Haridwar:पूर्व पार्षद और संत आमने-सामने आए, मंदिर पर विवाद के बाद पूरे इलाके में मचा हड़कंप - Doonprimenews
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Haridwar:पूर्व पार्षद और संत आमने-सामने आए, मंदिर पर विवाद के बाद पूरे इलाके में मचा हड़कंप

On: August 26, 2025 7:59 AM
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हरिद्वार के भीमगोड़ा क्षेत्र में सोमवार को मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। रामलीला भवन के पास सरकारी भूमि पर कब्जे और मंदिर बनाने के मुद्दे को लेकर संत और क्षेत्र के पूर्व पार्षद आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में सरेराह लात-घूंसे चलने लगे और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब खड़खड़ी स्थित एक आश्रम के संत अपने समर्थकों के साथ रामलीला भवन के पास बरगद के पेड़ के नीचे रखे प्रसाद और प्लास्टिक के डिब्बे हटाने पहुंचे। उनका कहना था कि इस स्थान की सफाई कर मंदिर निर्माण किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, कारोबारी पक्ष का आरोप है कि संत कब्जे की नीयत से पहुंचे थे और उनका सामान जबरन फेंकना शुरू कर दिया। इसी दौरान संत और पूर्व पार्षद लखन लाल चौहान के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते-देखते हाथापाई में बदल गई।

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झगड़े की भनक मिलते ही खड़खड़ी चौकी प्रभारी सतेंद्र भंडारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को किसी तरह शांत कराकर चौकी ले गए। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद दोनों पक्ष चौकी में भी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे।

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शहर कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि इस मामले में दोनों ओर से मुकदमे दर्ज किए गए हैं। संत ओमानन्द की तहरीर पर पूर्व पार्षद लखन लाल चौहान, मुकेश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, अमित अग्रवाल समेत 30 से 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं, कारोबारी मुकेश अग्रवाल की शिकायत पर संत स्वामी सुरेशानन्द, देवेश शर्मा ममगांई, बलराम गिरी, आदित्य गौड और मोहन उपाध्याय समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच खड़खड़ी चौकी प्रभारी सतेंद्र भंडारी को सौंपी गई है।

इस पूरे विवाद में खास बात यह रही कि हाथापाई और सार्वजनिक हंगामे के बावजूद प्रारंभ में किसी भी पक्ष ने पुलिस को तहरीर नहीं दी। हालांकि, बाद में दोनों ओर से शिकायतें आने पर पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

विवाद में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कुछ नेता भी शामिल होते दिखे, जिससे मामला और गरमा गया। अब देखना होगा कि सरकारी भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर खड़ा हुआ यह विवाद किस दिशा में जाता है।

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