उत्तराखंड:अब ग्वेल देवता के न्याय और श्रीनंदा राजजात की अद्भुत परंपरा से आमजन भी होंगे रूबरू, एससीईआरटी ने शासन को भेजा प्रस्ताव - Doonprimenews
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उत्तराखंड:अब ग्वेल देवता के न्याय और श्रीनंदा राजजात की अद्भुत परंपरा से आमजन भी होंगे रूबरू, एससीईआरटी ने शासन को भेजा प्रस्ताव

On: July 30, 2025 11:06 AM
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देहरादून। उत्तराखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ पुस्तक अब आमजन के लिए भी सुलभ होगी। अब तक स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा रही इस पुस्तक को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) सार्वजनिक पुस्तकालयों, ग्राम पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों और पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में एससीईआरटी ने शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है।

इस पुस्तक के माध्यम से उत्तराखंड की पौराणिक, पुरातात्विक, लोक सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर से न सिर्फ छात्र बल्कि आम लोग भी परिचित हो सकेंगे। ग्वेल देवता की न्याय प्रणाली, श्री नंदा राजजात की परंपरा और पंचकेदार जैसे विषयों को इसमें रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का प्रयास

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

राज्य सरकार की मंशा है कि उत्तराखंड की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और प्रेरणादायी विभूतियों के बारे में युवाओं को गहराई से जानकारी मिले। इसी सोच के तहत कक्षा 6, 7 और 8 के छात्रों के लिए इस विशेष पाठ्य पुस्तक को तैयार किया गया है। इसमें न केवल ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक आयोजनों का वर्णन है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, पर्यावरण संरक्षकों और सैन्य वीरों के प्रेरक जीवन प्रसंग भी शामिल हैं।

जनहित में पुस्तक को आमजन के लिए उपलब्ध कराने की मांग

अब तक यह पुस्तक केवल स्कूलों तक सीमित थी, लेकिन साहित्य प्रेमियों और शिक्षाविदों की लगातार मांग के बाद अब इसे आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति को भी इस संबंध में जनता के सुझाव और अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं। एससीईआरटी इस दिशा में सक्रियता से कार्य कर रही है ताकि राज्य की सांस्कृतिक चेतना को व्यापक जनसंपर्क मिल सके।

कक्षा-6: जमीनी स्तर से जुड़ी विरासत का अध्ययन

कक्षा 6 की पुस्तक में कुल 24 अध्याय हैं, जिनमें शामिल हैं:

श्री बदरीनाथ धाम

पंडित नैन सिंह रावत (अनोखा सर्वेयर)

न्यायकारी ग्वेल देवता

समाज सुधारक खुशीराम आर्य

विश्व धरोहर रम्माण उत्सव

वीरांगना तीलू रौतेली

वीर योद्धा माधो सिंह भंडारी
इन अध्यायों के माध्यम से विद्यार्थियों को राज्य की जमीनी संस्कृति, धर्म और संघर्षशील व्यक्तित्वों से परिचित कराया जाता है।

कक्षा-7: आंदोलनों और लोकगाथाओं की गूंज

इस स्तर पर कुल 27 पाठ हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

कहानी पंचकेदार की

कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे

श्री नंदा राजजात

कत्यूर राजमाता जिया रानी

उत्तराखंड राज्य आंदोलन: खटीमा और मसूरी गोलीकांड

शहीद मेजर राजेश अधिकारी

चौंदकोट जनशक्ति मार्ग की गौरवगाथा

कक्षा-8: समकालीन शौर्य और सांस्कृतिक विविधता

आठवीं कक्षा की पुस्तक भी 27 अध्यायों से समृद्ध है। कुछ प्रमुख अध्याय हैं:

पंचप्रयाग

अमर सेनानी जयवंत सिंह रावत

बिस्सू मेला

18वीं गढ़वाल राइफल की वीरगाथा

गंगोत्री गर्ब्याल

रामधाम (उत्तराखंड में)

जुझारू नेता विपिन त्रिपाठी

गौचर मेला

समापन: राज्य की गौरवगाथा से होगा हर नागरिक परिचित

यह पुस्तक न केवल स्कूली शिक्षा का एक भाग है, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा को शब्दों में पिरोने का एक सशक्त प्रयास है। ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ पुस्तक के माध्यम से प्रदेश की अनमोल धरोहर और प्रेरणास्पद व्यक्तित्वों से जुड़ाव संभव हो सकेगा। अब यह प्रयास किया जा रहा है कि यह पुस्तक हर गांव, हर पुस्तकालय और हर शिक्षार्थी तक पहुंचे।

यह भी पढें- Uttarakhand Caste Census: एक अक्टूबर से होगी जातीय जनगणना की शुरुआत, दो चरणों में होगी प्रक्रिया

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