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“मानसून में पश्चिमी विक्षोभ के चलते ऊंची चोटियों पर बिखरी बर्फ, मौसम के अटपटे मिजाज से वैज्ञानिक भी चौंके”

On: September 4, 2025 9:08 AM
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उत्तराखंड में इस बार मानसून ने अलग ही रंग दिखाए हैं। गंगोत्री और बद्रीनाथ जैसी ऊंची चोटियों पर सितंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी होने लगी है। आमतौर पर यह नजारा अक्टूबर के मध्य के बाद देखने को मिलता है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने मौसम को बदल दिया है।

मानसून का असर और भारी वर्षा

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प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। अगस्त में बादल सामान्य से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा बरसे और सितंबर में भी भारी वर्षा का दौर थमा नहीं। इस पूरे मानसून सीजन में अब तक 25% अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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असमान बारिश का पैटर्न

इस बार बारिश का पैटर्न भी असामान्य रहा। कुछ जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई तो वहीं कई जिलों में सामान्य से भी कम वर्षा दर्ज की गई। वहीं, गर्मियों में भी सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण तापमान लंबे समय तक सामान्य या उससे कम बना रहा।

तापमान में 6 से 10 डिग्री की गिरावट

लगातार पांच दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश के बीच ज्यादातर क्षेत्रों में पारा तेजी से गिरा है। तापमान में 6 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की कमी दर्ज की गई। वहीं बीते दो दिनों में ऊंची चोटियों पर लगातार हिमपात होने से ठंड और बढ़ गई है।

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

दक्षिण-पश्चिम मानसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ का साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से उत्तराखंड समेत पूरे उत्तरी हिमालयी क्षेत्र में सामान्य से ज्यादा वर्षा दर्ज की जा रही है। यही कारण है कि तापमान तेजी से गिरा और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया।

पांच हजार मीटर ऊंचाई पर भी बर्फबारी

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार छह हजार मीटर ऊंचाई पर सालभर हिमपात होता रहता है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर भी बर्फबारी दर्ज की गई है। तापमान शून्य से नीचे पहुंचने के कारण बारिश की बूंदें बर्फ में बदल गईं।
आमतौर पर इतनी ऊंचाई पर हिमपात अक्टूबर के बाद ही होता है, मगर इस बार मानसून ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है।

रोहित थपलियाल, मौसम विज्ञानी का कहना है कि यह हिमपात दक्षिण-पश्चिम मानसून और पश्चिमी विक्षोभ की संयुक्त सक्रियता का नतीजा है।

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