ऋषिकेश: उत्तराखंड के तीर्थ नगरी ऋषिकेश से एक बेहद सनसनीखेज और आक्रोशित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां हरिद्वार रोड पर काले-की-ढाल के समीप हरियाणा नंबर की कार में सवार कुछ युवकों पर एक मासूम 10 साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उग्र भीड़ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कार सवार युवकों को चारों तरफ से घेर लिया और उनकी बीच सड़क पर ही बेरहमी से धुनाई कर दी। इस दौरान स्थानीय लोगों ने आक्रोश में आकर युवकों की गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ की। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।
सड़क पार कर रही मासूम के साथ बदसलूकी
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना ऋषिकेश के व्यस्ततम इलाकों में से एक हरिद्वार रोड स्थित काले-की-ढाल के पास की है। बताया जा रहा है कि एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची सामान्य रूप से सड़क पार कर रही थी। इसी दौरान वहां से गुजर रही हरियाणा रजिस्ट्रेशन नंबर की एक कार में सवार युवकों ने बच्ची को देखकर कुछ आपत्तिजनक हरकतें और छेड़छाड़ की।
बच्ची के साथ हुई इस बदसलूकी की भनक जैसे ही आसपास मौजूद स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को लगी, मौके पर हड़कंप मच गया। देखते ही देखते घटना स्थल पर स्थानीय लोगों की एक भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों की कार को आगे बढ़ने से रोक लिया और उसे चारों तरफ से घेर लिया।
भीड़ का फूटा गुस्सा, सरेआम फटे कपड़े
मासूम बच्ची के साथ हुई इस घिनौनी हरकत से स्थानीय लोग इस कदर भड़क उठे कि उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेने में तनिक भी देर नहीं की। भीड़ ने कार में सवार युवकों को बाहर खींच निकाला और उनकी जमकर पिटाई शुरू कर दी। गुस्से से तमतमाए लोगों ने आरोपियों को लात-घूंसों और थप्पड़ों से सरेआम पीटना शुरू कर दिया।
यह हंगामा काफी देर तक बीच सड़क पर चलता रहा। मारपीट के दौरान स्थिति इतनी उग्र हो गई थी कि भीड़ के हत्थे चढ़े एक आरोपी युवक के कपड़े तक फट गए। स्थानीय लोगों का गुस्सा सिर्फ युवकों को पीटने तक ही शांत नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर आरोपियों की हरियाणा नंबर की कार को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कार के शीशे और अन्य हिस्से पूरी तरह तोड़ दिए गए।
पुलिस प्रशासन अलर्ट, जांच में जुटी टीमें
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और उग्र भीड़ के चंगुल से युवकों को बचाया। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी वारदात और मारपीट होने के बावजूद अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को कोई आधिकारिक लिखित तहरीर (शिकायत) नहीं दी गई है।
पीड़ित बच्ची के परिवार या स्थानीय लोगों की तरफ से शिकायत न मिलने के बाद भी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीर्थ नगरी में इस तरह की कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने और महिलाओं या बच्चियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अपने स्तर से सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चश्मदीदों के बयान दर्ज कर मामले की गहराई से जांच करने में जुट गई है।
देवभूमि में बढ़ती बाहरी अराजकता पर स्थानीय लोगों में रोष
इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से आने वाले कुछ हुड़दंगी और आपराधिक प्रवृत्ति के तत्वों पर स्थानीय लोगों के गुस्से को भड़का दिया है। ऋषिकेश जैसे शांत और धार्मिक क्षेत्र में दिनदहाड़े एक 10 साल की बच्ची के साथ ऐसी हरकत ने स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देवभूमि की मर्यादा और यहां की बेटियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि कोई भी बाहर से आकर यहां की शांति व्यवस्था को भंग करने या हमारी बच्चियों पर बुरी नजर डालने की कोशिश करेगा, तो उसे इसी तरह के जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने मांग की है कि पुलिस ऐसे मामलों में सख्त से सख्त रुख अपनाए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हिमाकत न कर सके।






