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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति पद से हटाई गईं, गंभीर आरोपों में फंसीं

On: July 6, 2025 9:34 AM
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हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय इन दिनों गंभीर प्रशासनिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति को कुलाधिपति एसके आर्य ने पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, कुलाधिपति के आदेशों की अनदेखी और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब उन्हें देहरादून स्थित कन्या गुरुकुल परिसर के समन्वयक कार्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में इस घटनाक्रम के बाद से तनावपूर्ण माहौल व्याप्त है।

कुलाधिपति और कुलपति के बीच शुरू हुआ विवाद

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यह विवाद उस समय गहराया जब अगस्त 2024 में प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की पहली महिला प्रभारी कुलपति नियुक्त किया गया और उसके कुछ समय बाद एसके आर्य को कुलाधिपति के रूप में नियुक्त किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कुलाधिपति की नियुक्ति यूजीसी रेगुलेशन 2019 के तहत हुई है, जबकि कर्मचारी वर्ग विश्वविद्यालय में यूजीसी रेगुलेशन 2023 लागू करने की मांग कर रहा है। कुलाधिपति की नियुक्ति को लेकर विश्वविद्यालय के अंदर विरोध का माहौल बना रहा।

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कुलसचिव की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद

मामला और अधिक उलझ गया जब दो जुलाई 2025 को विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच मारपीट की घटना हुई। इस घटना के बाद कुलपति प्रो. हेमलता ने कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार को पद से हटाते हुए उनके स्थान पर प्रो. विपुल शर्मा को कार्यवाहक कुलसचिव नियुक्त कर दिया। वहीं दूसरी ओर कुलाधिपति एसके आर्य ने प्रो. सुनील कुमार को पूर्णकालिक कुलसचिव घोषित करते हुए उन्हें पद पर बने रहने के आदेश जारी किए। इससे विश्वविद्यालय में प्रशासनिक आदेशों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई।

आदेशों की अनदेखी और जवाबदेही में चूक का आरोप

कुलाधिपति एसके आर्य ने अपने पत्र में लिखा है कि कुलपति कार्यालय की ओर से भेजे गए कई पत्रों और निर्देशों को प्रो. हेमलता ने नजरअंदाज किया। 28 जून, 30 जून और तीन जुलाई को विभिन्न प्रशासनिक विषयों पर छह पत्र भेजे गए, जिनका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला और न ही अपेक्षित कार्रवाई की गई।

दो जुलाई की हिंसक घटना के दौरान प्रो. हेमलता की अनुपस्थिति और उन्होंने प्रबंधन बोर्ड के सदस्यों से कोई संवाद न करना भी उनकी भूमिका पर सवाल खड़े करता है। कुलाधिपति ने इसे नेतृत्व में गंभीर चूक बताया है। इसके अलावा, रजिस्ट्रार को हटाने का निर्णय बिना परामर्श और प्रक्रिया के लिया गया, जो प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना गया है।

प्रबंधन बोर्ड की बैठक नहीं बुलाने पर नाराजगी

कुलाधिपति ने यह भी आरोप लगाया कि प्रो. हेमलता ने जानबूझकर प्रबंधन बोर्ड की बैठक नहीं बुलाई, जिससे कई अहम नीतिगत फैसले लंबित रह गए। विश्वविद्यालय पत्राचार की फोरेंसिक जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। कुलाधिपति ने कहा कि संबंधित ईमेल आइडी से पत्राचार करने के बावजूद भी जवाब नहीं दिया गया, जो अत्यधिक गंभीर है।

प्रो. हेमलता को समन्वयक कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश

इन सभी आरोपों के आधार पर कुलाधिपति ने प्रो. हेमलता कृष्णमूर्ति को तत्काल प्रभाव से गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति पद से हटाते हुए देहरादून के कन्या गुरुकुल परिसर स्थित समन्वयक कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय के बाद विश्वविद्यालय में तनाव का माहौल और अधिक बढ़ गया है।

कुलसचिव पद को लेकर असमंजस जारी

इस बीच कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार का मामला भी अभी तक सुलझा नहीं है। उन्हें हटाने के आदेश के बावजूद उन्होंने अपनी मूल तैनाती पीजी कॉलेज देहरादून में रिपोर्ट नहीं किया है और न ही विश्वविद्यालय में कुलसचिव का कार्यभार संभाल रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलसचिव के रूप में फिलहाल प्रो. विपुल शर्मा जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

कर्मचारियों में असमंजस, विश्वविद्यालय में अस्थिरता का माहौल

कुलपति और कुलाधिपति के बीच टकराव से विश्वविद्यालय के कर्मचारी, छात्र और शैक्षणिक समुदाय असमंजस में हैं। प्रशासनिक निर्णयों में द्वंद्व के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य करने के लिए अब उच्च शिक्षा विभाग और यूजीसी के हस्तक्षेप की भी मांग उठने लगी है।

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