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जम्मू-कश्मीर में भीषण सड़क हादसा: उधमपुर में खाई में गिरी बस, 18 की मौत, 30 घायल; प्रधानमंत्री ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान

On: April 20, 2026 9:38 AM
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जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में खाई में गिरी दुर्घटनाग्रस्त बस और राहत कार्य में जुटे बचाव दल।

​उधमपुर: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले से एक अत्यंत दुखद और हृदय विदारक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह रामनगर तहसील के कघोट गांव के पास यात्रियों से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में अब तक 18 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में कई स्कूली छात्र और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।

​हादसे का घटनाक्रम: सुबह 9:40 पर मचा कोहराम

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस (पंजीकरण संख्या JK14D 2121) सुबह रामनगर से उधमपुर शहर की ओर जा रही थी। चूँकि यह सुबह का समय था, बस में यात्रियों की भारी भीड़ थी। प्रत्यक्षदर्शियों और घायल यात्रियों के अनुसार, सुबह करीब 9:40 बजे जब बस कघोट इलाके में एक तीखे मोड़ पर पहुँची, तो चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। बस सड़क से फिसलकर लगभग 80 फीट गहरी खाई में जा गिरी और नीचे गिरते ही पलट गई।

​हादसे के तुरंत बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। बस की हालत इतनी खराब थी कि वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और कई यात्री मलबे के नीचे दब गए।

​तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग बने काल

​प्रारंभिक जांच और घायल यात्रियों के बयानों से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह हादसा मानवीय लापरवाही का नतीजा हो सकता है। अस्पताल में उपचाराधीन घायल यात्री देस राज ने बताया, “बस चालक वाहन को बहुत तेज गति से चला रहा था। हमने कई बार उसे धीरे चलने को कहा, लेकिन मोड़ पर अचानक संतुलन बिगड़ गया और बस खाई में समा गई।”

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, बस में क्षमता से कहीं अधिक यात्री सवार थे। कई यात्री बस की गैलरी में खड़े होकर सफर कर रहे थे, जिसके कारण मोड़ काटते समय बस का गुरुत्वाकर्षण संतुलन (Balance) बिगड़ गया।

​रेस्क्यू ऑपरेशन: SDRF और स्थानीय लोगों ने संभाली कमान

​हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुँचे और राहत कार्य शुरू किया। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन, पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें युद्धस्तर पर बचाव अभियान में जुट गईं।

  • ​चुनौतीपूर्ण बचाव: खाई गहरी और ढलान वाली होने के कारण घायलों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
  • ​अस्पताल में भर्ती: सभी घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए जीएमसी (GMC) उधमपुर पहुँचाया गया। गंभीर रूप से घायल कुछ यात्रियों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की भी तैयारी की जा रही है।

  • ​प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल ने जताया गहरा शोक

​इस त्रासदी पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा:
​”जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में हुई बस दुर्घटना की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है। मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

​मुआवजे की घोषणा:

प्रधानमंत्री ने मृतक के परिजनों को PMNRF से 2 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

​वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी इस घटना को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता और रसद उपलब्ध कराई जाए।

​केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ली जानकारी

​उधमपुर-कठुआ संसदीय क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने व्यक्तिगत रूप से उपायुक्त उधमपुर से बात कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।

​प्रशासन की कार्रवाई और आगामी जांच

​डीएसपी ट्रैफिक पंकज सूदन ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सही कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि “ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के एंगल से भी जांच की जा रही है। यदि चालक की लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

​मृतकों में छात्र और कर्मचारी शामिल

​यह हादसा इसलिए भी अधिक दुखद है क्योंकि सुबह का समय होने के कारण बस में अपने काम पर जा रहे सरकारी कर्मचारी, कॉलेज के छात्र और स्कूल शिक्षक सवार थे। कई परिवारों ने अपने चिरागों को खो दिया है, जिससे पूरे उधमपुर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।

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​निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल

​यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के उल्लंघन पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन ओवरलोडिंग को रोकने में विफल रहा? क्या इन दुर्गम मोड़ों पर सुरक्षा घेरे (Crash Barriers) पर्याप्त थे? इन सवालों के जवाब भविष्य की जांच में ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल उधमपुर की यह सुबह मातम में बदल गई है।

​नोट: प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि परिजन अपने सगे-संबंधियों की जानकारी प्राप्त कर सकें।

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