उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्ती : हरिद्वार और नैनीताल में खुलेंगे नए साइबर थाने - Doonprimenews
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उत्तराखंड में साइबर अपराध पर सख्ती : हरिद्वार और नैनीताल में खुलेंगे नए साइबर थाने

On: August 22, 2025 10:07 AM
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उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने कदम उठाना शुरू कर दिया है। पुलिस विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है जिसके तहत जल्द ही हरिद्वार और नैनीताल में साइबर थाने खोले जाएंगे। फिलहाल प्रदेश में केवल देहरादून और ऊधमसिंहनगर (रुद्रपुर) में ही साइबर थाने संचालित हो रहे हैं।

पहले चरण में दो बड़े जिले

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

प्रदेश के सभी जिलों में भविष्य में साइबर थाना स्थापित करने की योजना है, लेकिन पहले चरण में हरिद्वार और नैनीताल को प्राथमिकता दी गई है। इन जिलों में केसों की संख्या और गंभीरता को देखते हुए यहां साइबर थाना खोलने की तैयारी है। इसके बाद अन्य जिलों में भी केसों के आधार पर थाने खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

पुलिस के लिए चुनौती बन रहा साइबर क्राइम

पिछले कुछ सालों में साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। जितनी तेजी से मामले सामने आ रहे हैं, उतनी ही तेजी से उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। देहरादून और रुद्रपुर स्थित मौजूदा साइबर थानों में स्टाफ की संख्या बहुत कम है। इसके चलते पुलिस ठगों को गिरफ्तार तो कर रही है, लेकिन पीड़ितों की रकम वापस दिलाने में सफलता कम मिल रही है।

साइबर ठगी के आंकड़े

2021 : 11.4 करोड़ रुपये की ठगी, केवल 1.18 करोड़ ही बरामद।

2022 : 40 करोड़ रुपये की ठगी, 2.44 करोड़ ही बच सके।

2023 : 69 करोड़ रुपये की ठगी, पुलिस ने 7.31 करोड़ वापस दिलाए।

2024 : ठगी का आंकड़ा बढ़कर 167 करोड़ रुपये पहुंचा, लेकिन केवल 29.51 करोड़ ही रिकवर हुए।

2025 (जुलाई तक) : 84 करोड़ की ठगी, जिसमें से 12.08 करोड़ ही वापस मिल पाए।

इन आंकड़ों से साफ है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन रकम वापसी का ग्राफ बेहद कम है।

साइबर सेल की कमजोर स्थिति

प्रदेश के हर जिले में साइबर सेल जरूर बनाई गई है, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है। ज्यादातर मामलों में कार्रवाई केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित रह जाती है। इसका एक कारण यह भी है कि साइबर सेल में तैनात निरीक्षक और दारोगा स्तर के अफसरों को कई बार मेला ड्यूटी, कानून-व्यवस्था और धरना-प्रदर्शन जैसे अन्य कामों में भी लगा दिया जाता है। नतीजतन, साइबर अपराध से निपटने की क्षमता कमजोर बनी रहती है।

नए साइबर थानों के खुलने से उम्मीद है कि प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराध पर नियंत्रण होगा और पीड़ितों को ज्यादा राहत मिल पाएगी।

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