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पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव! ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को बताया समय की बर्बादी, रद्द किया तेल लाइसेंस

On: July 8, 2026 9:29 AM
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​वॉशिंगटन / अंकारा:

​पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए अंतरिम युद्धविराम (सीजफायर) समझौते को पूरी तरह से खत्म घोषित कर दिया है।

तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और स्पष्ट किया कि वह अब तेहरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या कूटनीतिक लेन-देन के पक्ष में नहीं हैं।


​अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा, “मेरे हिसाब से यह समझौता अब खत्म हो चुका है। मैं उनके साथ अब कोई लेन-देन नहीं चाहता। उनके साथ डील करना सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी है।” ट्रंप के इस कड़े रुख के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं।

​क्यों टूटा 60 दिनों का अंतरिम समझौता?

​दरअसल, पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों को एक स्थायी और शांतिपूर्ण समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय देना था। इस अवधि के दौरान दोनों पक्षों को कूटनीतिक रास्ते तलाशने थे।


​इसी सिलसिले में पिछले हफ्ते कतर में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी शुरू हुई थी। लेकिन उम्मीदों के उलट, कतर की यह बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे या सहमति के समाप्त हो गई। बातचीत विफल होते ही

जमीनी स्तर पर तनाव तुरंत बढ़ गया, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान पर नए सिरे से हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों के साथ ही शांति की बची-खुची उम्मीदें भी मटियामेट हो गईं।

​नाटो प्रमुख की मौजूदगी में ट्रंप का तीखा हमला

​अंकारा में नाटो के नवनियुक्त महासचिव मार्क रुटे के साथ मीडिया के सामने आए डोनल्ड ट्रंप बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर निजी और कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए निशाना साधा।

​ट्रंप ने कहा:

​”वे बेहद घटिया लोग हैं। वे एक बीमार मानसिकता का हिस्सा हैं और उनका नेतृत्व भी ऐसे ही बीमार मानसिकता वाले लोगों के हाथों में है। ऐसे देश या नेतृत्व के साथ किसी टेबल पर बैठकर बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।”

​जब पत्रकारों ने उनसे सीजफायर के मौजूदा स्टेटस और भविष्य की संभावनाओं पर सवाल किया, तो ट्रंप ने दोटूक जवाब दिया कि उनके प्रशासन के लिए यह अध्याय अब पूरी तरह बंद हो चुका है।

​ईरान की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार: तेल बिक्री का लाइसेंस रद्द

​सिर्फ कूटनीतिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से घेरने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की इजाजत देने वाले विशेष लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।

यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हुए हालिया घटनाक्रमों के बाद की गई है, जहां तीन तेल टैंकरों पर संदिग्ध हमले हुए थे। अमेरिका इन हमलों के पीछे सीधे तौर पर ईरान या उसके समर्थित गुटों का हाथ मान रहा है।

​क्या था वो विशेष लाइसेंस?

  • ​22 जून को मिली थी राहत: दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी ट्रेजरी (वित्त विभाग) ने 22 जून को एक सामान्य लाइसेंस जारी किया था।
  • ​तेल बेचने की थी छूट: इस लाइसेंस के जरिए ईरान को अपने कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और पेट्रोलियम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में 21 अगस्त तक बेचने की कानूनी छूट दी गई थी।
  • ​17 जुलाई की नई डेडलाइन: मंगलवार को इस राहत को वापस लेते हुए अमेरिका ने अब ईरान को अपने सभी मौजूदा तेल सौदों और लेन-देन को समेटने (Wind up) के लिए महज 17 जुलाई तक की अंतिम मोहलत दी है।

​ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों पर असर

​ट्रंप के इस कड़े फैसले और अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा शुरू हुई सैन्य तनातनी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है, वहां सुरक्षा का खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है।


​विशेषज्ञों का मानना है कि 17 जुलाई के बाद जब अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे, तो ईरान से तेल की आपूर्ति ठप होने से एशिया और यूरोप के कई विकासशील देशों के लिए ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

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​आगे क्या? युद्ध के मुहाने पर पश्चिम एशिया

​60 दिनों के शांति प्रयास के महज कुछ ही हफ्तों में ढह जाने से यह साफ है कि ट्रंप प्रशासन अब ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति पर लौट आया है।

एक तरफ जहां अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक प्रतिबंधों की नई किश्त ने तेहरान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बेहद सख्त रुख और प्रतिबंधों पर ईरान की क्या जवाबी प्रतिक्रिया होती है।

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