उत्तराखंड में मौसम का 'रौद्र रूप': 39 डिग्री पहुंचा पारा, अगले 48 घंटे भारी - Doonprimenews
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उत्तराखंड में मौसम का ‘रौद्र रूप’: 39 डिग्री पहुंचा पारा, अगले 48 घंटे भारी

On: April 21, 2026 2:58 AM
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Uttarakhand Summer Heatwave Yellow Alert Dehradun Pantnagar

​देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड में इस साल कुदरत के तेवर समय से पहले ही तल्ख हो गए हैं। अप्रैल के महीने में ही प्रदेश के लोग झुलसाने वाली गर्मी का सामना कर रहे हैं। आलम यह है कि पहाड़ से लेकर मैदान तक सूरज की तपिश ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के मैदानी इलाकों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले 48 घंटों में भीषण लू (Heat Wave) चलने की चेतावनी दी है।

​तराई और भाबर में ‘अग्निपरीक्षा’, पारा 39 के पार

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

​उत्तराखंड के मैदानी जिलों में गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त करने शुरू कर दिए हैं। ऊधमसिंह नगर के पंतनगर में सोमवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने इसे प्रदेश का सबसे गर्म क्षेत्र बना दिया। हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर और कोटद्वार जैसे शहरों में दोपहर के वक्त सड़कें रेगिस्तान जैसी नजर आ रही हैं।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

​गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों ने दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों तक आसमान पूरी तरह साफ रहेगा, जिससे सूरज की सीधी किरणें धरती को और अधिक तपाएंगी। न्यूनतम तापमान में भी 2 से 3 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा मतलब है कि अब रातें भी उतनी सुकून भरी नहीं रहीं।

​ठंडे पहाड़ों में भी गर्मी की दस्तक: सैलानी हैरान

​आमतौर पर उत्तराखंड के पहाड़ी पर्यटन स्थल गर्मी से राहत का ठिकाना माने जाते हैं, लेकिन इस साल मुक्तेश्वर और नई टिहरी जैसी ऊंचाई वाली जगहों पर भी गर्मी ने पसीने छुड़ा दिए हैं। मुक्तेश्वर में पारा 28.1 डिग्री तक पहुंचना चिंता का विषय है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्रों में इतना अधिक तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक ज्यादा है।

​इस बढ़ती गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति पर भी पड़ रहा है। पहाड़ों के पारंपरिक जलस्रोत (धारे-नौले) सूखने की कगार पर हैं और जंगलों में नमी कम होने के कारण वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो राज्य की जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा है।

​राजधानी देहरादून का हाल: तप रही है दून की घाटी

​राजधानी देहरादून, जो कभी अपनी सुहावनी हवाओं के लिए जानी जाती थी, अब कंक्रीट के जंगल और बढ़ती गर्मी की चपेट में है। सोमवार को दून का पारा 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक शहर की मुख्य सड़कों पर आवाजाही काफी कम देखी जा रही है। दून की पहाड़ियों से आने वाली ठंडी हवाओं की जगह अब गर्म हवा के झोंकों ने ले ली है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्थानीय कारकों और ग्लोबल वार्मिंग के मेल ने दून की घाटी को एक ‘हीट आइलैंड’ में तब्दील कर दिया है।

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​राहत की उम्मीद: कब बरसेंगे बादल?

​तपिश झेल रहे प्रदेशवासियों के लिए राहत की एक किरण भी दिखाई दे रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, गुरुवार से मौसम का मिजाज बदल सकता है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने की संभावना है, जिससे उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में बादल छा सकते हैं। यदि ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की वर्षा या गरज के साथ बौछारें पड़ती हैं, तो इसका असर तापमान में गिरावट के रूप में दिखेगा और मैदानी इलाकों को भी चिलचिलाती धूप से कुछ राहत मिल सकेगी।

​प्रमुख शहरों के तापमान की स्थिति (एक नजर में)

शहर
अधिकतम तापमान (°C)
न्यूनतम तापमान (°C)
पंतनगर
39.0
15.5
देहरादून
37.0
20.2
मुक्तेश्वर
28.1
12.4
नई टिहरी
26.6
13.6

डॉक्टरों की सलाह: लू और डिहाइड्रेशन से कैसे बचें?

​भीषण गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित बचाव के तरीके बताए हैं:

  • ​पानी का भरपूर सेवन: प्यास न लगने पर भी पानी पीते रहें। ओआरएस (ORS), नारियल पानी और नींबू पानी का उपयोग करें।
  • ​दोपहर का परहेज: बहुत जरूरी न हो तो सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें।
  • ​पहनावा: बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को तौलिए या टोपी से ढंक कर रखें।
  • ​ताजा भोजन: बासी खाने से बचें और तरबूज, खीरा, ककड़ी जैसे मौसमी फलों को डाइट में शामिल करें।

​निष्कर्ष

​उत्तराखंड में अप्रैल की यह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी एक गंभीर चेतावनी है। हिमालयी राज्यों में पर्यावरण के साथ हो रही छेड़छाड़ और जलवायु परिवर्तन अब प्रत्यक्ष रूप से हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं कि कब बादल बरसें और इस ‘अग्निपरीक्षा’ से मुक्ति मिले। तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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