अंबाला की रहने वाली छात्रा देहराखास में रहती थी किराए पर; सुसाइड नोट और प्रताड़ना की खबरों से मेडिकल जगत में हड़कंप
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। यहाँ के प्रतिष्ठित महंत इंदिरेश मेडिकल कॉलेज में एमएस (Master of Surgery) कर रही एक मेधावी छात्रा ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली है। छात्रा की मौत की खबर फैलते ही मेडिकल कॉलेज परिसर और स्थानीय क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस आत्मघाती कदम के पीछे मानसिक प्रताड़ना (Harassment) की बात सामने आ रही है, जिसने एक बार फिर मेडिकल शिक्षा के दौरान छात्रों पर होने वाले दबाव और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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मूल रूप से अंबाला की रहने वाली थी छात्रा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका मूल रूप से हरियाणा के अंबाला जिले की रहने वाली थी। वह देहरादून के महंत इंदिरेश मेडिकल कॉलेज से सर्जरी में स्नातकोत्तर (MS) की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के दौरान वह देहरादून के देहराखास इलाके में एक किराए के कमरे में रह रही थी।
बताया जा रहा है कि छात्रा पढ़ाई में काफी होनहार थी और भविष्य में एक कुशल सर्जन बनने का सपना देख रही थी, लेकिन इस दुखद अंत ने सब कुछ खत्म कर दिया।
प्रताड़ना का एंगल: क्या था मौत का कारण?
पुलिस सूत्रों और छात्रा के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सुसाइड केस में ‘प्रताड़ना’ की बात प्रमुखता से उभर कर सामने आ रही है। हालांकि पुलिस अभी इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है, लेकिन दबी जुबान में चर्चा है कि छात्रा कॉलेज या विभाग के किसी दबाव या किसी व्यक्ति विशेष द्वारा मानसिक रूप से परेशान की जा रही थी। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और छात्रा के कमरे की तलाशी ली गई है ताकि किसी सुसाइड नोट या डिजिटल साक्ष्य (Mobile/Laptop) के जरिए मौत की असली वजह का पता लगाया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का ही लग रहा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए कोरोनेशन अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने अंबाला में रहने वाले छात्रा के परिजनों को सूचित कर दिया है, जो सूचना मिलते ही देहरादून के लिए रवाना हो गए हैं। परिजनों के पहुँचने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी कि क्या छात्रा ने पहले कभी किसी प्रकार की परेशानी का जिक्र उनसे किया था।
मेडिकल कॉलेजों में बढ़ता मानसिक दबाव
यह पहली बार नहीं है जब किसी मेडिकल कॉलेज के छात्र या छात्रा ने ऐसा कदम उठाया हो। विशेषज्ञ बताते हैं कि मेडिकल पीजी (MD/MS) के दौरान छात्रों पर काम का भारी बोझ, लंबे वर्किंग आवर्स और कभी-कभी सीनियर डॉक्टरों या फैकल्टी द्वारा किया जाने वाला व्यवहार उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। अगर प्रताड़ना के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी बड़े सवालिया निशान लगाएगा।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
बेटी की मौत की खबर सुनकर अंबाला में रह रहे माता-पिता स्तब्ध हैं। एक होनहार बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना लेकर देहरादून भेजने वाले परिवार के लिए यह वज्रपात जैसा है। परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी इतनी कमजोर नहीं थी कि बिना किसी ठोस कारण के ऐसा कदम उठा ले। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।






