Uttarakhand News: उत्तराखंड की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और उनकी देखभाल को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने राज्य आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से घायल होकर पूरी तरह बिस्तर पर रहने को मजबूर दो आंदोलनकारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता मंजूर की है। अब इन दोनों आंदोलनकारियों को देखभाल के लिए एक-एक सहायक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हर महीने 20-20 हजार रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
दो राज्य आंदोलनकारियों को मिलेगा आर्थिक सहायता का लाभ
उत्तराखंड सरकार के इस फैसले का लाभ हरिद्वार निवासी प्रकाश चंद्र कांत और देहरादून निवासी अमित ओबराय को मिलेगा। दोनों आंदोलनकारी उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए चर्चित रामपुर तिराहा कांड में पुलिस की गोली से घायल हो गए थे। गंभीर चोटों के कारण दोनों की स्थिति ऐसी हो गई कि वे पूरी तरह शैय्याग्रस्त हो गए। लंबे समय से उन्हें नियमित देखभाल और सहायता की आवश्यकता है।
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सरकार ने उनकी मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब एक-एक सहायक की व्यवस्था के लिए अलग से आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रत्येक आंदोलनकारी को हर महीने 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी। इससे वे अपनी जरूरत के अनुसार देखभाल करने वाले सहायक की व्यवस्था कर सकेंगे।
पहले से मिल रही थी 30 हजार रुपये की विशेष सम्मान पेंशन
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रकाश चंद्र कांत और अमित ओबराय को पहले से ही 30-30 हजार रुपये प्रतिमाह विशेष सम्मान पेंशन दी जा रही है। अब देखभाल के लिए अतिरिक्त 20 हजार रुपये की मंजूरी मिलने के बाद प्रत्येक आंदोलनकारी को कुल 50 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी।
इस अतिरिक्त राशि का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि उन लोगों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करना भी है, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलन में अपना जीवन और स्वास्थ्य दांव पर लगा दिया था।
Uttarakhand News: 6 नवंबर को जारी हुआ शासनादेश
इस फैसले को लेकर शासन की ओर से 6 नवंबर 2026 को आदेश जारी किया गया है। गृह अनुभाग-8 द्वारा जारी शासनादेश में दोनों आंदोलनकारियों के लिए सहायक की व्यवस्था करने के उद्देश्य से 20-20 हजार रुपये प्रतिमाह स्वीकृत किए गए हैं।
इस राशि पर होने वाला खर्च वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से पूरा किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, इस फैसले को लागू करने के लिए वित्त विभाग की सहमति भी प्राप्त की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद शासन स्तर पर इस मामले में कार्रवाई पूरी की गई।
लंबे समय से उठ रही थी सहायक उपलब्ध कराने की मांग
दोनों शैय्याग्रस्त आंदोलनकारियों की देखभाल के लिए अलग से सहायक उपलब्ध कराने का विषय लंबे समय से उठाया जा रहा था। इस मामले को लेकर पूर्व में हिमालय संवाद के एक कार्यक्रम में भी चर्चा हुई थी। कार्यक्रम में मौजूद आंदोलनकारी अमित ओबराय की देखभाल के लिए सहायक नियुक्त करने का मुद्दा सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी के सामने रखा गया था।
उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब दोनों आंदोलनकारियों के लिए अतिरिक्त सहायता को मंजूरी मिल गई है।
रामपुर तिराहा कांड के आंदोलनकारियों के सम्मान की पहल
उत्तराखंड राज्य निर्माण का इतिहास कई संघर्षों और बलिदानों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1994 में हुए रामपुर तिराहा कांड को राज्य आंदोलन के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिना जाता है। इस घटना में आंदोलनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई हुई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई और अनेक लोग घायल हुए थे।
उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर चले आंदोलन में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। लंबे संघर्ष के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। ऐसे में राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को सम्मान तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी भी मानी जाती है।
आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए पहले भी बढ़ाई गई पेंशन
धामी सरकार इससे पहले भी राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए कई फैसले ले चुकी है। आंदोलन के दौरान सात दिन या उससे अधिक समय तक जेल में रहने वाले अथवा घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 7 हजार रुपये की गई थी। वहीं, अन्य आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह की गई।
इसके अलावा राज्य आंदोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार का यह नया फैसला उन आंदोलनकारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो राज्य निर्माण के संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए और आज भी दूसरों पर निर्भर हैं। अतिरिक्त 20 हजार रुपये की सहायता से उनकी नियमित देखभाल के लिए सहायक की व्यवस्था करना आसान होगा।






