हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक निजी फैक्ट्री में दो नाबालिगों समेत तीन लड़कियों को बंधक बनाकर न केवल जबरन मजदूरी कराई जा रही थी, बल्कि उनके साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न की सभी हदें पार कर दी गईं। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्लांट हेड सहित पांच आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बंधक बनाकर मजदूरी और उम्र का फर्जीवाड़ा
मामला सिडकुल स्थित ‘कार्तिक इंटरप्राइजेज’ फैक्ट्री का है। शिकायतकर्ता युवती, जो उत्तर प्रदेश के सीतापुर की रहने वाली है, ने पुलिस को बताया कि वह पिछले दो वर्षों से इस कंपनी में कार्यरत है। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके साथ काम करने वाली दो अन्य लड़कियां नाबालिग हैं। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए इन नाबालिगों के आधार कार्ड में उम्र बढ़वाकर उन्हें काम पर रखा था, ताकि कागजी कार्रवाई में वे वयस्क दिख सकें।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि कंपनी में उनकी मजदूरी में मनमानी कटौती की जाती थी। परेशान होकर जब उन्होंने काम छोड़ने का प्रयास किया, तो प्लांट हेड और सुपरवाइजर उन्हें बार-बार फोन कर दबाव बनाते और वापस बुला लेते थे।
24 मार्च की काली दोपहर: पार हुई दरिंदगी की हदें
घटनाक्रम के अनुसार, 24 मार्च को जब लड़कियां चाय पीकर काम पर लौटीं, तो उनके साथ जो हुआ उसने सुरक्षा व्यवस्था और औद्योगिक इकाइयों के भीतर महिलाओं की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िताओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप:
- दुपट्टा उतारा और हाथ बांधे: लड़कियों का आरोप है कि उन्हें ऑफिस में बुलाकर पहले महिला गार्ड से तलाशी कराई गई। कुछ न मिलने के बावजूद उन्हें दोबारा बुलाया गया और विरोध करने पर उनके साथ गाली-गलौच की गई। आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने उनके दुपट्टे तक उतार दिए और उनके हाथ बांधकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की।
- सार्वजनिक अपमान: मारपीट के बाद उन्हें प्लांट के भीतर ले जाया गया, जहाँ अन्य कर्मचारियों के सामने उन्हें अपमानित किया गया।
- जबरन चोरी कबूलवाने का दबाव: प्रबंधन ने उनके मोबाइल छीन लिए और वीडियो बनाते हुए उन पर दबाव डाला कि वे चोरी की बात स्वीकार करें।
जब घटना की जानकारी लड़कियों के परिजनों को मिली, तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्हें वहां से बचाकर ले गए।
पुलिस की कार्रवाई: 5 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मामले की जानकारी मिलते ही हरिद्वार एसएसपी नवनीत सिंह ने तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। सिडकुल थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि मुख्य शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पांच लोगों को नामजद किया है:
- रजनीश शर्मा (प्लांट हेड)
- मुकेश (सुपरवाइजर)
- प्रभा (लाइन इंचार्ज)
- स्वीटी (लाइन हेड)
- महिला गार्ड
इन सभी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), बंधक बनाने, मारपीट करने और अभद्रता करने जैसी आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फैक्ट्री में अन्य कितने नाबालिगों से अवैध रूप से काम कराया जा रहा है।
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औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा पर सवाल
सिडकुल जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। यह मामला न केवल बाल श्रम का है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और उनके मानवाधिकारों के हनन का भी है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि फैक्ट्रियों के भीतर आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) का न होना और श्रम विभाग की ढिलाई ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है। नाबालिगों के आधार कार्ड में हेरफेर कर उन्हें काम पर रखना एक बड़ा संगठित अपराध है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
निष्कर्ष
हरिद्वार पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। यह घटना एक चेतावनी है कि विकास की चकाचौंध के पीछे कैसे गरीब और मजबूर लड़कियों का शोषण हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि सिडकुल की अन्य फैक्ट्रियों में भी औचक निरीक्षण कर बाल श्रम और सुरक्षा मानकों की जांच की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी के साथ ऐसी ‘हैवानियत’ न हो।











