उत्तराखंड: कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले दरिंदे को मिली सजा, जमानत मिलते ही दोबारा किया था नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म - Doonprimenews
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उत्तराखंड: कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले दरिंदे को मिली सजा, जमानत मिलते ही दोबारा किया था नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म

On: March 25, 2026 8:17 AM
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देहरादून कोर्ट परिसर: पुलिस और वकील दुष्कर्म के दोषी देवेंद्र को ले जाते हुए।

देहरादून की पोक्सो अदालत का ऐतिहासिक फैसला: दो अलग-अलग मामलों में 10-10 साल की कठोर कारावास, पीड़िता को मिलेगा 5 लाख का मुआवजा

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने वाली है। देहरादून की एक विशेष अदालत ने एक ऐसे अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा है, जिसने न केवल कानून का उल्लंघन किया, बल्कि जमानत मिलने के चंद दिनों बाद ही उसी मासूम को दोबारा अपनी हवस का शिकार बनाया। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने दोषी देवेंद्र को दो अलग-अलग दुष्कर्म के मामलों में 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

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मामले की पृष्ठभूमि: रोंगटे खड़े कर देने वाला दुस्साहस

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यह मामला साल 2019 का है, जिसने तत्कालीन समय में कानूनी व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस पर कई सवाल खड़े किए थे। मामले के अनुसार, सहसपुर क्षेत्र की रहने वाली एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को अभियुक्त देवेंद्र ने अपनी बातों के जाल में फंसाया।

5 फरवरी 2019 की पहली घटना: अभियुक्त पहली बार नाबालिग को बहला-फुसलाकर अगवा कर हरिद्वार और बिजनौर ले गया था। वहाँ उसने पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। लेकिन असली कहानी इसके बाद शुरू हुई, जिसने न्याय प्रणाली को भी झकझोर कर रख दिया।

जमानत मिलते ही फिर किया वही अपराध

जेल जाने के कुछ समय बाद आरोपी देवेंद्र को कोर्ट से जमानत मिल गई। आम तौर पर जमानत मिलने के बाद अपराधी सतर्क रहते हैं, लेकिन देवेंद्र का दुस्साहस चरम पर था। 28 मार्च 2019 को जेल से बाहर आते ही उसने फिर से उसी नाबालिग लड़की को अपना निशाना बनाया। उसने दोबारा लड़की का अपहरण किया और उसके साथ फिर से दुष्कर्म किया। एक ही पीड़िता के साथ दो बार जघन्य अपराध करने की इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।

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अदालत में बचाव पक्ष के झूठे तर्क

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियुक्त देवेंद्र ने खुद को निर्दोष बताने के लिए हर संभव प्रयास किया। विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा के अनुसार, आरोपी ने अदालत में यह दलील दी कि पीड़िता बालिग थी और उन दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। उसने यहाँ तक दावा किया कि उन्होंने हरिद्वार जाकर शादी भी कर ली थी।

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। माननीय न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि घटना के समय पीड़िता की आयु मात्र 15 वर्ष थी और कानूनन एक नाबालिग की “सहमति” का कोई महत्व नहीं होता। अदालत ने माना कि एक 15 साल की बच्ची अपना भला-बुरा समझने में सक्षम नहीं थी, इसलिए इसे सहमति नहीं बल्कि शोषण माना जाएगा।

सजा का ऐलान और भारी जुर्माना

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद, अदालत ने देवेंद्र को दोनों मुकदमों में दोषी करार दिया।

  • सजा: प्रत्येक अपराध के लिए 10-10 साल की कठोर कारावास। (कानूनी प्रावधानों के अनुसार दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी)।
  • आर्थिक दंड: कोर्ट ने अभियुक्त पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
  • पीड़िता को न्याय: अदालत ने पीड़िता के भविष्य और उसके मानसिक आघात को देखते हुए सरकार को कुल 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पैरवी की रही अहम भूमिका

इस केस को अंजाम तक पहुँचाने में पैरवीकार कंचन की विशेष भूमिका रही। उन्होंने पूरी मुस्तैदी के साथ सभी गवाहों को समय पर अदालत में पेश कराया, जिससे अभियोजन पक्ष का केस मजबूत हुआ और 5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पीड़िता को इंसाफ मिल सका।

निष्कर्ष: समाज के लिए कड़ा संदेश

देहरादून कोर्ट का यह फैसला समाज के उन तत्वों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो यह समझते हैं कि वे कानून की खामियों का फायदा उठाकर बच निकलेंगे। विशेषकर पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दी गई यह सजा नाबालिगों की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाती है। 5 साल बाद मिली यह जीत न केवल उस पीड़िता की जीत है, बल्कि हर उस परिवार की उम्मीद है जो न्याय के लिए अदालतों की चौखट पर खड़ा है।

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