय सड़कों और मैदानों में ही बैठकर बिताया।

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​हिंगोली और नांदेड़ में पहले भी आ चुके हैं झटके

​मराठवाड़ा का यह इलाका पिछले कुछ समय से लगातार भूकंपीय गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। इससे पहले इसी साल अप्रैल के महीने में भी हिंगोली और उसके आसपास के इलाकों में 4.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया था।

उस समय पांगरा शिंदे गांव में भूकंप का असर काफी ज्यादा देखा गया था, जहाँ कुछ पुराने मकानों और सरकारी कम्युनिटी हॉल की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं। नांदेड़, अर्धापुर, हदगांव, हिमायतनगर और परभणी जैसे इलाकों में भी तब भारी कंपन महसूस किया गया था। बार-बार आ रहे इन झटकों के कारण स्थानीय लोग अब अपने मकानों की मजबूती को लेकर भी डरे हुए हैं।
​मानसून और भारी बारिश के बीच दोहरी मुसीबत

​महाराष्ट्र के इन इलाकों में इस समय मानसून पूरी तरह सक्रिय है और पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। एक तरफ सड़कों और खेतों में पानी भरा हुआ है, तो दूसरी तरफ रात में आए भूकंप ने लोगों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान जमीन के नीचे होने वाली भूगर्भीय हलचलों और पानी के रिसाव के कारण भी कभी-कभी इस तरह के हल्के या मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके देखने को मिलते हैं।
​प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें और सतर्क रहें

​इस पूरी घटना के बाद नांदेड़, हिंगोली और परभणी का जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management) की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

​प्रशासनिक अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक (घबराहट) की स्थिति न पैदा होने दें। यदि दोबारा ऐसा कोई झटका महसूस होता है, तो तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी राजस्व अधिकारियों को गांवों में जाकर नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं। 

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