जीएसटी दरों में कटौती से उत्तराखंड को लाभ — खेती, पर्यटन और उद्योग को मिला नया बल, पहाड़ों में बढ़ेगा रोजगार और मैदानों में उद्योगों की रफ्तार - Doonprimenews
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जीएसटी दरों में कटौती से उत्तराखंड को लाभ — खेती, पर्यटन और उद्योग को मिला नया बल, पहाड़ों में बढ़ेगा रोजगार और मैदानों में उद्योगों की रफ्तार

On: October 22, 2025 7:20 AM
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केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में की गई जीएसटी दरों में कटौती ने उत्तराखंड की कृषि, पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों में नई ऊर्जा भर दी है। करों में कमी से न केवल किसानों और उद्यमियों को राहत मिली है, बल्कि राज्य के पारंपरिक उत्पादों को भी राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने लगी है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ी उम्मीदें, किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में दाल, चावल और मिर्च जैसी पारंपरिक फसलों पर जीएसटी दरों में कमी से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। केंद्र सरकार ने तोर दाल, उत्तरकाशी के लाल चावल और अल्मोड़ा की जीआई टैग वाली लखोरी मिर्च पर कर दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।
तोर दाल राज्य के हर जिले में उगाई जाती है और स्थानीय व्यंजनों का अहम हिस्सा है। लाल चावल पुरोला और मोरी क्षेत्र की पहचान हैं, जिनकी खेती से लगभग चार हजार किसान जुड़े हैं। वहीं, अल्मोड़ा की लखोरी मिर्च अपनी तीव्र सुगंध और स्वाद के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। इन फसलों पर कर घटने से उनकी बाजार मांग और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

पर्यटन और होमस्टे क्षेत्र को नई उड़ान

पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में करीब 13.5 प्रतिशत योगदान देता है। केंद्र सरकार ने 7500 रुपये तक के होटल किराए पर जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इससे न केवल यात्रा और ठहरना सस्ता होगा, बल्कि नैनीताल, मसूरी, औली, चोपता, मुनस्यारी, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में होटलों, रेस्टोरेंटों और होमस्टे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इससे राज्य के करीब 80 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।

हस्तशिल्प उद्योग को मिलेगी नई पहचान

उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े ऐपण कला, रिंगाल शिल्प, ऊनी वस्त्र और पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों पर जीएसटी दर को 12 से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। यह निर्णय स्थानीय कारीगरों के लिए बड़ा वरदान साबित हो सकता है।
राज्य में ऐपण कला से करीब 4000 व्यक्ति, ऊनी वस्त्र निर्माण से 10 हजार से अधिक व्यक्ति, जबकि रिंगाल और बांस आधारित उत्पादों से जुड़े लगभग 47 प्रतिशत ग्रामीण परिवार प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। करों में कमी से इन पारंपरिक उद्योगों के उत्पाद अब बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।

मेडिकल डिवाइस पार्क और उद्योगों में बढ़ेगा निवेश

स्वास्थ्य उपकरणों पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने से राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में भी तेजी आने की संभावना है। इसका सबसे बड़ा लाभ इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एरिया (SIIDCUL) स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क को मिलेगा। यहां फिलहाल करीब 4000 व्यक्ति विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े हैं।
दर में कमी से निवेशकों का रुझान बढ़ेगा और मेडिकल उपकरण निर्माण में नए स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे राज्य के औद्योगिक ढांचे को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ और मैदान दोनों होंगे लाभान्वित

कुल मिलाकर, जीएसटी ढांचे में हुए सुधारों का लाभ दोनों क्षेत्रों — पहाड़ और मैदान — को समान रूप से मिलेगा। जहां एक ओर पहाड़ी इलाकों में कृषि और हस्तशिल्प से ग्रामीण आजीविका को संबल मिलेगा, वहीं मैदानी जिलों में औद्योगिक इकाइयों की रफ्तार तेज होगी।
केंद्र की यह पहल न केवल राज्य की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी, बल्कि उत्तराखंड को पर्यावरण-अनुकूल निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

यह भी पढ़ें – उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष: विधानसभा का विशेष सत्र होगा ऐतिहासिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी संबोधित

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