मुख्य बिंदु:
- श्रीलंका के नेगोम्बो शहर की मुख्य जेल में ड्रग माफियाओं के दो गुट आपस में भिड़े।
- हिंसक दंगे में 4 जेल सुरक्षाकर्मियों और 21 कैदियों की दर्दनाक मौत।
- 100 से अधिक घायल कैदियों और गार्ड्स को सरकारी अस्पताल में कराया गया भर्ती।
- पिछले 5 सालों का सबसे घातक और खूनी जेल दंगा आया सामने।
कोलंबो (श्रीलंका)।
श्रीलंका से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ की नेगोम्बो (Negombo) जेल में कैदियों के दो विरोधी गुटों के बीच हुई भीषण हिंसक झड़प ने एक बड़े दंगे का रूप ले लिया। इस खूनी संघर्ष में अब तक 4 जेल सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह पिछले पांच वर्षों में श्रीलंका की किसी भी जेल में हुआ सबसे घातक और हिंसक दंगा है।
यह पूरी घटना राजधानी कोलंबो के उत्तर में स्थित तटीय शहर नेगोम्बो की मुख्य जेल की है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और जेल परिसर को भारी सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
ड्रग माफियाओं के बीच विवाद से भड़की हिंसा
पुलिस और जेल प्रशासन से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस खूनी खेल की पटकथा रविवार रात को ही लिख दी गई थी। जेल में बंद ड्रग माफियाओं के दो विरोधी गुटों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते इस विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया।
रविवार की रात शुरू हुआ यह आपसी झगड़ा सोमवार सुबह तक एक बड़े और अनियंत्रित दंगे में तब्दील हो गया। कैदियों ने जेल के भीतर ही उपलब्ध धारदार हथियारों, लोहे की रॉड और पत्थरों से एक-दूसरे पर हमला करना शुरू कर दिया।
जब जेल के सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने और बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उग्र कैदियों ने उन पर भी जानलेवा हमला बोल दिया। इस हमले में ड्यूटी पर तैनात 4 सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
अस्पताल में आपातकाल: धारदार हथियारों और गोलियों के निशान
जेल परिसर के भीतर मचे इस कोहराम के बाद आनन-फानन में भारी पुलिस बल और दंगा नियंत्रण दस्ते को मौके पर बुलाया गया।
स्थिति पर बमुश्किल काबू पाने के बाद सभी घायलों को तुरंत पास के नेगोम्बो सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नेगोम्बो सरकारी अस्पताल की निदेशक पुष्पा गमलाथ ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
”अस्पताल में स्थिति बेहद गंभीर है। अब तक हमारे पास दो शव लाए जा चुके हैं, जबकि मृतकों का कुल आंकड़ा 25 तक पहुँच चुका है।
इसके अलावा, 100 से अधिक घायल कैदियों और जेल गार्ड्स का इलाज चल रहा है। कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घायलों के शरीर पर धारदार हथियारों के गहरे घाव और गंभीर चोटों के निशान हैं, जबकि कुछ कैदियों को गोलियां भी लगी हैं।”
अस्पताल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया है ताकि घायलों को त्वरित इलाज मिल सके।
ओवरक्राउडिंग (क्षमता से अधिक कैदी) बनी बड़ी वजह
इस भीषण हादसे ने एक बार फिर श्रीलंका की जेलों की बदहाल व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
विभिन्न रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के दावों के मुताबिक, नेगोम्बो जेल में कैदियों को रखने की क्षमता बेहद कम है, लेकिन यहाँ क्षमता से कई गुना अधिक कैदियों को ठंसकर रखा गया है।
जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों का होना (Overcrowding) अक्सर तनाव और गुटबाजी को जनम देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेगोम्बो जेल में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी और कैदियों की अत्यधिक संख्या के कारण लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जिसने ड्रग माफियाओं की आपसी दुश्मनी के साथ मिलकर इस बड़े ब्लास्ट का रूप ले लिया।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
इस भयावह घटना के बाद श्रीलंका सरकार और जेल मंत्रालय ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जेल के भीतर कैदियों के पास धारदार हथियार और गोलियां कहाँ से आईं, इस बात की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस दंगे के पीछे जेल के ही कुछ सुरक्षाकर्मियों या बाहरी तत्वों की मिलीभगत थी।
फिलहाल, नेगोम्बो जेल के भीतर और बाहर सेना व विशेष कार्य बल (STF) के जवानों को तैनात कर दिया गया है। पूरे परिसर को छावनी में बदल दिया गया है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि जेल के भीतर छिपे अन्य हथियारों को जब्त किया जा सके।
सरकार ने मृतक सुरक्षाकर्मियों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।











