होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद पश्चिम एशिया में मंडराया भीषण युद्ध का खतरा।
नई दिल्ली/तेहरान:
पश्चिम एशिया (Mid-East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से चला आ रहा शांति का दौर पूरी तरह खत्म हो चुका है। दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर (युद्धविराम) महज 20 दिनों के भीतर ही टूट गया है। इस संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है।
अमेरिका की केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने ईरान के भीतर घुसकर उसके लगभग 90 सैन्य ठिकानों पर भीषण एयर स्ट्राइक की है। इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना ने इस तबाही का लाइव ऑपरेशनल वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है। दूसरी ओर, इस हमले से बौखलाए ईरान ने भी अमेरिका को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी दी है।
अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) ने जारी किया तबाही का वीडियो
अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने इस हवाई हमले के वीडियो को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया है। इस फुटेज में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों द्वारा ईरानी ठिकानों पर बेहद सटीक निशाने लगाते हुए देखा जा सकता है।
वीडियो में कई बड़े और सेकेंडरी धमाके भी साफ नजर आ रहे हैं, जो यह बताते हैं कि जिन जगहों को निशाना बनाया गया, वहाँ भारी मात्रा में हथियार और बारूद जमा था।
अमेरिकी सेना ने वीडियो जारी करते हुए साफ शब्दों में लिखा, “इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) में कमर्शियल जहाजों और बेकसूर अंतरराष्ट्रीय नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना और कमजोर करना है।”
ईरान की इन बड़ी सैन्य संपत्तियों को बनाया निशाना
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह कोई सामान्य हमला नहीं था बल्कि एक बेहद सोची-समझी रणनीतिक कार्रवाई थी। इस नए हवाई हमले में विशेष रूप से ईरान की उन प्रमुख सैन्य संपत्तियों को टारगेट किया गया जो युद्ध की स्थिति में गेम-चेंजर साबित हो सकती थीं। अमेरिकी बमबारी में नष्ट किए गए प्रमुख ठिकानों में शामिल हैं:
- वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense Systems): ईरान की मिसाइल रोकने वाली तकनीक को ध्वस्त किया गया।
- मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज: जहाँ ईरान ने अपने घातक ड्रोन और मिसाइलें छिपाकर रखी थीं।
- रणनीतिक कमान नेटवर्क: ईरान का वह कम्यूनिकेशन सिस्टम जिससे सेना को निर्देश दिए जाते हैं।
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 7 जुलाई को ईरान के लगभग 80 से 90 सैन्य ठिकानों पर एक साथ बमबारी की।
इस दौरान ईरान की सबसे ताकतवर सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) की 60 से अधिक लड़ाकू नौकाओं (Military Boats) को पानी में ही नेस्तनाबूद कर दिया गया।
आखिर अमेरिका ने क्यों किया इतना बड़ा हमला?
अमेरिकी केंद्रीय कमान का कहना है कि यह बड़ी कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। दरअसल, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजर रहे तीन कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों पर ईरान ने आक्रामक समुद्री हमले किए थे।
ईरान की इसी हिमाकत और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का जवाब देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर यह पलटवार किया गया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी सेना हर वक्त सतर्क, घातक और किसी भी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान की सीधी धमकी: “अगर हमला किया, तो हम भी पीछे नहीं हटेंगे”
इस भीषण हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में हड़कंप मच गया है। ईरान ने वाशिंगटन को अपनी कड़ी चेतावनी दोहराते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने दोबारा ऐसी कोई सैन्य दुस्साहस (गलती) की, तो इसका अंजाम बेहद खौफनाक होगा।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने एक सार्वजनिक जनसभा को संबोधित करते हुए अमेरिका को सीधे शब्दों में ललकारा। उन्होंने कहा, “अमेरिका को अभी तक शायद यह समझ नहीं आया है कि दुनिया में दादागिरी करना और अपने वादे तोड़ना अब मुफ्त नहीं रहा।
इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। मैं बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूँ कि अगर आप हमला करेंगे, तो हम भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। हमारी सेना भी इसका करारा जवाब देगी।”
गालिबफ ने आगे चुनौती भरे लहजे में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह से ईरान के संप्रभु नियंत्रण में है और हमेशा रहेगा।
समुद्र के इस रास्ते से कौन सा जहाज गुजरेगा और कौन सा नहीं, इसका फैसला कोई पश्चिमी देश या अमेरिकी धमकी नहीं करेगी, बल्कि सिर्फ ईरान करेगा। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “बेकार में यहाँ हाथ-पैर मत मारो, वरना और भी गहरे दलदल में फंस जाओगे।”
तीसरे विश्व युद्ध की आहट से पूरी दुनिया में फैली चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच अचानक सीजफायर टूटने और इस भयानक बमबारी के बाद पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। इस महासंकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN), पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने दोनों पक्षों से तुरंत संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और बड़े देशों के नेता इस क्षेत्रीय युद्ध को रोकने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत की कोशिशों में जुट गए हैं।
इस तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
अगर यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पूरी दुनिया को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।










