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देहरादून: पैनेसिया अस्पताल के ICU में AC फटने से भीषण आग, महिला मरीज की मौत; 6 झुलसे, दो की हालत गंभीर

On: May 20, 2026 7:20 AM
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देहरादून के पैनेसिया अस्पताल के आईसीयू में लगी भीषण आग और बाहर रेस्क्यू करते दमकलकर्मी।

​देहरादून (डोईवाला):

​उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के डोईवाला क्षेत्र से एक बेहद दुखद और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ स्थित पैनेसिया अस्पताल (Panacea Hospital) के आईसीयू (ICU) वार्ड में बुधवार को भीषण आग लग गई। इस भयावह हादसे में वेंटिलेटर पर मौजूद एक 55 वर्षीय महिला मरीज की जिंदा जलकर मौत हो गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आग लगने का कारण आईसीयू में लगे एयर कंडीशनर (AC) में हुआ जोरदार ब्लास्ट माना जा रहा है।


​इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हादसे में छह अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें तत्काल दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इनमें से दो मरीजों की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। आग बुझाने और मरीजों को बचाने के प्रयास में कुछ पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की सूचना है।

​AC ब्लास्ट के बाद मची चीख-पुकार, धुएं के गुबार में तब्दील हुआ अस्पताल

​प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हादसा बुधवार को उस वक्त हुआ जब अस्पताल में सामान्य कामकाज चल रहा था। अचानक आईसीयू वार्ड से एक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद भीषण आग की लपटें उठने लगीं। धमाका इतना जबरदस्त था कि कुछ ही सेकंड में पूरा आईसीयू और आसपास का हिस्सा काले धुएं के गुबार में तब्दील हो गया।
​धुआं भर जाने के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके तीमारदारों और मेडिकल स्टाफ को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। देखते ही देखते पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। चीख-पुकार के बीच, अस्पताल के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तुरंत खिड़कियां तोड़ीं और मरीजों को वार्डों से बाहर निकालना शुरू किया।

​वेंटिलेटर पर थी महिला, रेस्क्यू से पहले ही थमी सांसें

​इस हादसे का सबसे दुखद पहलू एक 55 वर्षीय महिला मरीज की मौत रही। बताया जा रहा है कि महिला गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती थी और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। जब एसी में ब्लास्ट हुआ और आग फैली, तो वह हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं थी। धुएं और आग की लपटों ने उन्हें घेर लिया। जब तक रेस्क्यू टीम उन तक पहुँच पाती, तब तक झुलसने और दम घुटने के कारण उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इस खबर ने मृतका के परिजनों को झकझोर कर रख दिया है और अस्पताल परिसर में मातम का माहौल है।

​रेस्क्यू ऑपरेशन: खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज, कैलाश अस्पताल में भर्ती

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन की टीम और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आनन-फानन में मौके पर पहुँचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल को खाली कराया गया।
​गंभीर रूप से बीमार मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के जरिए बाहर निकाला गया और एंबुलेंस की मदद से तुरंत नजदीकी कैलाश अस्पताल (Kailash Hospital) में शिफ्ट किया गया। जानकारी के अनुसार, कैलाश अस्पताल में लाए गए छह झुलसे हुए मरीजों में से दो की हालत बहुत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन ने पुष्टि की है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और अन्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

​उठते सवाल: फाइलों में सिमटा फायर ऑडिट, मरीजों की जिंदगी दांव पर

​पैनेसिया अस्पताल में हुई इस त्रासदी ने देहरादून और राज्य के अन्य हिस्सों में चल रहे निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी अस्पताल में इस तरह का अग्निकांड हुआ हो, लेकिन जिम्मेदार विभाग हर बार हादसे के बाद जागते हैं और कुछ दिन बाद फिर वही लापरवाही शुरू हो जाती है।

​जांच में प्राथमिक कारण एसी ब्लास्ट बताया जा रहा है, जो सीधे तौर पर बिजली उपकरणों और एयर कंडीशनिंग सिस्टम के रखरखाव (Maintenance) में भारी लापरवाही की ओर इशारा करता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर, जहाँ चौबीसों घंटे गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, वहाँ बिजली के उपकरणों की नियमित चेकिंग और ‘मानिटरिंग’ अनिवार्य होनी चाहिए।

​इसके अलावा, दून के अधिकांश निजी अस्पताल संकरी गलियों, सीमित जगह और बहुमंजिला इमारतों में चल रहे हैं। पैनेसिया अस्पताल में भी आग लगने के बाद जिस तरह धुआं भरा और अफरा-तफरी मची, उसने कमजोर ‘फायर सेफ्टी इंतजामों’ की पोल खोलकर रख दी है। कई अस्पतालों में न तो पर्याप्त पार्किंग है और न ही इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit), जिससे आपदा के समय फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर पहुँचने में भारी दिक्कत होती है।

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​सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्रशासन और फायर विभाग द्वारा किए जाने वाले ‘फायर ऑडिट’ और ‘मॉक ड्रिल’ जैसे जरूरी इंतजाम ज्यादातर जगहों पर सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित नजर आते हैं। जब तक इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता और लापरवाह अस्पताल प्रबंधनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक मरीजों की जिंदगी यूं ही दांव पर लगी रहेगी। फायर विभाग ने कहा है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की गहन जांच की जा रही है।

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