नई दिल्ली |
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और युद्ध के बादलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से भारत का दूसरा एलपीजी (LPG) टैंकर ‘नंदा देवी’ सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले भारत का एक अन्य जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी रास्ते से सफलतापूर्वक अपनी यात्रा पूरी कर चुका है।
यह घटनाक्रम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत और ईरान के मजबूत होते कूटनीतिक रिश्तों की भी तस्दीक करता है।
मिशन ‘नंदा देवी’: 46,000 मीट्रिक टन गैस का सुरक्षित ट्रांजिट
सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को ‘नंदा देवी’ ने सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया। यह जहाज 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत आ रहा है। भारत जैसे विशाल देश की घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए यह खेप अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वर्तमान में ‘नंदा देवी’ खुले समुद्र में है और भारतीय नौसेना के रडार और सुरक्षा घेरे में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि नौसेना के एसेट्स (समुद्री बेड़े) इन जहाजों को पल-पल गाइड कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
‘शिवालिक’ की घर वापसी और नौसेना का पहरा
इससे पहले, ‘शिवालिक’ नामक एलपीजी टैंकर ने भी इसी चुनौतीपूर्ण मार्ग को पार किया था। भारतीय नौसेना इस जहाज को निरंतर सुरक्षा प्रदान कर रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ‘शिवालिक’ अगले 48 घंटों के भीतर भारत के किसी प्रमुख बंदरगाह (संभवतः मुंबई या कांडला) पर लंगर डाल देगा।
महत्वपूर्ण तथ्य: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
मोदी-पेजेशकियन वार्ता का असर
इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलना कोई संयोग नहीं है। इसके पीछे नई दिल्ली और तेहरान के बीच उच्च स्तरीय कूटनीति काम कर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
प्रधानमंत्री मोदी की इस सक्रिय कूटनीति का ही परिणाम है कि युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद भारतीय झंडे वाले जहाजों को ईरान ने प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) प्रदान किया।
ईरानी राजदूत का बयान: ‘भारत हमारा सच्चा दोस्त’
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतली ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान इस ओर स्पष्ट संकेत दिए थे। उन्होंने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा:
“भारत हमारा एक विश्वसनीय मित्र है। इस क्षेत्र में ईरान और भारत के हित साझा हैं। मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकटपूर्ण हालातों में भी भारत सरकार ने विभिन्न स्तरों पर हमारा सहयोग किया है। यही कारण है कि भारतीय जहाजों के लिए हमारे रास्ते खुले हैं।”
फतली ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और वह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका की सराहना करता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक चुनौतियां
मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर दी है। ऐसे में भारत के लिए अपने टैंकरों को सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती थी।
- ऊर्जा निर्भरता: भारत अपनी एलपीजी और कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है।
- नौसेना की भूमिका: ‘मिशन सागर’ और अन्य ऑपरेशंस के माध्यम से भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर और उससे सटे रणनीतिक जलमार्गों में अपनी धाक जमाई है।
- संतुलित विदेश नीति: इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी और ईरान के साथ ऐतिहासिक मित्रता के बीच संतुलन बिठाना भारत की बड़ी उपलब्धि है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ का सुरक्षित ट्रांजिट यह दर्शाता है कि वैश्विक संकट के समय में भी भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित रखने में सक्षम है। यह सफलता केवल परिवहन की नहीं, बल्कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और मजबूत रक्षा तंत्र की जीत है।
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आने वाले दिनों में यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो भारत और ईरान के बीच का यह ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ अन्य व्यापारिक जहाजों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। फिलहाल, भारतीय एजेंसियां हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत! होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘शिवालिक’ के बाद अब दूसरा भारतीय LPG टैंकर ‘नंदा देवी’ भी सुरक्षित बाहर निकल गया है। 46,000 मीट्रिक टन गैस लेकर आ रहे इस जहाज को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में लाया जा रहा है। जानिए कैसे पीएम मोदी और ईरान के बीच हुई बातचीत ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता किया।










