Harak Singh Rawat Rape Case में उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर दो दशक पुराने गंभीर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। वर्ष 2003 में सामने आए चर्चित यौन शोषण मामले की पीड़िता इंदिरा डेंजी (जैनी) ने एक बार फिर कानून का दरवाजा खटखटाया है। पीड़िता ने उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और मामले की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
Harak Singh Rawat Rape Case: 2003 की घटना और पीड़िता के गंभीर आरोप
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में दी गई तहरीर के अनुसार, महिला ने पूर्व कैबिनेट मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि वर्ष 2002 में काम की तलाश में जब वह देहरादून आई थी, तब उसे तत्कालीन राजस्व मंत्री के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर रुकवाया गया था। आरोप है कि उसी दौरान उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए।
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इस घटना के बाद जून 2003 में पीड़िता ने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया था। पीड़िता का दावा है कि उस समय आरोपी की भारी राजनीतिक पहुंच, प्रशासनिक प्रभाव और सरकार में ऊंचे पद पर होने के कारण उसकी शिकायत पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और डरा-धमकाकर खामोश रहने पर मजबूर किया गया।
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23 वर्षीय बेटे की पहचान के लिए DNA टेस्ट की मांग
इस पूरे Harak Singh Rawat Rape Case में पीड़िता की सबसे प्रमुख मांग अपने 23 वर्षीय बेटे के अधिकार और उसकी पहचान को लेकर है। महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि उसका बेटा आज समाज में अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।
पीड़िता ने मांग उठाई है कि सच को सामने लाने के लिए पूर्व मंत्री और उसके बेटे का दोबारा डीएनए (DNA) परीक्षण करवाया जाए। पीड़िता का कहना है कि तत्कालीन समय में राजनीतिक दबाव के चलते निष्पक्ष न्याय नहीं मिल सका था, लेकिन अब वह कानूनी तरीके से अपने बेटे के जैविक पिता का नाम दर्ज कराने और उसे हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रही है।
Harak Singh Rawat Rape Case: SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने डोईवाला CO को सौंपी जांच
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेन्द्र डोबाल ने त्वरित कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश जारी किए हैं।
| अधिकारी का पद | जिम्मेदार अधिकारी | जांच का मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| एसएसपी (देहरादून) | प्रमेन्द्र डोबाल | विवेचना के आदेश व कानूनी दिशा-निर्देश |
| क्षेत्राधिकारी (CO) | वंदना वर्मा (डोईवाला) | पूरे मामले की जांच व विधिक संकलन |
एसएसपी ने क्षेत्राधिकारी (CO) डोईवाला वंदना वर्मा को जांच का जिम्मा सौंपा है। पुलिस टीम को पुराने दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड्स और पीड़िता के बयानों के आधार पर निष्पक्ष विधिक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
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वर्ष 2003 में जब यह प्रकरण पहली बार विधानसभा में उठा था, तब तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार में हड़कंप मच गया था और हरक सिंह रावत को अपने मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। हालांकि, उस समय सीबीआई जांच में डीएनए रिपोर्ट मैच न होने की बात कहकर उन्हें राहत मिल गई थी।
अब दो दशक बाद महिला के दोबारा सामने आने से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां पीड़िता न्याय की गुहार लगा रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। फिलहाल, पुलिस जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बहुचर्चित मामले में आगे का रुख तय हो सकेगा।
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