अंतरराष्ट्रीय डेस्क।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब एक बेहद अप्रत्याशित और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेनी सेना ने रूस के सुदूर यूराल क्षेत्र में स्थित ‘ट्युमेन ऑयल रिफाइनरी’ को अपना निशाना बनाकर मॉस्को के पूरे ऊर्जा ढांचे को हिलाकर रख दिया है। यह हमला इसलिए बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि यह रिफाइनरी यूक्रेनी सीमा से लगभग 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) की अविश्वसनीय दूरी पर स्थित है।
इतनी गहराई में जाकर किए गए इस सटीक हमले ने रूसी डिफ़ेंस सिस्टम की पोल खोल दी है और पूरे देश में ईंधन की अभूतपूर्व किल्लत पैदा कर दी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि रूस के 53 क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की भारी राशनिंग शुरू हो गई है और पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं।
3,000 किमी तक मार करने वाले नए ड्रोनों का कहर
इस रणनीतिक कामयाबी पर बयान देते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुलासा किया कि यूक्रेन ने तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और लंबी दूरी के ऐसे नए ड्रोन विकसित कर लिए हैं, जो 3,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक मार करने में सक्षम हैं। ट्युमेन रिफाइनरी पर हुआ हमला इसी नई सैन्य तकनीक का नतीजा माना जा रहा है।
आपको बता दें कि ट्युमेन रिफाइनरी रूस के सबसे बड़े निजी तेल प्रसंस्करण संयंत्रों (Private Oil-Processing Plants) में से एक है। इसकी दैनिक क्षमता लगभग 1,51,000 बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की है, और यह रूसी घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति की रीढ़ मानी जाती है। इस प्लांट के ठप होने से रूस के भीतर तेल का संकट गहरा गया है।
मॉस्को रिफाइनरी पर एक हफ्ते में दो बार हमला, 20% तेल क्षमता ठप
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के इन लगातार हमलों ने रूस की कुल तेल रिफाइनिंग क्षमता के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से को पूरी तरह से ठप कर दिया है। एजेंसी ने इस गतिरोध को दोनों देशों के संघर्ष के इतिहास में ‘अभूतपूर्व और सबसे बड़ा नुकसान’ करार दिया है।
यूक्रेन ने केवल सुदूर इलाकों में ही नहीं, बल्कि रूसी राजधानी मॉस्को की नाक के नीचे भी तबाही मचाई है। 16 और 18 जून को मॉस्को रिफाइनरी पर लगातार दो भीषण हमले किए गए। उद्योग जगत के सूत्रों और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, 18 जून के हमले ने मॉस्को रिफाइनरी के सबसे आधुनिक ‘यूरो+’ क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसकी क्षमता 1,400,000 बैरल प्रतिदिन (कुल क्षमता का 47%) थी। इससे पहले 16 जून के हमले में रिफाइनरी का दूसरा हिस्सा (53% क्षमता वाला) क्षतिग्रस्त हुआ था। यानी मॉस्को को ईंधन देने वाली मुख्य रिफाइनरी अब पूरी तरह से अपंग हो चुकी है।
पेट्रोल पंपों पर हाहाकार: एक गाड़ी को केवल 20 से 50 लीटर तेल
वॉल स्ट्रीट जर्नल और स्वतंत्र रूसी मीडिया आउटलेट ‘द बेल’ की रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल रिफाइनरियों पर हुए इन हमलों का सीधा असर रूस के आम नागरिकों पर पड़ने लगा है। रूस और उसके कब्जे वाले करीब 53 क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की खरीद पर सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। देश में तेल की जमाखोरी को रोकने के लिए ड्राइवरों को कड़े नियमों का सामना करना पड़ रहा है।
- एक फुल टैंक की सीमा: रूस के 18 प्रमुख राज्यों में वाहन चालकों के लिए नियम बनाया गया है कि वे एक बार में अधिकतम 50 लीटर या केवल अपनी गाड़ी का एक फुल टैंक ही पेट्रोल भरवा सकते हैं।
- 20 लीटर का नियम: मॉस्को के दक्षिणी इलाकों में हालात और भी बदतर हैं, जहां प्रमुख तेल कंपनी ‘टाटनेफ्ट’ के स्टेशनों पर प्रति कार केवल 20 लीटर पेट्रोल ही दिया जा रहा है।
- ईंधन के दामों में उछाल: राजधानी मॉस्को सहित कई बड़े शहरों में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मस्कोवियों (मॉस्को के निवासियों) में महंगाई को लेकर भारी आक्रोश है।
क्रीमिया में QR कोड से मिल रहा पेट्रोल, 3-3 घंटे का इंतजार
यूक्रेन द्वारा कब्जाए गए क्रीमिया क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा संवेदनशील और गंभीर बनी हुई है। यूक्रेनी सेना ने क्रीमिया की ओर जाने वाले ईंधन टैंकरों और मालवाहक ट्रकों की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से काट दिया है। इसके चलते मई के अंत से ही वहां तेल की भारी राशनिंग की जा रही है।
क्रीमिया में तेल भरवाने के लिए वाहन चालकों को तीन से चार घंटे तक लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने यहां ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए ‘क्यूआर कोड आधारित राशनिंग सिस्टम’ लागू किया है। अब किसी भी नागरिक को अपना तय कोटा पाने के लिए प्रशासन द्वारा जारी डिजिटल क्यूआर कोड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
पुतिन सरकार का आपातकालीन फैसला: जेट फ्यूल के एक्सपोर्ट पर रोक
ईंधन के इस चक्रवाती संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं। रूसी सरकार ने देश से होने वाले जेट फ्यूल (हवाई जहाज के ईंधन) के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि घरेलू उड़ानों को ठप होने से बचाया जा सके।
इसके साथ ही, रूस ने पर्यावरण नियमों में ढील देते हुए अपनी रिफाइनरियों को ‘यूरो-5’ क्वालिटी स्टैंडर्ड से नीचे का (कम गुणवत्ता वाला) ईंधन भी घरेलू बाजार में बेचने की अस्थाई कानूनी अनुमति दे दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूक्रेन के यह ड्रोन हमले इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले दिनों में रूस का पूरा परिवहन और सैन्य लॉजिस्टिक्स सिस्टम पूरी तरह चरमरा सकता है।









