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धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में जुए और सट्टे पर लगेगी लगाम, पांच अहम विधेयकों को मिली मंजूरी

On: March 6, 2026 3:44 PM
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में उत्तराखंड कैबिनेट बैठक 2026 की फाइल फोटो

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार का दिन प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की इस अहम बैठक में राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाले कई बड़े फैसलों पर विस्तृत चर्चा की गई। सचिवालय में संपन्न हुई इस बैठक में मंत्रियों के समूह ने विभिन्न विभागों के प्रस्तावों का बारीकी से अवलोकन किया, जिसके बाद कुल पांच महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। ये निर्णय न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सख्त बनाएंगे, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और समाज के विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा करने में भी मील का पत्थर साबित होंगे।
मंत्रिमंडल की इस बैठक का सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु राज्य में पनप रहे अपराध के नए स्वरूपों पर अंकुश लगाना रहा। विशेष रूप से सार्वजनिक जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी की बढ़ती प्रवृत्तियों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। इसी को देखते हुए कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026’ को लाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में प्रचलित कानून पुरानी व्यवस्थाओं के अनुरूप थे, जो आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले सट्टे को पूरी तरह कवर नहीं कर पा रहे थे। नए विधेयक के लागू होने के बाद अवैध रूप से सट्टा चलाने वालों और इसमें शामिल नेटवर्क पर पुलिस और प्रशासन का शिकंजा और अधिक कस जाएगा। सख्त जेल की सजा और भारी भरकम जुर्माने के प्रावधानों के जरिए सरकार युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने और समाज में नैतिकता बनाए रखने के लिए संकल्पित नजर आ रही है।
शिक्षा जगत के लिए भी यह बैठक बेहद सकारात्मक रही। राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023’ में संशोधन करने का बड़ा फैसला लिया गया। अब नए संशोधन विधेयक के माध्यम से इन संस्थानों के संचालन में सरकार की निगरानी बढ़ेगी और एक समान मानक तय किए जाएंगे। अक्सर यह देखा जाता है कि कई निजी संस्थान बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। सरकार का यह नया कदम छात्रों के हितों की रक्षा करने और उत्तराखंड को उत्तर भारत के एक प्रमुख ‘एजुकेशन हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।
सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखें तो उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट पहचान यहाँ की भाषा और बोलियां हैं। सरकार ने अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए ‘उत्तराखंड भाषा संस्थान अधिनियम, 2018’ के अनुमोदन को हरी झंडी दे दी है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और अन्य क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण की दिशा में एक भावनात्मक निवेश भी है। भाषा संस्थान के सशक्त होने से स्थानीय साहित्यकारों को मंच मिलेगा, शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ी अपनी मातृभाषा से गर्व के साथ जुड़ी रह सकेगी।
इसके साथ ही, समाज के अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को और अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए अल्पसंख्यक आयोग के नियमों में बदलाव की तैयारी की गई है। आयोग को अधिक जवाबदेह और सक्रिय बनाने के लिए संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई है, जिससे जमीनी स्तर पर शिकायतों का निस्तारण तेजी से हो सकेगा। कार्मिक विभाग से जुड़े नियमों को अधिनियम का रूप देने का निर्णय भी कर्मचारियों के हित में है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में स्पष्टता आएगी और विवादों की संभावना कम होगी।
अंततः, धामी कैबिनेट के ये सभी पांचों निर्णय इस बात का संकेत हैं कि सरकार अब केवल कागजी आदेशों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन्हें कानूनी रूप देकर धरातल पर कड़ाई से लागू करना चाहती है। बैठक में पारित इन सभी प्रस्तावों को आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। एक बार जब ये विधेयक कानून की शक्ल ले लेंगे, तब उत्तराखंड में विकास की गति और कानून का राज और अधिक प्रभावी ढंग से दिखाई देगा। मुख्यमंत्री का “विकल्प रहित संकल्प” इन नीतिगत सुधारों के माध्यम से राज्य को आदर्श राज्य बनाने की राह पर आगे ले जा रहा है।

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