AI  के ज़रिए अमेरिका और कनाडा में सिखाई जाएंगी गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाएं, CM धामी बोले– यह ऐतिहासिक कदम - Doonprimenews
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AI  के ज़रिए अमेरिका और कनाडा में सिखाई जाएंगी गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाएं, CM धामी बोले– यह ऐतिहासिक कदम

On: November 1, 2025 5:48 AM
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उत्तराखंड की लोकभाषाओं गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को अब डिजिटल युग में एक नई पहचान मिलने जा रही है। अमेरिका और कनाडा में अब इन भाषाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से सिखाया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “सांस्कृतिक अस्मिता और तकनीकी प्रगति के संगम का युगांतकारी प्रयास” बताया है।
देवभूमि उत्तराखंड कल्चरल सोसायटी कनाडा द्वारा आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में अमेरिका के सिएटल और कनाडा के सरे-वैंकूवर शहरों से भाषा डाटा कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रवासी उत्तराखंडियों को बधाई दी और इस पहल को राज्य की मातृभाषाओं के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “जब तक हमारी भाषा जीवित है, तब तक हमारी संस्कृति जीवित है।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस पहल को पूर्ण सहयोग देगी, ताकि उत्तराखंड की मातृभाषाएं विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकें।
इस नवनिर्मित पोर्टल के माध्यम से उत्तराखंड की तीन प्रमुख लोकभाषाओं—गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी—के करीब 10 लाख शब्द, वाक्य, कहावतें और लोककथाएं एकत्र की जाएंगी। यह विशाल भाषाई डाटा भविष्य में एआई प्लेटफार्मों के माध्यम से भाषा शिक्षण का आधार बनेगा। इस तकनीकी सहयोग से विदेशों में रह रहे लोग न केवल इन भाषाओं को सीख पाएंगे, बल्कि इनका उच्चारण, व्याकरण और सांस्कृतिक संदर्भ भी समझ सकेंगे।
कार्यक्रम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने कर्णप्रयाग से वर्चुअल रूप में जुड़कर कहा कि “भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं, संस्कारों और पहचान का जीवंत प्रतीक है।” उन्होंने अपनी जागर एवं ढोल सागर अकादमी की ओर से इस परियोजना को निरंतर सहयोग देने का संकल्प दोहराया।
अमेरिका में कार्यरत एआई आर्किटेक्ट सच्चिदानंद सेमवाल ने कहा कि यह पहल केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि यह हमारी जड़ों से जुड़ने का जनांदोलन है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत एआई-सक्षम भाषा शिक्षण केंद्रों की स्थापना अमेरिका और कनाडा में की जाएगी।
देवभूमि उत्तराखंड कल्चरल सोसायटी कनाडा के अध्यक्ष बिशन खंडूरी ने कहा कि सोसायटी के लिए इस ऐतिहासिक लांचिंग की मेजबानी करना गर्व का विषय है। यह कार्यक्रम विदेशों में रह रहे उत्तराखंडियों के लिए अपनी मातृभूमि से जुड़ाव की नई कड़ी साबित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि ये भाषा केंद्र पद्मश्री प्रीतम भरतवाण की जागर अकादमी से संबद्ध रहेंगे, जिससे प्रवासी बच्चे आधुनिक तकनीक के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाएं सीख सकेंगे।
इस अवसर पर सोसायटी के उपाध्यक्ष शिव सिंह ठाकुर, महामंत्री विपिन कुकरेती, उमेद कठैत, जगदीश सेमवाल, गिरीश रतूड़ी, रमेश नेगी, जीतराम रतूड़ी, विनोद रौतेला, मस्तूदास, शक्ति प्रसाद भट्ट और के.एस. चौहान सहित अनेक प्रवासी उत्तराखंडी उपस्थित रहे। कनाडा स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि, एआई विशेषज्ञ तथा विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के सदस्य भी कार्यक्रम में जुड़े।
यह ऐतिहासिक पहल न केवल उत्तराखंड की लोकभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी बनेगा।

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