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उत्तराखंड में पानी का बिल बना सिरदर्द, दो माह में 15-18 हजार रुपये चुकाने को मजबूर उपभोक्ता

On: August 17, 2025 10:55 AM
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ऋषिकेश। नगर निगम के कई वार्डों में लगाए गए स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं की नींद उड़ाने लगे हैं। छोटे परिवारों को भी दो महीने का बिल 15 से 18 हजार रुपये तक थमाया जा रहा है। अचानक हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी से लोग हैरान हैं और जल संस्थान की बिलिंग व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

30 से 35 गुना तक बढ़े बिल

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

इंद्रानगर, बापू ग्राम, सुमन नगर, शिवाजी नगर, मीरा नगर और बीस बीघा जैसे इलाकों में पिछले एक साल से वर्ल्ड बैंक के तहत पेरी अर्बन योजना के अंतर्गत स्मार्ट मीटर लगाए गए थे। लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर लगने के बाद बिलों में 30 से 35 गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

पार्षद भी विरोध में

बढ़े हुए बिलों को लेकर पार्षदों ने जल संस्थान अधिकारियों से कई बार आपत्ति दर्ज कराई। इंद्रानगर, मालवीय नगर, सुमन नगर और प्रगति विहार के पार्षदों ने इस मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाई। दबाव में आकर कुछ क्षेत्रों के बिलों को घटाया गया, लेकिन अधिकांश वार्डों में समस्या अभी भी जस की तस बनी है।

विभाग की सफाई

जल संस्थान की क्षेत्रीय जेई पिंकी चंद का कहना है कि जांच में यह सामने आया कि नए और पुराने दोनों कनेक्शन से पानी का रीडिंग स्मार्ट मीटर में जुड़ रहा था, जबकि उपभोक्ता पुरानी लाइन का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे थे। इससे बिल अचानक हजारों रुपये तक पहुंच गए। विभाग का कहना है कि अब पुराने कनेक्शन को अलग किया जा रहा है और जल्द ही सभी वार्डों में राहत मिलेगी।

क्या है शुल्क व्यवस्था?

जल संस्थान के नियमों के अनुसार, दो माह में 40 हजार लीटर तक खपत पर केवल 449 रुपये शुल्क है। इसके बाद हर हजार लीटर पर 15.40 रुपये अतिरिक्त देना पड़ता है। लेकिन दोहरी लाइन से खपत जुड़ने पर कई उपभोक्ताओं के बिल हजारों में पहुंच गए।

उपभोक्ताओं के केस

बापू ग्राम निवासी कृपाल सिंह और उमराव सिंह का बिल 9020 रुपये आया, शिकायत पर घटाकर 1470 रुपये कर दिया गया।

महावीर सिंह और हरि सिंह को 13692 रुपये का बिल थमाया गया, बाद में कम कर 1460 रुपये लिया गया।

मीरा नगर निवासी राकेश सेठी और राजेंद्र सिंह सेठी को 18425 रुपये का बिल मिला।

मीरा नगर के ही रेवत सिंह और भोपाल सिंह को 17971 रुपये का बिल थमा दिया गया।

उपभोक्ताओं में गहरी नाराज़गी

इतने भारी-भरकम बिलों से उपभोक्ता परेशान हैं और पार्षदों के साथ मिलकर विभाग पर दबाव बना रहे हैं। जल संस्थान का दावा है कि जल्द समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन फिलहाल लोगों के लिए स्मार्ट मीटर सिरदर्द बन चुके हैं।

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