बदरीनाथ धाम के कपाट कल होंगे बंद, 12 क्विंटल फूलों से सजी दिव्य नगरी - Doonprimenews
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बदरीनाथ धाम के कपाट कल होंगे बंद, 12 क्विंटल फूलों से सजी दिव्य नगरी

On: November 24, 2025 6:08 PM
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बदरीनाथ धाम में शीतकालीन अवकाश की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। मंगलवार दोपहर 2:56 बजे मंदिर के कपाट विधिवत रूप से बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले पूरे धाम को भव्य रूप से सजाया गया है। लगभग 12 क्विंटल फूलों से सजे बदरीनाथ मंदिर का सौंदर्य श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। कपाट बंद होने से पहले भारी संख्या में भक्त अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पंच पूजा के चौथे दिन हुआ मां लक्ष्मी का विशेष अनुष्ठान
सोमवार को पंच पूजा के क्रम में लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। रावल अमरनाथ नंबूदरी सहित मंदिर के पुजारी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट और अमित बंदोलिया ने मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा की।
इस दौरान देवी लक्ष्मी को भगवान नारायण की ओर से बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में आने का निमंत्रण दिया गया, जो परंपरा का अत्यंत पवित्र और भावुक क्षण माना जाता है। यह दृश्य देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।
लक्ष्मी जी को भोग अर्पण और गर्भगृह में विराजमान करने की तैयारी
पंच पूजा के चौथे दिन मां लक्ष्मी को कढ़ाई का प्रसाद चढ़ाया गया और शीतकाल में भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने की प्रार्थना की गई। यात्रा काल के दौरान लक्ष्मी मंदिर में स्थापित माता को आज गर्भगृह में ले जाया जाएगा। इसके बाद कपाट बंद करने की अंतिम प्रक्रियाएँ शुरू होती हैं।
व्यवस्थाओं का निरीक्षण और विशिष्ट अतिथियों का आगमन
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कपाट बंदी की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मंदिर को 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया है और विशिष्ट अतिथियों का आगमन लगातार जारी है।
भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री अजेय कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए। इस अवसर पर बीकेटीसी अधिकारी, स्थानीय प्रतिनिधि, धार्मिक संगठन और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
कपाट बंद होने का भावुक क्षण
हर वर्ष की तरह इस बार भी कपाट बंद होने का समय श्रद्धालुओं के लिए भावुक करने वाला होगा। दोपहर 2:56 बजे जब कपाट बंद होंगे, तो भक्तगण भगवान नारायण के शीतकालीन प्रवास के कारण होने वाले बिछोह को महसूस करेंगे।
26 नवंबर को उद्धव जी, कुबेर जी और शंकराचार्य जी की गद्दी डोली पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी।
कपाट बंदी के दौरान रावल धारण करेंगे स्त्री वेश
धार्मिक परंपरा के अनुसार, कपाट बंद करने से पूर्व रावल माता लक्ष्मी को गर्भगृह में स्थापित करते हैं। इसके लिए रावल को स्त्री भेष धारण किया जाता है और उन्हें लक्ष्मीजी की सहेली का स्वरूप माना जाता है।
लक्ष्मी मां को गर्भगृह में विराजमान कर उन्हें घृतकंबल ओढ़ाया जाता है। यह घृतकंबल माणा गांव की कुंवारी कन्याओं द्वारा स्थानीय बकरी की ऊन से तैयार किया जाता है। इसी परंपरा के साथ बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

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