चारधाम यात्रा: देहरादून में यात्री वाहनों के लिए 'नाइट कर्फ्यू', रात 10 से सुबह 4 तक पाबंदी - Doonprimenews
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चारधाम यात्रा: देहरादून में यात्री वाहनों के लिए ‘नाइट कर्फ्यू’, रात 10 से सुबह 4 तक पाबंदी

On: April 26, 2026 9:28 AM
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देहरादून पुलिस चेकपोस्ट पर रात के समय रोके गए यात्री वाहन और प्रशासन का सूचना बोर्ड।

​देहरादून |

​उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने पूरे शबाब पर है। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार, बद्री विशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए देवभूमि पहुँच रहे हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या और पहाड़ी रास्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए कमर कस ली है। इसी क्रम में, देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए जनपद में रात के समय यात्री वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

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​रात 10 से सुबह 4 बजे तक ‘नो एंट्री’

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

​चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एसएसपी देहरादून ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि रात 10:00 बजे से सुबह 04:00 बजे तक किसी भी यात्री वाहन को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय मुख्य रूप से सड़क हादसों में कमी लाने और रात के समय होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है।

​एसएसपी ने बताया कि गढ़वाल महानिरीक्षक (IG) और गढ़वाल आयुक्त के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी अधीनस्थों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

​भारी वाहनों के लिए विशेष नियम

​जहाँ एक ओर यात्री वाहनों (बस, टेंपो ट्रैवलर, टैक्सी आदि) पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, वहीं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले भारी वाहनों के लिए प्रशासन ने कुछ छूट दी है, लेकिन यह पूरी तरह पुलिस की निगरानी में होगा।

  • ​निगरानी तंत्र: रात 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच चलने वाले भारी वाहनों को संबंधित थाना, चौकी और चेकपोस्ट की निगरानी में ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी।
  • ​सघन चेकिंग: सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रात के समय बैरियरों पर मुस्तैद रहें और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें।

​क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

​पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में रात के समय वाहन चलाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके पीछे प्रशासन ने कुछ मुख्य कारणों को रेखांकित किया है:

  • ​दुर्घटनाओं का खतरा: रात के समय सड़कों पर भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही अधिक होती है। ऐसे में यात्री वाहनों और भारी वाहनों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है।
  • ​दृश्यता और थकान: लंबी यात्रा के कारण ड्राइवरों में थकान और रात के समय कम दृश्यता (Visibility) अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती है।
  • ​वन्यजीवों की सुरक्षा: रात के समय कई संवेदनशील मार्गों पर वन्यजीवों की आवाजाही भी होती है, जिससे वाहनों के टकराने का डर रहता है।
  • ​सड़क चौड़ीकरण और निर्माण: कई स्थानों पर ‘ऑल वेदर रोड’ का काम या भूस्खलन के कारण मरम्मत का कार्य चलता है, जो रात के समय यात्रियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

​श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी

​प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना इसी समय सारणी के अनुसार बनाएं।
​”यात्रियों की जान हमारे लिए सबसे कीमती है। हम चाहते हैं कि श्रद्धालु सुरक्षित लौटें। रात के समय विश्राम करना और सुबह ताजा मन से यात्रा शुरू करना न केवल सुरक्षित है, बल्कि यात्रा के अनुभव को भी सुखद बनाता है।” – एसएसपी देहरादून

​यात्रियों के लिए मुख्य सुझाव:

  • ​अपने गंतव्य पर रात 10 बजे से पहले पहुँचने का प्रयास करें।
  • ​यदि आप रास्ते में हैं, तो सुरक्षित पार्किंग या होटल/होमस्टे में ही रात बिताएं।
  • ​पुलिस और यातायात विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

​प्रशासनिक मुस्तैदी और बैरियर चेकिंग

​एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसका धरातल पर क्रियान्वयन भी जरूरी है। देहरादून के प्रवेश द्वारों जैसे आशारोड़ी, कुल्हाल और ऋषिकेश मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। रात के समय बैरियरों पर सीसीटीवी कैमरों और तैनात पुलिसकर्मियों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
​नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ‘मोटर वाहन अधिनियम’ के तहत न केवल चालान किया जाएगा, बल्कि वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।

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​निष्कर्ष

​चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी और आस्था का केंद्र है। प्रशासन का यह कदम थोड़ा सख्त जरूर लग सकता है, लेकिन बीते वर्षों में हुए सड़क हादसों के आंकड़ों को देखें तो यह एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है। ‘सुरक्षित यात्रा, सुखद यात्रा’ के मंत्र के साथ अब देवभूमि आने वाले श्रद्धालुओं को समय की इस पाबंदी का सम्मान करना होगा।

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