उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान राशि की गणना के दौरान कथित अनियमितता का मामला अब कानूनी जांच के दायरे में पहुंच गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष के सरकारी निजी सहायक (पीए) प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बदरीनाथ थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इससे पहले विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता के संकेत मिलने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। अब पूरे मामले की जांच Badrinath Temple Donation Theft के तहत पुलिस, मंदिर प्रशासन और शासन के स्तर पर आगे बढ़ाई जा रही है।
यह मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भी कई सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
प्राथमिक जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
बदरीनाथ के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पासवान ने थाना बदरीनाथ में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि विभागीय जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह पाया गया कि सरकारी पीए प्रमोद नौटियाल कथित रूप से दान राशि को निर्धारित गणना स्थल से सुबह लगभग 9 बजे से 9:30 बजे के बीच अवैध तरीके से हटाते हुए दिखाई दिए।
इसी प्रारंभिक निष्कर्ष के आधार पर पहले उन्हें निलंबित किया गया और बाद में उनके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। Badrinath Temple Donation Theft मामले में यह पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई मानी जा रही है।
भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में दर्ज हुआ मामला
मंदिर प्रशासन की शिकायत मिलने के बाद मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे बदरीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी महादेव उनियाल को सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि Badrinath Temple Donation Theft मामले में सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जाएगा ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
CCTV फुटेज बनेगा जांच का सबसे अहम आधार
पुलिस और मंदिर प्रशासन दोनों का मानना है कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में सीसीटीवी फुटेज सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जांच अधिकारी ने बताया कि 2 जुलाई को दान गिनती के दौरान लगे सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित कर लिया गया है। फुटेज का फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान राशि के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
इसके साथ ही Badrinath Temple Donation Theft से जुड़े सभी दस्तावेज, विभागीय जांच रिपोर्ट और कर्मचारियों से प्राप्त स्पष्टीकरण भी जांच का हिस्सा बनाए जाएंगे।
श्रद्धालुओं और साधुओं से भी होगी पूछताछ
मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने जानकारी दी कि 2 जुलाई को दान गिनती के दौरान केवल कर्मचारी ही मौजूद नहीं थे, बल्कि 11 से 12 श्रद्धालु और तीन साधु भी स्वेच्छा से वहां उपस्थित थे।
ऐसे में जांच केवल विभागीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर उस समय मौजूद सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि Badrinath Temple Donation Theft की जांच में किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
विभागीय कार्रवाई भी जारी
एफआईआर दर्ज होने से पहले मंदिर समिति ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए सरकारी पीए प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया था।
समिति का कहना है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। अंतिम निर्णय पुलिस जांच और विस्तृत विभागीय रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
उधर शासन ने भी इस पूरे प्रकरण की निगरानी शुरू कर दी है ताकि Badrinath Temple Donation Theft मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ सके।
विधायक ने उठाए कई गंभीर सवाल
बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखपत बुटोला ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है कि मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक संस्थान में इतनी बड़ी कथित अनियमितता किसी एक व्यक्ति द्वारा किए जाने की संभावना कम दिखाई देती है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क या अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। विधायक ने मांग की कि Badrinath Temple Donation Theft की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए।
आस्था से जुड़ा मामला, इसलिए बढ़ी संवेदनशीलता
बदरीनाथ धाम चारधाम यात्रा का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में आने वाला दान धार्मिक गतिविधियों, व्यवस्थाओं और विभिन्न सेवा कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में दान राशि से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि Badrinath Temple Donation Theft मामले की निष्पक्ष जांच केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दान प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं तकनीक आधारित बनाया जाना चाहिए।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस विभागीय जांच रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं सरकार पहले ही उच्चस्तरीय समिति का गठन कर चुकी है, जो दान प्रबंधन व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है।
आने वाले दिनों में Badrinath Temple Donation Theft मामले की जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि कथित अनियमितता के पीछे वास्तविक तथ्य क्या थे और क्या इसमें किसी एक व्यक्ति की भूमिका थी या फिर कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।









