होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला भारत का दूसरा LPG जहाज ‘नंदा देवी’, कूटनीतिक जीत के बाद ऊर्जा सुरक्षा हुई पुख्ता
अंततः, उत्तराखंड के पारिस्थितिक तंत्र के लिए यह पश्चिमी विक्षोभ काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मार्च के महीने में पारे का इस कदर बढ़ना जंगलों की आग (Forest Fire) की घटनाओं को भी न्योता देता है, ऐसे में यह संभावित बारिश वनों की नमी बरकरार रखने में सहायक सिद्ध होगी। अगले तीन दिन उत्तराखंड के लिए मौसम के लिहाज़ से काफी उतार-चढ़ाव वाले रहने वाले हैं। यदि आप इस सप्ताहांत पहाड़ों की सैर का मन बना रहे हैं, तो बदलती परिस्थितियों को देखते हुए अपने साथ रेनकोट और पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर रखें, क्योंकि पहाड़ों का मिजाज पल भर में बदल सकता है।